कच्चा माल महंगा होने से चिकन और अंडे की कीमतें 50 फीसदी तक बढ़ीं

Mithilesh DubeyMithilesh Dubey   5 Nov 2018 12:11 PM GMT

कच्चा माल महंगा होने से चिकन और अंडे की कीमतें 50 फीसदी तक बढ़ीं

लखनऊ। मक्का, सोयाबीन, बाजरा और सोया आहार जैसे कच्चे माल की कीमतों में तेजी आने से पिछले एक महीने में पोल्ट्री उत्पादों की कीमत 40 से 50 फीसदी तक महंगे हो चुके हैं। पोल्ट्रीबाजार डॉट नेट आंकड़ों के अनुसार चिकन भी 50 फीसदी से ज्यादा महंगा हुआ है।

पोल्ट्री क्षेत्र की जानकारी देने वाली ऑनलाइन वेबसाइट पोल्ट्रीबाजार डॉट नेट की वेबसइट से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पिछले एक महीने में पोल्ट्री उत्पादों की कीमतों में 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। चिकन का दाम 51 फीसदी तक बढ़कर 98 से 100 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है, जबकि पिछले महीने यही कीमत 65 रुपए प्रति किलो तक थी। मुंबई और छत्तीसगढ़ के रायपुर में चिकन की कीमत 100 और 75 तक पहुंच चुकी है, एक महीने पहले यह कीमत 67 और 64 रुपए थी।

विश्व में चिकन उत्पादन के क्षेत्र में अमेरिका, चाइना, और ब्राजील के बाद भारत का चौथा स्थान है। वर्ष 2004 से 2011 के बीच ग्रामीण भारत में चिकन की खपत में दोगुनी हुई है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के मुताबिक खपत प्रति व्यक्ति 0.13 किलोग्राम से बढ़़कर 0.27 किलोग्राम तक पहुंच गई है, शहरी भारत में इसी अवधि में 0.22 किलोग्राम से लेकर 0.39 किलोग्राम तक बढ़ोत्तरी हुई है। पोल्ट्री उद्योग का कुल कारोबार 90 हजार करोड़ का है, जिसमें 65 प्रतिशत हिस्सा चिकन मीट का और 35 फीसदी हिस्सा अंडे का है।

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चिकन के अलावा अंडे की कीमतों में भारी इजाफा हुआ है। सितंबर की अपेक्षा अक्टूबर में अंडे की कीमत 20 फीसदी तक बढ़ी है। अहमदाबाद के बाजारों में सितंबर में एक प्रति सैकड़े अंडे की कीमत 369 रुपए थी, जो अक्टूबर में 398 और पांच नवंबर तक यह कीमत 413 रुपए पहुंच गयी। इसी तरह अजमेर में सितंबर में अंडे की कीमत 348 रुपए थी जो अक्टूबर में बढ़कर 375 रुपए हो गयी। कानपुर और मुंबई में अंडे की कीमत इस समय 428 और 445 रुपए तक पहुंच गई जो सितंबर महीने में 388, 383 रुपए थी।

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार अंडे के उत्पादन में भारत शीर्ष उत्पादकों में एक है और देश में अंडे का उत्पादन 83 अरब के करीब है।


बिहार के हाजीपुर बिहार स्थित सुनील सिंह हेचरी प्राइवेट इंडिया लिमिटेड के निदेशक रजनीश सिंह कहते हैं " चारा महंगा मिल रहा है। सोयाबीन, मक्के की कीमत बढ़ गयी है। इसके कारण अब चूजा भी महंगा मिल रहा है।"

इस बारे में पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रमेश खत्री ने गांव कनेक्शन को बताया" ठंडी में अंडों की मांग ज्यादा बढ़ जाती है। कीमतें इसलिए बढ़ जाती हैं। हालांकि अभी तो कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण तेजी आयी है। अगर इधर के कुछ दिनों में कच्चे माल की कीमतें गिरेंगी तो दाम में सुधार आ सकता है।"

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वहीं बात अगर कच्चे माल की करें तो सोया आहार की कीमतें 2242 प्रति कुंतल से बढ़कर 2300 रुपए तक पहुंच गई है। इसी तरह उत्तर प्रदेश और दिल्ली में मक्के की कीमत 1367 रुपए प्रति कुंतल थी तो अक्टूबर में बढ़कर 1447 रुपए हो गयी। बाजरे की कीमत भी 1350 से बढ़कर अक्टूबर में 1449 रुपए हो गयी।

पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रमेश खत्री ने कहा कि कमजोर मांग और उत्पादन की बढ़ती लागत के कारण पिछले कुछ महीनों में मुर्गी-पालकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। सरकार ने खरीफ के कृषि उत्पादों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में इजाफा किया है जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई है। इस उत्पादन और श्रम लागत के मद्देनजर चिकन उत्पादन की लागत 84 रुपए प्रति किलोग्राम बैठती है जो पहले 65-70 रुपए थी। इससे कम आमदनी होने से मुर्गी-पालकों को नुकसान होगा, इसलिए मौजूदा कीमत वृद्धि मुर्गी-पालकों के लिए स्पष्ट तौर पर सामान्य है।


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