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अपने हालात पर आंसू बहा रहा सीएचसी

अपने हालात पर आंसू बहा रहा सीएचसीगाँव कनेक्शन

सुलतानपुर। गरीब मजलूमो को मुफ्त में अच्छी स्वास्थ्य सेवा मुहैया हो इसके लिए सरकार की तरफ से अस्पताल बनवाए जाते हैं लेकिन यहाँ का हाल सब उल्टा हैं हम बात कर रहे है सुलतानपुर मुख्यालय से 19 किलोमीटर इलाहाबाद-फैजाबाद रोड पर स्थित कूरेभार मे बने 30 बेड के अस्पताल (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) का जोकि एक वर्ष से बन कर तैयार है लेकिन अभी तक यह अस्पताल स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर नहीं किया गया, यह चौकाने बाली बात है।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कूरेभार मे अपनी नातिन, शीलू (सात साल) जो बुखार से पीड़ित थी दिखाने पहुंचे मुसहर नचना के रामतेज पाठक (60 साल) ने बने अस्पताल की तरफ  इशारा करते हुए बताया, "बड़ा अस्पताल लगभग एक साल से बन कर तैयार है लेकिन पता नहीं क्यूं अभी तक शुरू नहीं हुआ। अपनी नातिन को बच्चों बाले डॉक्टर को दिखाने लाए थे लेकिन डॉक्टर नहीं हैं एक ही डाक्टर सब को देख रहे है अगर बड़ा अस्पताल शुरू हो गया होता तो यहाँ हर मर्ज के डॉक्टर अलग होते जिससे मरीजों को भी जल्दी लाभ मिलता।"

बताते चले कि जिम्मेदारो की उदासीनता के चलते पुराने व जर्जर भवन में स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराई जा रही हैं। जिस भवन में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चल रहा है वह भवन लगभग सौ साल पुराना है। क्षेत्र के लोगों ने इस बाबत जिला अधिकारी को एक शिकायती पत्र दे कर जल्द अस्पताल संचालन कराने की मांग की है लेकिन अभी तक सुनवाई नहीं हो पाई है जिसके चलते नये बने अस्पताल परिसर में बड़ी-बड़ी धास-फूस व गन्दगी का अम्बार लगा हुआ है।

वहीं कूरेभार अस्पताल से 12 किलोमीटर दूर से पहुंचे सारन्गपुर बेलगरा के सन्तोष मिश्र (35 साल) ने बताया, "हम अपने पिता जी को दिखाने लाए थे। उनके पैर में दिक्कत थी, यहां डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने ने बताया कि आप हड्डी वाले डॉक्टर को दिखाओ इनको साटिका का रोग है और पैर की हड्डी टेडी हो रही हैं। बाहर से एक्स-रे और जांच लिख दिया अगर यह बड़ा अस्पताल शुरू हो गया होता तो जांच व एक्स-रे सब अस्पताल में मुफ्त में हो जाता लेकिन हम लोगों की सुनने वाला कोई नहीं है।"

सुलतानपुर के मुख्य चिकत्सा अधिकारी केशर बक्श सिंह ने बताया, "विद्युत सम्बन्धी कार्य रुका हुआ है। लोड होने की वजह से इसकी लाईन अलग से तैयार होनी है। बिजली विभाग जल्द ही कार्य पूरा करने वाला है। जल्द ही बिल्डिंग हैंडओवर कर ली जाएगीं लगभग छह लाख रुपए की और शासन से मांग की गयी है लेकिन उसकी वजह से हैंडओवर के लिए कोई रूकावट नही आएगी, जल्द ही भवन का अधिग्रहण कर लिया जाएगा।"

जनता के बीच में एक चर्चा हो रही है कि जैसे बझना सरकारी अस्पताल का हाल हुआ कि लगभग 30 साल से भवन बन कर तैयार हुआ और आज तक हैंडओवर नहीं हुआ जिसके चलते उसमें लगे लोहे के खिड़की दरवाजे तक को चोरो ने गायब कर दिया है, वैसा ही हाल यहां न हो जाए।

रिपोर्टर - केडी शुक्ला

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