बाजार में तेजी से बढ़ रही चने की कीमत, फिर क्यों मायूस हैं किसान ?

नैफैड ने 35 लाख टन दालों को पीडीएस (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) के जरिए बेचने का फैसला लिया है। इसमें चना भी शामिल है। ऐसे में गरीबों को तो चना सस्ता मिलेगा लेकिन इसमें किसानों का कोई फायदा नहीं होने वाला

Mithilesh DubeyMithilesh Dubey   18 Aug 2018 6:43 AM GMT

बाजार में तेजी से बढ़ रही चने की कीमत, फिर क्यों मायूस हैं किसान ?

लखनऊ। रायगढ़, मध्य प्रदेश के सुरेश नागर अगले सीजन से चने की खेती नहीं करेंगे, क्योंकि उन्हें इस साल प्रति एक कुंतल के पीछे लगभग एक हजार रुपए का नुकसान हुआ है। ऐसे में वे बेहद हताश हैं। 10 कुंतल में से आठ कुंतल मंडी में बेचा जिसकी कीमत एमएसपी से कम मिली। बची फसल को उन्होंने न बेचने का फैसला लिया, जिसमें अब घुन भी लगने लगा है।

सुरेश इतने हताश और निराश तब हैं जब उन्हें प्रति एक कुंतल के पीछे 1000 रुपए का ही नुकसान हुआ है। लेकिन उनकी निराशा तब और बढ़‍ सकती है जब उन्हें ये पता चलेगा कि जिस चने को वे दो महीने पहले मंडी में 3400 रुपए कुंतल बेच आये थे उसकी कीमत अक्टूबर तक 5000 रुपए के आसपास तक पहुंच सकती है।

सरकारी एजेंसियों जैसे नैफैड ने 35 लाख टन दालों को पीडीएस (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) के जरिए बेचने का फैसला लिया है। इसमें चना भी शामिल है। ऐसे में गरीबों को तो चना सस्ता मिलेगा लेकिन इसमें किसानों का कोई फायदा नहीं होने वाला। आम लोगों के लिए तो कीमतें बढ़ेंगी साथ ही किसानों के नुकसान में भी बढ़ोतरी होगी।


केंद्र सरकार ने चने का एमएसपी 4400 रुपए प्रति कुंतल तय किया था। बावजूद इसके मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में 3350 से 3500 रुपए में चना बिका। सरकारी रेट के अनुसार किसानों को एक कुंतल के पीछे एक हजार रुपए तक का नुकसान झेलना पड़ा।

देशभर में एमएसपी सत्याग्रह चला रहे किसान संगठन स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव कहते हैं, "सरकार ने चने की एमएसपी तय की 4400 रुपए प्रति कुंतल, लेकिन किसान इसे इस कीमत पर बेच ही नहीं पा रहे। मैंने 5 राज्यों में एमएसपी की हकीकत का पता लगाया है और कहीं भी किसानों को एमएसपी का भाव नहीं मिल रहा।"

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राजस्थान, चितौड़गढ़ के जितिया के रहने वाले किसान पप्पू जाट कहते हैं "मैंने एक एकड़ में चना लगाया था। इस साल पैदावार खूब हुई। लेकिन साढ़े तीन कुंतल फसल की कीमत मुझे 3600 रुपए प्रति कुंतल के हिसाब से ही मिली। अब दाम बढ़ गया है लेकिन हमारे पास उपज तो है नहीं। हम अपनी ही फसल को महंगे दामों में खरीदेंगे क्योंकि बोवनी का समय आ रहा है।"

किसानों को 200 से 2000 रुपए तक का नुकसान

ज्यादातर किसान फसल बेच चुके हैं तो भाव तेजी से भाग रहा है। वायदा बाजार के अनुसार आगामी एक महीने में चना की कीमत प्रति कुंतल 200 रुपए तक बढ़ सकती है। एनसीडीईएक्स पर चने का सितंबर वायदा भाव 107 रुपए या 2.5 फीसदी की तेजी के साथ 4395 रुपए प्रति कुंतल तक पहुंच चुका है। वहीं अक्टूबर की कीमत 4,467 तक पहुंच गयी है। विशेषज्ञों की मानें तो ये कीमत 5000 रुपए तक जा सकती है। ऐसे में अगर इस कीमत के साथ किसानों के नुकसान का आंकलन करेंगे तो ये प्रति कुंतल 200 से 2000 रुपए तक आती है।

सुरेश नागर आगे बताते हैं "सरकार के तय दर पर बहुत कम किसान ही चना बेच पाते हैं। उस समय कीमतें काफी कम होती है। फसल बेचने के एक दो महीने बाद ही कीमतें बढ़ गईं। ऐसे में सरकारों को इस पर सोचना चाहिए ताकि हम किसान भाइयों का नुकसान कम हो सके और इसकी भरपाई के बारे में भी सोचना चाहिए।"


वर्ष 2017 में मध्य प्रदेश की मंडियों में चने की कीमत 5931 रुपए प्रति कुंतल थी। पिछले साल की अपेक्षा इस साल दामों में 42 फीसदी तक की गिरावट पहले ही दर्ज की गयी है। जब किसानों के उपज बेचना का समय आया तो कीमतें और नीचे गिर गईं। कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल देश में चने का कुल उत्पादन 1100 लाख कुंतल हुआ है, जबकि सरकार ने खरीद का लक्ष्य महज 424.4 लाख कुंतल रखा है।

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मध्य प्रदेश, नरसिंहपुर, तहसील करेरी किसान दुर्गेश पटेल बताते हैं "मैंने दो एकड़ में चने की खेती की जिसमें 10 कुंतल से ज्यादा पैदावार हुई थी। मंडी में मुझे 4400 रुपए तय दर की जगह 4200 रुपए प्रति कुंतल मिला।"

अब दुर्गेश के नुकसान का आंकलन करते हैं। 10 कुंतल के पीछे 200 रुपए कम के हिसाब से 2000 रुपए का नुकसान तो उन्हें तुंरत हो गया। और यही नुकसान 4500 रुपए की कीमत पर 3000 रुपए बैठता है। और चने की कीमत कहीं 5000 रुपए तक पहुंच गयी तो आप घाटे का हिसाब लगा लीजिए।

तो क्या स्टॉकिस्ट कर रहे खेल

ऑल इण्डिया दाल मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल कहते हैं "किसानों के हित के लिए सरकार को चने का ऑनलाइन व्यापार बंद कराना चाहिए। प्रतिदिन सुबह, दोपहर एवं शाम को कुछ चुनिंदा लोग फ्यूचर ट्रेडिंग में चना का सट्टा रूपी व्यापार करते हैं जिससे देश के व्यापारियों और किसानों को नुकसान हो रहा है। स्टॉक जमाकर दाम बढ़ा दिया जाता है, सरकार को इस पर लगाम लगाना चाहिए। देश का दुर्भाग्य देखिए कि जब 15 सालों में इस साल चने का उत्पादन सबसे ज्यादा हुआ तब चना बाजार में 35 से 40 रुपए प्रति किलो बिक रहा और किसान अपने नुकसान से परेशान है।"


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इस मामले में किसान नेता केदार सिरोही कहते हैं "सरकार किसानों का हित चाहती ही नहीं और इसके लिए किसान भी जिम्मेदार है। हमनें कई किसानों को कहा था कि वे एमएसपी पर फसल न बेचें, चना की कीमतें बढ़ेंगी, लेकिन किसान माने ही नहीं। उन्हें अगली फसल भी लेनी थी। सरकार को भी पता रहता है कि त्योहारी सीजन में चने की मांग बढ़ जाएगी। ऐसे में स्टॉकिस्टों पर लगाम लगानी चाहिए। किसानों को अगली फसल लगानी होती है जिस कारण उसे मजबूरन किसी भी कीमत पर अपनी उपज बेचनी पड़ती है।"

वहीं राजस्थान, बिकानेर मंडी के पूर्व अध्यक्ष और एग्री एक्सपर्ट पुखराज चोपड़ा कहते हैं "वायदा बाजार में चना की कीमत सरकार की वजह से ही बढ़ी है क्योंकि उन्होंने स्टॉक में रखा चना बाहर निकाला ही नहीं। कीमत अब एमएसपी के आस-पास तक पहुंच गयी है। लेकिन ये कीमत 4500-4600 से ज्यादा नहीं जायेगी क्योंकि कई प्रदेशों में विधानसभा चुनाव होने हैं।"


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