अब पहिए पर चलकर अस्पताल पहुंचेंगे गाँव

अब पहिए पर चलकर अस्पताल पहुंचेंगे गाँवgaonconnection

लखनऊ। कैबिनेट बैठक में यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राज्य में 170 नेशनल मोबाइल मेडिकल यूनिट यानि मोबाइल अस्पतालों के संचालन को मंजूरी दे दी है। इससे अब दूर-दराज़ के क्षेत्रों में नियमित प्राथमिक इलाज पहुंचाया जा सकेगा।

इस परियोजना को सरकार सार्वजनिक-निजी सहभागिता (पीपीपी) के आधार पर चलाएगी। इन मोबाइल अस्पतालों के माध्यम से प्राथमिक उपचार, कम्युनिकेबल एवं नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों की स्क्रीनिंग, बेसिक लैब टेस्ट, टीकाकरण आदि सेवाएं प्रदान की जाएंगी। 

नेशनल मोबाइल मेडिकल यूनिट (एनएमएमयू) की प्रत्येक यूनिट में दो वाहन, एक चिकित्सीय कार्य हेतु तथा दूसरा स्टाफ के लिए होगा। एनएमएमयू में डाक्टर, फार्मासिस्ट, नर्स, लैब टेक्निशियन आदि उपस्थित रहेंगे। 

यूपी के 36 जनपदों में लागू होने वाली इस परियोजना पर आने वाले खर्च को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मद से दिया जाएगा। योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा के स्तर से होगी। 

एनएमएमयू के माध्यम से औषधियों की उपलब्धता विभाग द्वारा सुनिश्चित की जानी है। परियोजना के अन्तर्गत एमएमयू वाहनों का क्रय, उपकरणों का क्रय, मानव संसाधन की उपलब्धता एवं संचालन सम्बन्धी अन्य समस्त कार्य निजी सेवा प्रदाता द्वारा किया जाएगा। 

परियोजना का संचालन पांच वर्ष के लिए किया जाएगा, इस दौरान 380 करोड़ रुपये का खर्च अनुमानित है। इसमें सेवा प्रदाता को इन्ट्रेस्ट-फ्री मोबलाइजेशन एडवांस प्रदान करने की भी व्यवस्था की जाएगी। परियोजना में कौन से सेवा प्रदाता को चुना जाना है तथा आगे कि निर्णय लेने की जिम्मेदारी कैबिनेट ने मुख्यमंत्री को सौंप दी है।

जिन जनपदों में यह योजना संचालित करने का निर्णय लिया गया है, उनमें सहारनपुर, रामपुर, बरेली, बदायूं, एटा, कासगंज, कन्नौज, कानपुर देहात, फर्रूखाबाद, हरदोई, पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, बस्ती, आजमगढ़, सीतापुर, बहराइच, बाराबंकी, रायबरेली, कौशाम्बी, इलाहाबाद, श्रावस्ती, गोण्डा, फैजाबाद, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, गोरखपुर, महराजगंज, अम्बेडकरनगर, आगरा, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, लखनऊ, कानपुर नगर तथा वाराणसी शामिल हैं। 

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