असली टी-20 नागपुर से बहुत दूर, संसद में

असली टी-20 नागपुर से बहुत दूर, संसद मेंगाँवकनेक्शन

लखनऊ। नागपुर में आज टी-20 क्रिकेट प्रतियोगिता आरम्भ हो रही है, और वहां से 852 किमी दूर दिल्ली में संसद में भारतीय जनता पार्टी द्वारा एक और टी-20 नुमा पारी खेली जा रही है। सत्ता पक्ष इस होड़ में है कि आधार कार्ड पर आधारित एक कानून, जो करोड़ों नागरिकों की गोपनीय जानकारी, उँगलियों और आँखों की छाप आदि को सब्सिडी के लिए संग्रहीत करेगा, बजट सत्र के आखिरी दो दिनों में पिछले दरवाज़े से पारित हो जाए।

इस कानून के ज़रिए केंद्र सरकार देश के लोगों को दी जाने वाली तमाम वित्तीय सब्सिडी को उनके “यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर” या आधार नंबर से जोड़ देगी। यह सरकार इस वर्ष के बजट के अंतर्गत दी जाने वाली 2 लाख 50 हज़ार करोड़ की सलाना सब्सिडी को गलत हाथों में जाने से रोकने के लिए कर रही है। लेकिन विपक्ष बिल का विरोध यह कहकर कर रहा है कि इस बिल से देश के नागरिकों की सुरक्षा खतरे में आ सकती है, क्योंकि ये गोपनीय जानकारी गलत हाथों में पड़ने का खतरा है।

बिल किसी तरह पास हो जाए, इसके लिए इस हफ्ते एक अद्भुत छाया नट खेला गया है।

सरकार के पास इस बिल को पास कराने -और विपक्ष के पास इसे रोकने के लिए- वक्त बहुत कम है।

सोमवार को राज्य सभा का सत्र भी माल्या और आरएसएस पर विपक्षी पार्टी के नेता के बयान पर मचे बवाल में निकल गया। पहले से ही तीन बिलों से लदी राज्य सभा के पास कल का आखिरी दिन है 11 मार्च को लोकसभा में पास आधार बिल पर कोई चर्चा करने का।

आधिकारिक तौर पर आधार बिल सोमवार 14 मार्च को राज्यसभा में प्रस्तुत हुआ है, और दो दिन बाद ही राज्य सभा के बजट सत्र का कार्यकाल खत्म होने वाला है। विपक्ष ने 14 मार्च की सुबह राज्यसभा में सत्तापक्ष से सदन के कार्यकाल को दो दिन बढ़ाने की मांग भी की। लेकिन बिल को इसी सत्र में पास कराने को अड़ी बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार ने विपक्ष की मांग को ठुकरा दिया।

अगर लोकसभा में कोई बिल पास कर दिया गया तो राज्य सभा बिल में कोई भी बदलाव नहीं कर सकती, बस बिल पर चर्चा कर सकती है। यह एक ‘मनी बिल’ है अर्थात नियम के हिसाब से यदि राज्य सभा में 14 दिन के भीतर बिल पर कोई चर्चा नहीं होती तो बिल को पास माना जाएगा।

जिस दो लाख करोड़ से ज्यादा की सब्सिडी की बंदरबांट को रोकने का उद्देश्य बताकर सरकार यह बिल ला रही है उसका बड़ा हिस्सा सीधे गाँवों को जाता है। लगभग 70,000 करोड़ उर्वरक पर, इतना ही बिजली पर और अतिरिक्त 50-60 करोड़ ईंधन, बीज, खेती के उपकरण, मुफ्त पानी और अन्य तमाम बोनसों पर।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने हाल में संसद में बताया कि अब तक 97 प्रतिशत वयस्क भारतीयों के आधार कार्ड बन चुके हैं और रोज़ छह से सात लाख कार्ड बन बनवाए जा रहे हैं.

लेकिन विपक्ष का डर है कि वर्तमान समय में जब ऑनलाइन जानकारियों की चोरी इतनी आसान है तो करोड़ों नागरिकों की इस जानकारी के चोरी होने का डर बना रहेगा, ठीक वैसे ही जैसे आज के दौर में विज्ञापन कंपनियों को कॉल करने के लिए आपका नंबर बेच दिया जाता है।

विपक्ष यह भी आरोप लगा रहा है कि सरकार लोकसभा में बहुमत का फायदा उठाते हुए राज्यसभा को कमजोर कर रही है। “आधार बिल इस बात का सबूत है कि कैसे सरकार जो राज्यसभा में लगातार आलोचना झेल रही है अब उसे पूरी तरह बायपास करना चाहती है,” विपक्षी पार्टी सीपीएम के नेता सीताराम येचुरी ने कहा।

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