असमय बारिश से बेरंग हुआ संतरा, महाराष्ट्र की मंडियों में दो रुपए प्रति किलो तक पहुंची कीमत

Mithilesh DubeyMithilesh Dubey   17 Oct 2018 6:30 AM GMT

असमय बारिश से बेरंग हुआ संतरा, महाराष्ट्र की मंडियों में दो रुपए प्रति किलो तक पहुंची कीमतसही समय पर बारिश नहीं होने के कारण संतरे का रंग नहीं बदल रहा। (सभी तस्वीरें- मिथिलेश धर)

नागपुर(महाराष्ट्र)। असमय बारिश के कारण संतरे की फसल समय पर नहीं पकने से महाराष्ट्र के बाजारों में संतरे की कीमत टमाटार जैसी हो गयी है। संतरे भी दो से चार प्रति रुपए किलो तक बिक रहे हैं। पिछले साल भी महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की मंडियों में संतरे की कीमत काफी गिर गयी थी जिसके बाद प्याज और टमाटार की तर्ज पर किसानों ने संतरे सड़कों पर फेंक दिये थे।

नागपुर के रहने वाले किसान दीपक कुरादे बताते हैं " ऐसा नहीं इस कि बार बिचौलियों की वजह से दाम नहीं मिल रहा। गलत समय ये हुई बारिश के कारण संतरे के कलर में बदलाव ही नहीं आ रहा। संतरा अंदर से तो पका है लेकिन ऊपर से देखने में हरा लग रहा है, ऐसे में व्यापारी विश्वास ही नहीं कर पा रहे कि फल पक गया है। कच्चा समझकर कीमत कम लगायी जा रही है। दो से पांच रुपए प्रति कुंतल की बोली लगायी जा रही है। जितनी कीमत नहीं मिल रही है उतना तो मंडी तक ले जाने में खर्च हो जा रहा है।"

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महाराष्ट्र का नागपुर जिला पूरी दुनिया में संतरे की खेती के लिए प्रसिद्ध है। नागपुर से सटे मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में भी संतरे की अच्छी खेती होती है लेकिन इस बार ठंड की उपज जैसे ही बाजार में पहुंचनी शुरू हुई है, कीमतें लगातार गिर रही हैं। कई मंडियों में तो कीमत 200 से 400 रुपए प्रति कुंतल तक पहुंच गयी है।

नागपुरी संतरा महाराष्‍ट्र के नागपुर, अमरावती व विदर्भ, मध्‍यप्रदेश के छिंदवाड़ा और कर्नाटक के कुर्ग क्षेत्र में अधिक होता है। इन राज्‍यों के अलावा भी नागपुरी संतरा कई राज्‍यों में उगाया जाता है। इसका कुल क्षेत्रफल करीब चार लाख हेक्‍टेयर होता है। इसमें से लगभग 3.15 लाख हेक्‍टेयर पर समर क्रॉप होती है, जबकि, 80-90 हजार हेक्‍टेयर पर मध्‍यप्रदेश और महाराष्‍ट्र में इसकी विंटर क्रॉप होती है।


सरकार की वेबसाइट एजीमार्कनेट के अनुसार महाराष्ट्र के अहमदपुर मंडी में संतरे की कीमत 200 रुपए प्रति कुंतल तक पहुंच गयी थी जबकि मॉडल प्राइस 1750 रुपए था। जबकि नागपुर में 700 और चंद्रपुर में 400 रुपए प्रति कुंतल तक संतरे की खरीदी हुई। गौरतलब है कि नागपुर सबसे बड़ा संतरा उत्पादक जिला है।

मध्य प्रदेश के जिला छिंदवाड़ा, सौंसर के संतरा व्यापारी और किसान राजेश मोकदम कहते हैं " बेमौसम बारिश के कारण संतरा अपनी रंगत में नहीं आ पा रहा। व्यापारियों ने कीमत घटा दी है। मंडियों में खरीदार नहीं मिल रहे। हो सकता है अगर कुछ दिन बार बेचें तो सही कीमत मिल सकती है लेकिन समस्या यह है कि किसानों के पास रखने की जगह ही नहीं है। फल गिर रहा है लेकिन पका नहीं दिख रहा, ऐसे में सही कीमत नहीं मिल रही। व्यापारी 200 से 500 रुपए कुंतल तक ही कीमत देने की तैयार हैं। "

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महाराष्ट्र के अलावा मध्य प्रदेश में भी बड़े पैमाने पर संतरे की खेती होती है। छिंदवाड़ा, बैतूल, होशंगाबाद, शाजापुर, उज्जैन, भोपाल, नीमच, रतलाम तथा मंदसौर जिले में की जाती है। प्रदेश में संतरे की बागवानी 43000 हैक्टेयर क्षेत्र में होती है। जिसमें से 23000 हैक्टेयर क्षेत्र छिंदवाड़ा जिले में है।

वहीं सौंसर के ही संतरा कारोबारी आतिफ अंसारी कहते हैं " भारत सरकार ने निर्यात शुल्क बढ़ा दिया है, जिस कारण कई देशों में हमारा माल कम जा रहा है। जबकि कुछ देशों ने आयात दरों में भी बढ़ोतरी की है। ऐसे में ठंड की फसल को उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। आने वाले समय में कीमतें और कम हो सकती हैं।"


पूरी दुनिया में 114 देशों में नींबू वर्गीय फसलों की खेती होती है, जिसमें से 53 देशों में यह बड़े व्यवसायिक तरीके से की जाती है। चीन संतरा की पैदावार करने में नंबर वन देश है।

हालांकि एजीमार्कनेट के अनुसार 14 अक्टूबर को बाजार में थोड़ी तेजी दिखी। इस दिन महाराष्ट्र की मंडियों में मिनिमम 800 रुपए प्रति कुंतल तक संतरे की बिक्री हुई। छिंदवाड़ा केवीके के वरिष्ठ वैज्ञानिक गौरव महाजन कहते हैं " बेमौसम बारिश के कारण पिछले साल भी संतरे के साथ ऐसा ही हुआ था। इसमें फल का छिलका ऊपर देखने में तो कच्चा लगता है लेकिन वो अंदर से पका होता है। "

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भारत सरकार के अनुसान भारत का चीन के बाद बागवानी फसलों तथा फलों के सकल उत्पादन में दूसरा स्थान है। 2015-16 की अवधि में कुल 63 लाख हेक्टेयर भूमि से नौ करोड़ मीट्रिक टन से अधिक फलों का उत्पादन हुआ था। जबकि वर्ष 2016-17 की अवधि में देश में लगभग 2.5 करोड़ हेक्टेयर भूमि से बागवानी फसलों का सकल उत्पादन लगभग 30 करोड़ मीट्रिक टन हुआ जिसमें फलों का बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। इसमें 65 लाख हेक्टेयर भूमि से 9.4 करोड़ टन फलोत्पादन का कीर्तिमान है। भारत में क्षेत्रफल की दृष्टि से नींबू का वर्गीय फलों में दूसरा (10.37 लाख हेक्टेयर) एवं उत्पादन की दृष्टि से तीसरा (1.2 करोड़ टन) स्थान है।


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