ज्यादा मुनाफे के लिए करें कड़कनाथ मुर्गे का पालन, जानें कहां से ले सकते है प्रशिक्षण 

ज्यादा मुनाफे के लिए करें कड़कनाथ मुर्गे का पालन, जानें कहां से ले सकते है प्रशिक्षण कड‍़कनाथ का व्यवसाय सौ चिकन से शुरू किया जा सकता है। 

लखनऊ। मध्य प्रदेश के झबुआ जिले की प्रजाति कड़कनाथ मुर्गे की मांग पूरे देश में होने लगी है। कड़कनाथ भारत का एकमात्र काले मांस वाला मुर्गा है। दूसरे मुर्गों के मुकाबले ये सिर्फ तीन महीने में तैयार हो जाता है। आज कई राज्यों के लोग इसका मुर्गे का पालन करके लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं।

महाराष्ट्र के पुणे जिले के कत्रज में रहने वाले दिगंबर महादेव पिछले डेढ़ वर्षों से कड़कनाथ मुर्गे का पालन कर रहे है। दिगंबर एक प्राइवेट कंपनी में काम भी करते हैं और कड़कनाथ का पालन भी कर रहे हैं। " महाराष्ट्र में इसके अंडे और मीट की बहुत मांग है। क्योंकि इससे कई तरह की बीमारियां खत्म तो नहीं होती है पर उसका असर कम होता है। हमारे ही क्षेत्र के कई लोग इसका पालन कर रहे हैं। बाजारों में इसकी कीमत बहुत अच्छी मिल जाती है। इसके पालन में ज्यादा मेहनत भी नहीं लगती है।" दिगंबर ने बताया।

दिंगबर के पास अभी 150 पक्षी है, जिनसे रोजाना 50 अंडे मिल जाते हैं। बाजार में इन अंडों की कीमत 40 से 50 रुपए है।

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डि‍पार्टमेंट ऑफ एनि‍मल हस्‍बेंड्री, महाराष्‍ट्र के मुताबि‍क, इसका रखरखाव अन्य मुर्गों के मुकाबले आसान होता है। शोध के अनुसार, इसके मीट में सफेद चिकन के मुकाबले कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है और अमीनो एसिड का स्तर ज्यादा होता है। कड़कनाथ मूल रूप से मध्य प्रदेश के झबुआ जिले का मुर्गा है, मगर अब पूरे देश में यह मि‍ल जाता है। महाराष्‍ट्र, आंध्र प्रदेश, तमि‍लनाडु सहि‍त कई राज्‍यों में लोगों इससे अच्‍छा कमा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॅा. गोविंद कुमार वर्मा बताते हैं, इसकी खासियत को देखकर प्रदेश के कई किसानों ने इसका पालन शुरू किया है। केंद्र में हर छह महीने पर इसकी ट्रेनिंग किसानों को दी जा रही है। प्रदेश में भी इसके मीट और अंडे की मांग बढ़ी है। इसका स्‍वाद भी बायलर और देशी मुर्गे से अलग होता है। इसका मीट कैंसर, डायबिटीज, हृदय रोगियों के लिए यह बहुत ही फायदेमंद होता है।

कड़कनाथ के एक किलोग्राम के मांस में कॉलेस्ट्राल की मात्रा करीब 184 एमजी होती है, जबकि अन्य मुर्गों में करीब 214 एमजी प्रति किलोग्राम होती है। इसी प्रकार कड़कनाथ के मांस में 25 से 27 प्रतिशत प्रोटीन होता है, जबकि अन्य मुर्गों में केवल 16 से 17 प्रतिशत ही प्रोटीन पाया जाता है। इसके अलावा, कड़कनाथ में लगभग एक प्रतिशत चर्बी होती है, जबकि अन्य मुर्गों में 5 से 6 प्रतिशत चर्बी रहती है।

इंटरनेट साभार

मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के पांसेमल गाँव के सचिन सितोले पिछले एक साल से कड़कनाथ मुर्गों पालन रहे हैं। तीन-चार महीने में मुर्गा तैयार हो जाता है। सचिन बताते हैं, "कड़कनाथ मुर्गे की अच्छी मांग होती है। दो साल पहले इसकी शुरुआत की थी, अब तक चार बार इसे बेच चुका हूं। इसमें ज्यादा खर्च भी नहीं लगता है।" वे आगे बताते हैं, "एक किलोग्राम का मुर्गा 400-500 रुपए में बिक जाता है और अंडा भी पचास रुपए में बिकता है।"

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कड़कनाथ मुर्गे की खासियत के बारे में डॉ. वर्मा बताते हैं, "इस प्रजाति की मुर्गी और मुर्गे का मांस, खून, चोंच, अण्‍डे, जुबान और स्‍किन सबकुछ काला ही होता है। इसमें प्रोटीन की भरपूर मात्रा पायी जाती है। यह अन्य ब्रायलर की अपेक्षा जल्दी तैयार भी हो जाता है। कड़कनाथ मुर्गे का अण्‍डा 50 रुपए का मिलता है तो वहीं एक मुर्गा आपको 500 रुपए में मिलेगा। तो वहीं एक दिन की चूजे की कीमत 65 रुपए होती है।"

इन बातों का रखें ध्यान

  • 100 चिकन से इसका पालन शुरू किया जा सकता है।
  • अन्य फार्मों की तरह की इसका फार्म भी गाँव या शहर से बाहर मेन रोड में बनाना चाहिए।
  • बिजली और पानी की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए। मुर्गी के शेड में प्रतिदिन कुछ घंटे प्रकाश की आवश्‍यकता भी होती है।
  • फॉर्म में हवा और पर्याप्‍त रोशनी हो।
  • साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखना चाहिए।
  • चूजों और मुर्गियों को अंधेरे में या रात में खाना नहीं देना चाहिए।
  • दो पोल्‍ट्री फॉर्म एक-दूसरे के करीब न हों।
  • पानी पीने के बर्तन दो-तीन दिन में जरुर साफ करें।

यहां से ले सकते है ट्रेनिंग

अगर आप कड़कनाथ का व्यवसाय शुरू करना चाहते है तो भारतीय पक्षी अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर, बरेली में प्रशिक्षण ले सकते है। इसके अलावा समय समय कृषि विज्ञान केंद्र में भी प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा राज्यों के पशुपालन विभाग में भी इसकी पूरी जानकारी ले सकते हैं।

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भारतीय पक्षी अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर, बरेली

0581-2303223, 2300204, 2301220, 2310023

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