अधिक सेल्फी खींचना भी है एक बीमारी

अधिक सेल्फी खींचना भी है एक बीमारीगाँव कनेक्शन, सेल्फी

अपनी फोटो खुद खींचने को सेल्फी कहते हैं। स्मार्टफोन आजकल सभी के पास हैं जिस कारण लोग अपनी सेल्फी खींचकर तुरंत सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं। 

लड़कियां अपनी सेल्फी ज्यादा पोस्ट करती हैं और आदमी थोड़ा कम। दोनों की वजह थोड़ी अलग-अलग है, जो मर्द अपने आप को दूसरों से बेहतर समझते हैं और अपने आप को ज्यादा समझदार मानते हैं, वो ज्यादा सेल्फी पोस्ट करते हैं जबकि औरतें ज्यादा समय दूसरों की मोहब्बत या उन्हें पाने के लिए सेल्फी पोस्ट करती हैं। मर्द और औरतों दोनों में ही इसका सम्बंध

नैरीसियम के साथ होता है। अपने आप से बहुत प्यार करना या अपने आप को सबसे बेहतर समझने वाले लोग नैरीस्टिक होते हैं। ये घंमड उनको दूसरों को डोमिनेट करवाता है। बार-बार अपनी सेल्फी खींचना व पोस्ट करना, दूसरों के दिमाग पर अपनी छाप छोड़ने के तरीके हैं।

अध्ययन बताते हैं कि चेहरों की तस्वीरें ज्यादा ध्यान अपनी तरफ केंद्रित करने की क्षमता रखते हैं। इंस्ट्राग्राम पर चेहरे की फोटो 38 फीसदी ज्यादा लाइक पाने की और 32 फीसदी ज्यादा कमेंट पाने की क्षमता रखती हैं। चेहरे की फोटो ज्यादा भावुकता के भाव हमारे अंदर पैदा करते हैं, जिससे हम दूसरों की भावनाओं या एहसास को समझ सकते हैं तो सेल्फी पोस्ट करना या खींचना या दूसरों की सेल्फी देखना हमारे अंदर अपनी और दूसरों के एहसास समझने की क्षमता बढ़ाता है और हम अपने दोस्तों और परिवार के बीच ज्यादा खास महसूस करते हैं।

ये हमारे आत्मविश्वास या इज्जत को भी बढ़ाने का अच्छा तरीका है। सर्वे बताते हैं कि 41 फीसदी औरतें, जो अपनी अच्छी फोटो दिखाती हैं इससे उनका आत्मविश्वास बेहतर होता है। येे प्रतिशत लड़कियों में बढ़ कर 65 फीसदी तक है। इसका एक और फायदा ये है कि जब हम एक गु्रप सेल्फी लेते हैं तो हम ग्रुप का अपने आप को एक हिस्सा समझते हैं और ग्रुप का पार्ट होने से मनोवैज्ञानिक रूप से हमें सुरक्षित और आराम का एहसास होता है। हमें अकेलेपन का एहसास नहीं होता।

सेल्फी लेना एक तरीका है दुनिया को दिखाने का, वो आप की क्या इमेज अपने दिमाग में रखें। अगर हम अपनी बहुत स्टाईलिश फोटो डालते हैं, हर बार बहुत भारतीय नारी टाइप की फोटो या रोमांटिक फोटो डालते हैं तो इसकी ये वजह भी हो सकती है कि हम दुनिया को अपनी इस खास इमेज को ही दिखाना चाहते हैं जिससे वो हमारे बारे में एक इंप्रेशन बना लें और उसी के साथ हमसे मिलें। सेल्फी लेना गलत नहीं है लेकिन अगर हमें अपनी नजरों में इज्जत, लोगों के लाइक्स पर निर्भर करता है तो उस नजरिए को बदलना जरूरी है। अपने अंदर की क मियों या असुरक्षा की जगह सेल्फी को न दें।

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