बाढ़ से कॉफी बागान मालिकों को 3,000 करोड़ रुपए का नुकसान, निर्यात में भारी गिरावट की आशंका

Mithilesh DubeyMithilesh Dubey   31 Oct 2018 10:49 AM GMT

बाढ़ से कॉफी बागान मालिकों को 3,000 करोड़ रुपए का नुकसान, निर्यात में भारी गिरावट की आशंका

लखनऊ। कर्नाटक में भारी बारिश और बाढ़ के कारण कॉफी उत्पादक क्षेत्रों में कॉफी बागान के मालिकों को कुल 3,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। इस कारण इसके निर्यात पर भी भारी असर पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है। कनार्टक प्लांटर्स एसोसिएशन (केपीए) के शीर्ष अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

केपीए के अध्यक्ष एचटी प्रमोद ने कहा, "कोडागु जिले में अगस्त में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण कई कॉफी बागान और कॉफी उत्पादकों के घर पूरी तरह से तबाह हो गए।"

कोडागु में करीब 45,000 कॉफी उत्पादक देश की कुल कॉफी का 40 फीसदी उत्पादन करते हैं। वहीं, साथ के चिकमंगलुरू और हासन जिलों में होने वाले कॉफी उत्पादन को मिलाकर इस क्षेत्र में देश का करीब 70 फीसदी कॉफी उत्पादन होता है। चिकमंगलुरू और हासन में भी भारी बारिश से कई कॉफी बागान प्रभावित हुए।

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प्रमोद ने कहा, "केपीए का अनुमान है कि कोडागु, चिकमंगलुरू और हासन जिलों में कुल 3,000 करोड़ रुपये की कॉफी की फसल का नुकसान हुआ है। अकेले कोडागु जिले में करीब 20,000 कॉफी उत्पादक प्रभावित हुए हैं और उनकी 70 फीसदी से अधिक फसल तबाह हो चुकी है।"


कॉफी बोर्ड के मुताबिक, देश में वित्त वर्ष 2017-18 में कुल 3.15 लाख टन कॉफी का उत्पादन हुआ था। केपीए ने कहा, "हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 2018-19 में कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में बारिश और बाढ़ के कारण कॉफी उत्पादन में 30-40 फीसदी की कमी आएगी।"

कम उत्पादन का असर निर्यात पर

वहीं ऐसे कयास भी लगाये जा रहे हैं कि उत्पादन कम होने से कॉफी निर्यात पर भी व्यापक असर पड़ेगा। एक अनुमान के अनुसार 2019 में निर्यात आठ फीसदी घटकर 230,000 टन तक आ सकता है जो पिछले पांच साल में सबसे खराब रिकॉर्ड होगा। केरल और कर्नाटक में बाढ़ से इस साल 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गयी थी। वहीं मसालों की खेती भी बर्बाद हुई थी। दक्षिण के दो राज्य मिलकर देश का 90 फीसदी कॉफी उत्पादन करते हैं।

इस बारे में कॉफी एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रमेश राजा कहते हैं " बाढ़ के कारण फसलें बहुत ज्यादा प्रभावित हुई हैं। इस कारण उत्पादन घटेगा, जबकि निर्यात करते की हमारी अपनी लिमिटेशन भी हैं।" भारत 2018-19 मार्केटिंग ईयर जो एक अक्टूबर से शुरू हुआ है, में कॉफी का उत्पादन घटकर 310,000 टन रहने का अनुमान है जो कि पिछले साल में सबसे कम है। बाढ़ आने से पहले से ये अनुमान 400,000 टन का था।

भारत के कॉफी बोर्ड के अनुसार, भारत विश्व का छठा सबसे बड़ा कॉफी उत्पादक है। भारत ने 2017-18 के विपणन वर्ष 3,16,000 टन कॉफी का उत्पादन किया। इसमें 2,21,000 टन रोबोस्टा और 95,000 टन अरेबिका रही।

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देश के कुल कहवा उत्पादन में 96 फीसदी योगदान तीन राज्यों का है। कर्नाटक का हिसा 70 फीसदी, केरल का 20 फीसदी और तमिलनाडु का छह फीसदी है। वहीं पूर्वात्तर के असम, मिजोरम, त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड, अरूणाचल प्रदेश और मणिपुर में अभी 6039 हेक्टेयर में काफी की खेती की जाती है। आंध्रपद्रेश में 58131 हेक्टेयर में काफी की खेती की जा रही है वहीं उड़ीसा में 3935 हेक्टेयर में खेती की जा रही है।

कॉफी बोर्ड के अध्यक्ष एमएस बोजे गौड़ा ने समाचार एजेंसियों को बताया कि पिछले साल भी नुकसान हुआ था लेकिन उत्पादन पर ज्यादा असर नहीं पड़ा था। लेकिन इस साल बाढ़ की वजह से 3000 एकड़ से ज्यादा की फसल बर्बाद हुई है।


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