Amit

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स्वतंत्र पत्रकार


  • जन्मदिन विशेष: जब अटलजी को सुनकर भीड़ बौरा गई, पत्रकार तवलीन सिंह का आंखों देखा हाल

    अटलजी से संबंधित यह किस्सा जानी-मानी पत्रकार तवलीन सिंह की किताब 'दरबार' से लिया गया है। तवलीन सिंह ने अपने कैरियर की शुरुआत उस समय की थी जब देश में इमरजेंसी लगी थी। विपक्ष के लगभग सभी नेता जेल मे थे। तत्कालीन जनसंघ (आज की भाजपा) के नेता अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी को बैंगलूरु से...

  • बदलती खेती: लीज पर 200 बीघे जमीन, साढ़े 4 लाख की कमाई और 50 लोगों को रोजगार

    आम तौर पर कहा जाता है कि भारत में खेती घाटे का सौदा है। लेकिन बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश के युवा किसान दुर्गा प्रसाद सैनी इस कथन से सहमत नहीं हैं। दुर्गा प्रसाद कहते हैं खेती उन्हीं के लिए घाटे का सौदा है जिनके पास सही जानकारी नहीं है। दुर्गा प्रसाद के पास अपनी जमीन नहीं है लेकिन वह 200 बीघे में लीज पर...

  • जून में लगने वाली इमरजेंसी के जनवरी 1975 में मिलने लगे थे संकेत

    1975 का जून ख़त्म होने को था। लोग मानसून का इंतज़ार कर रहे थे। जिस समय गर्मी से राहत मिलनी चाहिए थी, वहाँ देश की राजनीति में पारा रातों-रात चढ़ गया। राजनीति की यह गर्मी ऐसी कि 19-20 महीने विपक्ष, खासकर जनसंघ (आज की भाजपा) और आरएसएस से जुड़े लोगों ने और सैंकड़ों स्वतंत्र पत्रकारों जेल में राजनीति की इस...

  • पंचायती राज दिवस: गांधी के सपनों से वर्तमान का सफ़र, सपने अधूरे रह गए 

    'भले ही अभी नेहरु मेरी बात ना मानते हों, जो मतभेद होते हैं, जता देते हैं। लेकिन मैं जानता हूं कि मेरे बाद नेहरु, मेरी ही भाषा बोलेंगे। अगर ऐसा न भी हुआ फिर भी मैं तो इसी इच्छा से मरना चाहूंगा' ऐसा नहीं था कि नेहरू और गांधी के बीच मतभेद ना हों लेकिन फिर भी गांधी जी को विश्वास था कि नेहरु उनका कहा...

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