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बुंदेलखण्ड की इस तस्वीर में पानी ढूंढिए तो जानें

लखनऊ। भारत का मध्य क्षेत्र बुंदेलखण्ड भारी सूखे का सामना कर रहा है। इसकी भयावहता का पता एक अंतरराष्ट्रीय संस्था के अंतरिक्ष तकनीकों की मदद से तैयार किए गए मानचित्र की तस्वीर से लगता है। 

संस्था के अनुसार उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में फैला इज़राइल देश जितना बड़े बुंदेलखंड क्षेत्र के सभी जि़ले इस शताब्दी की सबसे भीषण पानी की कमी से जूझ रहे हैं। 

कमी को मानचित्र में लाल और पीले रंग से दिखाया गया है। 

उत्तर प्रदेश में आने वाले ललितपुर, झांसी के दक्षिणी भाग, महोबा और बांदा साथ ही मध्य प्रदेश के टीकमगढ़, घाटमपुर, छतरपुर और दामोह जि़लों में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है।

'अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान (आईडब्ल्यूएमआई)' ने अपनी सेटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण कर यह जानकारी दी है कि क्षेत्र में सूखे की संभावना जून से ही साफ हो गई थी, जब वर्षा अनियमित हुई थी। संस्थान ने सूखे जैसी स्थितियों पर नज़र रखने के लिए अंतरिक्ष आधारित तकनीकों का उपयोग करने का समर्थन करते हुए जारी विज्ञप्ति में कहा, ''सूखे का अनुमान लगाने के लिए अंतरिक्ष आधारित तकनीकों का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा किया जाना चाहिए। इससे असल रूप लेने से पहले ही संभव समस्याओं का पता लगाया जा सकता है।"

''अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरों को देखकर बुंदेलखण्ड में स्थिति की गंभीरता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। खेत सूखे पड़े हैं और खेती की ज़मीन का बहुत बड़ा भाग पानी की कमी के चलते खाली छोड़ दिया गया है", आईडब्ल्यूएमआई के ड्रॉट मैपिंग प्रोजेक्ट के अध्यक्ष अमरनाथ गिरिराज ने कहा। उन्होंने आगे कहा कि, ''हम आशा करते हैं कि भविष्य में अंतरिक्ष तकनीकों से पानी की भीषण कमी होने से पहले ही सूखे का पता लगाया जा सकेगाए ताकि राहत कार्यों के समय को ज्यादा सटीक किया जा सके।"

आईडब्ल्यूएमआई ने बुंदेलखण्ड के सूखे की ये तस्वीरें अपने दक्षिण एशिया में चल रहे ड्रॉट मॉनिटरिंग कार्यक्रम (सूखे का पता लगाने वाले कार्यक्रम) के तहत जारी की है। इस कार्यक्रम के साझेदारों में विश्व मौसम विज्ञान संगठन और अंतरराष्ट्रीय कृषि सूचना नेटवर्क सीजीआईएआर शामिल हैं।