औषधीय गुणों से भरे हैं सरसों, राई व सूरजमुखी

औषधीय गुणों से भरे हैं सरसों, राई व सूरजमुखीडॉ दीपक आचार्य, सेहत कनेक्शन

ठंड के मौसम में सूरजमुखी, सरसों और राई के तेल का इस्तेमाल ग्रामीण क्षेत्रों में खूब किया जाता है। ना सिर्फ इनके बीजों के तेल बल्कि इनके पौधों के अन्य अंगों का इस्तेमाल भी अनेक रोगोपचार में किया जाता है। इस सप्ताह हमारे पाठकों के लिए इन्हीं तीन पौधों के औषधीय गुणों का जिक्र करने जा रहा हूं, साथ ही इनके बीजों से प्राप्त तेल के गुणों का जिक्र भी करूंगा।

सूरजमुखी

सूरजमुखी पौधे की खेती पूरे भारत में होती है। इसके बीजों से खाद्य तेल प्राप्त किया जाता है और पौधे को सुंदर फूलों की वजह से उद्यानों में भी रोपित किया जाता है। इस पौधे के औषधीय गुणों के बारे में कम लोग ही जानते हैं। 

जिन्हें हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत हो, आदिवासी उन्हें सूरजमुखी के बीजों से प्राप्त तेल को अपनाने की सलाह देते हैं। इसकी पत्तियों का रस निकाल कर मलेरिया के बुखार आने पर शरीर पर लेपित किया जाता है, पातालकोट के आदिवासियों का मानना है कि यह रस शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है। उल्टी और जी मिचलाना जैसे विकारों में सूरजमुखी के बीजों का तेल (2 बूंद) नाक में डालने से आराम मिलता है। डाँग, गुजरात के हर्बल जानकार सूरजमुखी के बीजों के तेल के साथ कुछ मात्रा इलायची के दानों के चूर्ण को मिलाकर नाक में डालते है ताकि उल्टी होना बंद हो जाए। सूरजमुखी की पत्तियों को इसी के तेल के साथ कुचला जाए और बवासीर के रोगी को बाह्यरूप से लेपित किया जाए तो आराम मिलता है। 

अपचन और पेट में गड़बड़ी की शिकायत होने पर गर्म दूध में सूरजमुखी का तेल (4-5 बूंदें) डाल दी जाए और सेवन करें। शारीरिक दुर्बलता में सूरजमुखी की पत्तियों का रस बड़ा गुणकारी है, लगभग पांच पत्तियां लेकर 100 मिली पानी में तब तक उबाले जब तक कि यह आधा शेष बचे, और फिर सेवन करें। पेशाब की दिक्कत में, इसके बीजों (एक चम्मच) को कुचल कर गुनगुने पानी के साथ पीना चाहिए, पेशाब का आना नियमित और निरंतर हो जाता है। 

राई

सरसों की प्रजाति का राई एक महत्वपूर्ण मसाले के तौर पर हर भारतीय रसोई में उपयोग में लाया जाता है। इसे काली सरसों के नाम से भी जाना जाता है। आदिवासी अंचलों में अनेक हर्बल नुस्खों के रूप में भी आजमाया जाता है।  

राई के बीज में मायरोसीन, सिनिग्रिन जैसे रसायन पाए जाते है, ये रसायन त्वचा रोगों के लिए हितकर हैं। राई को रात भर पानी में डुबोकर रखा जाए और सुबह इस पानी को त्वचा पर लगाया जाए तो त्वचा रोगों में आराम मिल जाता है। 

आदिवासियों के अनुसार राई के बीजों का लेप ललाट पर लगाया जाए तो सिरदर्द में अतिशीघ्र आराम मिलता है। कुछ इलाकों में आदिवासी इस लेप में कपूर भी मिला देते हैं ताकि जल्दी असर हो। चुटकीभर राई के चूर्ण को पानी के साथ घोलकर बच्चों को देने से वे रात में बिस्तर पर पेशाब करना बंद कर देते है। यदि किसी व्यक्ति को लगातार दस्त हो रहे हों तो हथेली में थोड़ी सी राई लेकर हल्के गुनगुने पानी में डाल दिया जाए और रोगी को पिला दिया जाए तो काफी आराम मिलता है। पातालकोट के कई हिस्सों में आदिवासी इस मिश्रण में थोड़ा से केरोसिन तेल डालकर मालिश करते हैं। कहा जाता है कि यह फार्मूला दर्द को खींच निकालता है। राई के घोल को सिर पर लगाने से सर के फोड़े, फुंसी और बालों का झडऩा भी बंद हो जाता है। डांगी हर्बल जानकारों के अनुसार ऐसा करने से सिर से डेंड्रफ भी छूमंतर हो जाते हैं। राई को बारीक पीसकर यदि दर्द वाले हिस्से पर लेपित किया जाए तो आधे सिर का दर्द माईग्रेन में तुरंत आराम मिलता है। 

सरसों

सरसों के पीले-पीले फूल खेत-खलिहानों की खूबसूरती दुगुना तो करते हैं, इनके बीजों से प्राप्त तेल, ठंड में हमारे शरीर को गरमाहट देता है और औषधीय तौर से बड़ा खास होता है। सरसों के तेल यानि कड़वा तेल में कई गुण हैं जो आपकी सेहत और उम्र दोनों को बेहद फायदा पहुंचाते हैं। सरसों का तेल दर्दनाशक होता है जो गठिया व कान के दर्द से राहत देता है इसलिए यह

किसी औषधि से कम नहीं है।  

डाँग जिला गुजरात के हर्बल जानकारों का मानना है कि लहसुन की कलियों को सरसों के तेल के साथ कुचलकर गर्म किया जाए और कपूर मिलाकर जोड़ों या दर्द वाले हिस्सों पर लगाकर मालिश की जाए तो आराम मिलता है। अकोना या मदार की ताजा पत्तियों पर सरसों का तेल लेपित किया जाए और तवे पर हल्का गर्म किया जाए और जोड़ दर्द वाले हिस्सों पर लगाया जाए तो दर्द में राहत मिलती है। प्याज के रस को सरसों के तेल में मिलाकर जोड़ों पर मालिश करने से आमवात, जोड़ दर्द में आराम मिलता है। माना जाता है कि इस नुस्खे को दो महीनों तक लगातार आजमाया जाए, तो बहुत फायदा होता है। 

गुजरात के हर्बल जानकारों का मानना है कि जिन लोगों को भूख कम लगती है या भूख न लगती हो उन्हें सरसों खूब फायदा दे सकती है। खाने में सरसों के तेल का इस्तेमाल करें क्योंकि यह तेल हमारे पेट में ऐपिटाइजर के रूप से काम करता है जिससे भूख बढऩे लगती है। सरसों के तेल में मौजूद विटामिन जैसे थियामाइन, फोलेट व नियासिन शरीर के मेटाबाल्जिम को बढ़ाते हैं जिससे वजन आसानी से कम होने लगता है। नियमित रूप से अस्थमा से परेशान लोगों को सरसों का तेल खाने में इस्तेमाल करना चाहिए।

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