अब मनरेगा के कामों पर गाँव वालों की ही नज़र

अब मनरेगा के कामों पर गाँव वालों की ही नज़रगाँव कनेक्शन

बागपत। प्रधानों और पंचायत सचिवों के लिए मनरेगा के तहत धांधली करना अब आसान नहीं होगा। सरकार आए दिन आने वाली शिकायतों को देखते हुए गाँव के ही कुछ लोगों को इसकी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी है।

देश की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना में आए दिन गड़बड़ी और घोटाले की शिकायतें आती रहती हैं। इनसे निपटने के लिए शासन ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत हुए कार्यों की हकीकत जानने के लिए जांच के आदेश भेजे हैं। साथ ही सभी खंड विकास अधिकरियों से ब्यौरा तलब किया है। अब एक वर्ष के लिए सोशल ऑडिट टीम का गठन किया जाएगा और इसमें 16 से 62 आयु वर्ग की आम जान की भागीदारी सुनिश्चित की गई है, जिसमें प्रत्येक गाँव में से पांच सदस्यों का चयन होगा, जिसने भी घोटाला किया होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सोशल ऑडिट टीम का गठन होते ही अधिकतर गाँवों का घोटाला उजागर हो जाएगा। जिला विकास अधिकारी हाकिम सिंह का कहना है, ''सभी खंड विकास अधिकारियों को पत्र भेज दिया गया है। समय रहते आवेदन पत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।’’

देश में सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में मनरेगा जॉब कार्डधारी परिवारों की संख्या सबसे ज्यादा है। वित्तीय वर्ष 2014-15 में उत्तर प्रदेश में डेढ़ करोड़ से ज्यादा परिवार के पास मनरेगा जॉब कार्ड था लेकिन 100 दिनों का रोजगार हासिल करने वाले सर्वाधिक परिवार उत्तर प्रदेश से नहीं हैं। इस प्रदेश में एक फीसदी परिवार भी ऐसे नहीं है जिन्हें 100 दिनों का रोजगार मिला हो। देश का सबसे ज्यादा मनरेगा जॉब कार्डधारी परिवारों वाला राज्य उत्तर प्रदेश 100 दिनों का रोजगार हासिल करने वाले परिवारों की तादाद में आठवें पायदान पर है।

मनरेगा की मॉनिटरिंग के लिए सोशल ऑडिट निदेशालय के निदेशक राजवर्धन ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा, ''ग्राम पंचायतों में मनरेगा तथा इंदिरा आवास योजनाओं के अंतर्गत कराए गए कार्यों की जांच होगी। इसके लिए सोशल ऑडिट कराने की तैयारी है। वर्ष 2016-17 के लिए सोशल ऑडिट टीमों के गठन की प्रक्रिया प्रारंभ करने को कहा गया है।’’

आवेदन पत्र का प्रारूप

निदेशक ने सोशल ऑडिट टीम के सदस्यों के चयन के लिए आवेदन आमंत्रित करने के निर्देश दिए गए हैं। आवेदन पत्र का प्रारूप भी भेजा गया है। जिला तथा ब्लॉक स्तर पर नोटिस बोर्ड पर इसे चस्पा भी किया जाएगा।

जनपद में तो घोटाला ही घोटाला

यदि बागपत जनपद की बात की जाए तो यहां तो घोटाला ही घोटाला है। यहां 80 प्रतिशत गाँवों में मनरेगा योजना के अलावा अन्य योजनाओं में लाखों रुपये का घोटाला एक गाँव में मिल जाएगा, जैसे गाधी, सूजरा, क्यामपुर, मवीकलां, बाघू, बावली, किशनपुर बराल, रूस्तमपुर, ककड़ीपुर आदि ऐसे गाँव हैं जहां घोटालों की बाढ़ है, लेकिन आज तक इनके खिलाफ कोई कार्रवाई तक नहीं की गई है।

रिपोर्टर - सचिन त्यागी

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