देश में हर महीने औसतन सात हाथियों की हो रही मौत, 10 फीसदी की दर से कम हो रही संख्या

इसी साल अप्रैल में पश्चिमी ओडिशा के झारसुगुडा में चार हाथियों की मौत ट्रेन की चपेट में आने से हो गयी थी। पर्यावरण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार भारत में 2010 से 2017 के बीच ट्रेन की चपेट में आने में 120 हाथियों ने अपनी जान गंवा दी।

Mithilesh DharMithilesh Dhar   29 Oct 2018 3:44 PM GMT

देश में हर महीने औसतन सात हाथियों की हो रही मौत, 10 फीसदी की दर से कम हो रही संख्याफोटो: पीटीआई

लखनऊ। ओडिशा के ढेंकनाल में करंट लगने से सात हाथियों की दर्दनाक मौत हो गयी। यह पहला मौका नहीं है जब हाथी या जंगली जानवरों की मौत इस तरह हुई। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल 80 हाथी इस तरह की दुर्घटना में अपनी जान गंवा देते हैं।

शुक्रवार (26 अक्टूबर) को ओडिशा के जिला ढेंकनाल के गांव कमालंगा में देर शाम 13 हाथियों का झुंड खेतों की ओर जा रहा था। इसी दौरान सात हाथी रेलवे पावर लाइन की हाई वोल्टेज तारों के चपेट में आ गये। सातों हाथियों की मौत मौके पर हो गयी। ग्रामीणों ने इसकी जानकारी वन्य अधिकारियों को दी।

इस बारे में वन के सहायक संरक्षक जीतेंद्रनाथ दास ने समाचार एजेंसियों को बताया कि इसमें दो हाथी जबकि पांच हथिनी थी। वहीं प्रभागीय वन अधिकारी सुदर्शन पात्रा ने कहा कि ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों को यह जानकारी पहले से ही दी गयी थी कि तारों को नियमानुसार ऊपर रखें। लेकिन ऐसा नहीं किया गया जिस कारण इन हाथियों की मौत हुई।

मामले को संज्ञान में लेते हुए ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक जांच के आदेश दे दिये हैं जबकि केंद्रीय विद्युत आपूर्ति यूटिलिटी के जूनियर इंजीनियर समेत अब तब 6 अधिकारियों और वन विभाग ने तीन अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है हालांकि ओडिशा में इस तरह की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं।

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इसी साल अप्रैल में पश्चिमी ओडिशा के झारसुगुडा में चार हाथियों की मौत ट्रेन की चपेट में आने से हो गयी थी। पर्यावरण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार भारत में 2010 से 2017 के बीच ट्रेन की चपेट में आने में 120 हाथियों ने अपनी जान गंवा दी।

2017 में हाथियों की जनगणना हुई थी जिसके अनुसार भारत में हाथियों की कुल संख्या 27312 है। जबकि 2012 की गणना में यह संख्या 30000 (29,931-30,711) थी, इस तरह देखेंगे तो हाथियों की संख्या हर साल 10 फीसदी की दर से कम हो रही है।


नेशनल जियोग्राफिक के अनुसार 1987 से 2017 जुलाई तक भारत में ट्रेन की चपेट में आने से २६६ हाथियों की मौत हुई थी। जबकि इस साल यानी 2018 में ट्रेन की चपेट में आने से अब तक 15 से ज्यादा हाथियों की मौत हो चुकी है। ऐसी घटनाओं से 2017 में 12 और 2016 में 16 हाथियों की मौत हुई थी। इस साल अगस्त में झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा के पास ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस से कुचलकर तीन हाथियों की मौत हो गयी थी। इससे पहले जून में हरिद्वार में ट्रेन की टक्कर से एक हथिनी की मौत हो गयी थी।

आगरा हाथी संरक्षण केंद्र (वाइल्ड लाइफ एसओएस) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. बैजू राज कहते हैं " हाथियों की प्रकृति होती है कि वो एक दूसरे को बचाने का प्रयास करते हैं। ओडिशा की घटना ऐसी ही है। पहले एक हाथी करंट की चपेट में आया होगा, उसे बचाने के चक्कर में और हाथियों की मौत हुई।"

डॉ. बैजू आगे बताते हैं "भारत में 101 कॉरिडोर की पहचान हुई है। लेकिन इनकी संख्या लगातार घट रही है। 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर चिंता जाहिर की थी और कहा था कि जंगलों में ट्रेनों की रफ्तार धीमी रहे, लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा।"

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हाथी दो जंगलों के बीच जिन इलाकों का प्रयोग करते हैं उसे ही कॉरिडोर (या गलियारा) कहते हैं। इनके बंद हो जाने के कारण हाथियों को लेकर मु्श्किलें बढ़ी हैं। 101 में 20 कॉरिडोर ऐसे हैं जहां से हाई स्पीड ट्रेन गुजरती हैं।

पर्यावरण मंत्रालय के ही एक आंकड़े के अनुसार 2009-10 और 2016-17 के बीच देश में कुल 655 हाथियों की जान गयी। इस तरह देखेंगे तो हर साल 80, हर महीने सात और चार दिन में एक हाथी की मौत हो रही है। इसमें से 44 हाथियों की मौत जहर देने, 101 की मौत अवैध शिकार और 390 की मौत करंट लगने से हुई।

बन्नेरघट्टा नेशनल पार्क बेंगलुरु में एशियन हाथियों पर अध्ययन कर रहे रोचा इंडिया के वरिष्ठ रिसर्च अधिकारी अविनाश कृष्णन ने गांव कनेक्शन को फोन पर बताया " कई बार हाथियों की मौत किसानों की वजह से भी होती है। जंगलों के आसपास बड़ी संख्या में किसान खेती करते हैं। हाथी उन फसलों के लिए जंगलों से निकलते हैं और ट्रेन या बिजली के तारों की चपेट में आ जाते हैं। इससे बचने का तरीका यह है कि सरकार ऐसी जगहों पर काम करने वाले एनजीओ और अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर लोगों को जागरूक करें।"

इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर की रिपोर्ट के अनुसार एशिया में कुल हाथियों की संख्या 41410 से 52345 के बीच है जिसमें से 55 फीसदी हाथी भारत में हैं। यहां अभी 29 हाथी रिजर्व है जो 65,000 हजार स्वायर मीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। पिछले साल हुई जनगणना के अनुसार केरल में सबसे ज्यादा 6282, कर्नाटक में 6068, असम में 5620, तलमिनाडु में 4015 और ओडिशा में 1930 हाथी हैं।

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अविनाश आगे कहते हैं " हम हाथियों के घरों में जाते हैं, वो तो वहीं रहने वाले हैं। ऐसे में ऐसी घटनाओं का जिम्मेदार कानूनी रूप से हम ही होते हैं। दोषियों पर उचित कार्रवाई होनी चाहिए। ट्रेन की चपेट में आने से अक्सर हाथी मारे जाते हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि जंगली क्षेत्रा में जहां वन्यजीव होते हैं वहां ट्रेनों की रफ्तार 30 किलो मीटर प्रति घंटे से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। ऐसे में यह दुर्घटना नहीं हत्या है।"

फोटो कलिंग टीवी से साभार

वर्ष 2012 दिसंबर में ओडिशा के ही गंजम में ट्रेन की चपेट में आने से छह हाथियों की मौत हो गयी थी। इससे पहले 2010 सितंबर में वेस्ट बंगाल के जलपाईगुड़ी में भी इसी तरह की घटना में सात हाथियों की मौत हो गयी थी।

ओडिशा वाइल्ड लाइफ सोसायटी के सचिव डॉ बिश्वजीत मोहंती ने गांव कनेक्शन को फोन पर बताया " नियम यह है कि बिजली के तार 5.5 मीटर की ऊंचाई पर होने चाहिए। लेकिन ढेंकनाल में तारों को महज दो मीटर तक ही ऊंचा रखा गया। यहां 100 से ज्यादा ऐसी जगह है जहां इतनी ही ऊंचाई पर तार खींचे गये हैं। हमने इसके बारे में पहले भी बताया था लेकिन किसी ने ध्यान ही नहीं दिया। ऐसे में ओडिशा की केंद्रीय विद्युत आपूर्ति के प्रबंध निदेशक को तुरंत गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।"

पर्यावरण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार भारत में 2009-10 में 89, 2010-11 में 106, 2011-12 में 82, 2012-13 में 105, 2013-14 में 80, 2014-15 में 80, 2015-16 में 69 और 2016-17 में 44 हाथियों की मौत जहर देने, करंट, ट्रेन एक्सीडेंट और अवैध शिकार के चलते हुई।


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