अदालत के रोकने के बावजूद पश्चिमी यूपी में खनन जारी

अदालत के रोकने के बावजूद पश्चिमी यूपी में खनन जारीgaonconnection

मेरठ/सहारनपुर। हाल ही में नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने मेरठ और सहारनपुर मण्डलों के मुख्यालयों के साथ-साथ बागपत और शामली में गंगा और यमुना के क्षेत्र से हो रहे बालू, बजरी और रोड़ी के अवैध खनन पर फटकार लगाते हुए प्रदेश सरकार और प्रशासन को इस पर कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। इस आदेश के बाद क्षेत्र में आए बदलावों की बात करें तो जेसीबी अब भी चल रही हैं, पोर्टलैंड मशीनों के शोर में एनजीटी और अन्य अदालतों के आदेशों को दबा दिया गया है।

सहारनपुर के मिर्ज़ापुर इलाके में हाथी कुंड बाँध के आस-पास पत्थर-बजरी का और सरसावा, बेहट, हरबर्टपुर, बिहारीगढ़ आदि हरियाणा और उत्तराखंड राज्यों से लगती सीमावर्ती इलाकों में यमुना नदी से रेत का खनन लगातार जारी है। आस-पास के लोग बताते हैं कि रोज़ सैकड़ों डम्पर रेत-रोड़ी निकला जाता है। इस अवैध खनन के चलते सौ फुट तक गहरे गड्ढे बन चुके हैं जो कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।  

सिर्फ एनजीटी ही नहीं इलहाबाद हाई कोर्ट ने भी ‘यूपी माइनर मिनरल (कन्सेशन) रूल्स 1963’ अधिनियम का उल्लंघन मानते हुए नौ जुलाई को आदेश दिया था कि इन मण्डलों में हो रहे खनन को तुरंत रोका जाए। पर्यावरण कार्यकर्ता गौरव मालिक के अनुसार यह सारा मामला 2014 में शुरू हुआ था जब यूपी के सिंचाई विभाग ने गंगा-यमुना नदियों के किनारों से सिल्ट, बजरी और रेत साफ करने के टेंडर निकाले थे। बागपत में इन टेंडरों को लेकर उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसी विषय पर पहले से सहारनपुर से साहब राज सिंह द्वारा दायर याचिका को साथ में मिलाकर कोर्ट ने सुनावाई कर यह फैसला सुनाया था। 

कोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ने शपथ पत्र दाखिल करते हुए कोर्ट को जानकारी दी थी कि सिंचाई विभाग सहारनपुर खण्ड आदि द्वारा इससे सम्बंधित टेंडर वापस ले लिए गए हैं। लेकिन ये टेंडर जिन क्षेत्रों के लिए निकाले गए थे, वहां वर्तमान समय में भी बिना-रोक टोक और बिना कोई मंज़ूरी लिए खनन बदस्तूर जारी है।

गौरव बताते हैं कि उन्होंने बागपत के कांठा-2 इलाके में जारी अवैध खनन पर रोक लगाने के कोर्ट के आदेश की प्रति एक प्रार्थना पत्र के साथ जिलाधिकारी बागपत को 2015 में ही दे दी थी। इसके बाद से अभी तक वो तीन बार न्यायालय के आदेशों के पालन के लिए पत्र दे चुके हैं पर खनन नहीं रुका। आज की तारिख में बागपत के लोनी इलाके कांठा-2, जागोश, बड़ला, बागपत सहारनपुर हाईवे, छपरौली सहित हरियाणा की सीमा से लगते इलाकों में अवैध खनन जारी है। जिला प्रशासन शांत बैठा है। 

गौरव इस मामले में फिर से न्यायालय के आदेशों की अवेहलना का मामला दर्ज करेंगे। बागपत में इस अवैध खनन के फलने-फूलने के पीछे गौरव नेता-नगरी के संरक्षण की भी बात बताते हैं। बागपत की ही तरह शामली के इलाकों में चल रहे अवैध खनन की पड़ताल के दौरान मिले, खनन की रेत अपने डम्पर  में भर कर ले जा रहे डम्पर चालक अनीस बताते हैं कि उन्हें रोज़ दो से तीन चक़्कर लगाने पड़ते हैं, 5,000 रूपये प्रति चक्कर मिलता है। शामली में झिंझाना, प्लेहडा, मंगलोरा, शीतलगडी, चौंतरा, करेना, बसेड़ा, खुरगाओं, घाट, रामड़ा, दुंदुखेडा, इस्सोपुर, कांधला, बिडोली, मंडावर, मवि कलां, यमुना पल आदि स्थानों पर कही भी हमें जाने को कहते हैं वही से माल उठा बताए जगह पर डाल आते हैं। चालके के मुताबिक फेंटम पुलिस के 50 रुपये और थाने के 1,500 रुपये प्रति गाड़ी प्रति चक्कर तय है।

शिक्षक और पर्यावरणविद दीपक शर्मा की माने तो इस अवैध खनन से जहां बाढ़ का खतरा बढ़ता है वही बरसात में मिटटी के कटान के चलते पेड़ पोधे उखड़ जाते है हरियाली नष्ट होती है प्रकर्ति का संतुलन बिगड़ता है नदियों के किनारे अवैध खनन से बड़े बड़े और गहरे गड्ढों के बन्ने से नदिया अपने किनारों को तोड़ कर फसलों को बर्बाद कर देती है जान माल दोनों कनुक्सान होता है।

रिपोर्टर - सुनील तनेजा

First Published: 2016-09-16 16:21:56.0

Tags:    India 
Share it
Share it
Share it
Top