Arvind Kumar Singh

Arvind Kumar Singh

लेखक, राज्यसभा टीवी में वरिष्ठ पत्रकार हैं। गांव और किसान के मुद्दे पर देश का भ्रमण कर चुके हैं। ‘खेत-खलिहान’ गांव कनेक्शन में आपका साप्तहिक कॉलम है।


  • कर्नाटक : दाल किसानों के हाथ 'खाली कटोरा'

    भारत सरकार ने इस वर्ष के लिए फिर करीब दो लाख मीट्रिक टन तुर (अरहर दाल) के आयात को मंजूरी दे दी है। जबकि कर्नाटक समेत कई राज्य जहां दाल खूब पैदा होती और इस बार भी बंपर पैदावार की उम्मीद .. पढ़िए दाल के किसानों का दर्द और सियासत को लेकर वरिष्ठ पत्रकार अरविंद कुमार सिंह का लेख कलबुर्गी को...

  • सहकारी संस्थाएं बदल सकती हैं किसानों की दुनिया

    भारत में सहकारिता की सफलता की कहानियों पर चर्चा चलती है तो स्वाभाविक तौर पर इफको और अमूल के बिना वह अधूरी रहती है। ये दोनों भारत के वैश्विक ब्रांड हैं। अमूल की सफलता के पीछे गुजरात के सहकारिता क्षेत्र के दिग्गजों के साथ वर्गीज कुरियन की अथक साधना का हाथ रहा है तो इफको के वैश्विक विस्तार में डॉ. उदय...

  • क्या इसी राह से किसानों की आमदनी होगी दोगुनी?

    हाल में सुर्खियों में यह खबर आई कि मध्य प्रदेश के रतलाम मंडी में एक किसान अपना सात कुंतल लहसुन इस नाते छोड़ कर चला गया कि उसे खरीदार नहीं मिले। लहसुन एक रुपए और कहीं-कहीं तो पचास पैसे किलो तक पहुंच गया। नीमच मंडी में लहसुन दो रुपए किलो बिका तो मंदसौर की शामगढ़ मंडी में एक रुपए किलो। इसके बाद मध्य...

  • चंपारण सत्याग्रह : निलहों के लठैत किसानों से वसूलते थे रस्सी बुनने से लेकर रामनवमी तक पर टैक्स

    बिहार की धरती से चंपारण शताब्दी समारोह का समापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 अप्रैल को किया। गांधी जी ने 10 अप्रैल 1917 को बिहार की धरती पर कदम रखा था। मुद्दा था नील की खेती के शोषण से किसानों की मुक्ति। लेकिन प्रधानमंत्री की ओर से समापन कार्यक्रम का नाम दिया गया है सत्याग्रह से स्वच्छाग्रह।...

  • आज भी बेहाल है चंपारण सत्याग्रह के महानायक राजकुमार शुक्ल का गाँव

    चंपारण सत्याग्रह के महानायक राजकुमार शुक्ल का गांव सतवरिया पश्चिमी चंपारण में आता है। स्वाभाविक तौर पर यह गांव बीते एक सालों से खासा चर्चा में रहा और चंपारण शताब्दी पर देश के तमाम हिस्सों से लोग यहां पहुंचे भी। राजकुमार शुक्ल ही निलहों से मुक्ति के लिए गांधी जी को काफी प्रयासों के बाद चंपारण लाये...

  • सरकार ! चीनी मिलों पर गन्ने का बकाया बढ़कर 16 हजार 349 करोड़ रुपए हो गया है...

    ऐसे दौर में जबकि किसानों को वाजिब दाम देने का मसला राजनीतिक हलकों में छाया हुआ है और एमएसपी को लेकर सत्ता पक्ष, विपक्ष और किसान संगठनों के बीच वाकयुद्ध चल रहा, देश का गन्ना किसान फिर से बेहाल खड़ा है। इस समय देश में चीनी मिलों पर गन्ना किसानों को कुल बकाया बढ़ कर 16 हजार 349 करोड़ हो गया है। इसमें...

  • खेत खलिहान : आमदनी तो तब बढ़ेगी जब छोटे किसानों तक तकनीक पहुंचेगी 

    हाल में नई दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान परिसर में आयोजित कृषि उन्नति मेला में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए भारत की राह सशक्त करने में किसानों और कृषि वैज्ञानिकों की अहम भूमिका के साथ कृषि तकनीकों पर खास जोर दिया। उन्होंने कृषि से जुड़ी कई नई-नई तकनीकों को भी देखा और 25 नए कृषि विज्ञान...

  • सफलता की ओर करवट लेती किसान राजनीति

    महाराष्ट्र के किसानों के अनूठे पैदल मार्च ने देवेंद्र फड़नवीस सरकार को इतना हिला कर रख दिया कि उनकी मांगों को आनन-फानन में मान लिया गया। बेहद अनूठे अंदाज में नासिक से 180 किमी की पैदल यात्रा करते हुए किसान धरनास्थल पर रात में पहुंचे ताकि वहां के नागरिकों और बोर्ड परीक्षार्थियों को कोई परेशानी न हो।...

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