बाबूपुरवा बना कानपुर का पहला हाईटेक थाना

बाबूपुरवा बना कानपुर का पहला हाईटेक थानागाँवकनेक्शन

कानपुर। शहर की पुलिस को हाईटेक करने के लिए एक साल पहले जिस रणनीति से कयावद शुरू कर दी गई थी, वह अब सफल हो रही है। कानपुर की पुलिस को हाईटेक बनाने की शुरुआत शुरू हो गई है। इसी क्रम में कानपुर के सारे थानों को पेपर लेस करने की योजना की शुरुआत नगर के बाबूपुरवा थाने से कर दी गयी है। 

बाबूपुरवा थाना शहर का पहला थाना हो गया है जहां एनसीआर से लेकर एफआईआर और जीडी से लेकर कागजों का सत्यापन ऑनलाइन हो गया है। किसी भी पीडि़त को अब दरोगा और मुंशी के पीछे-पीछे नहीं घूमना होगा। मुद्दई अपने मुकदमे के बारे में पूरी जानकारी घर बैठे ही जान पाएंगे।

एफआईआर के साथ पुलिस ने कौन-कौन धाराएं लगाई हैं, विवेचना कौन कर रहा है ये सारी जानकारी आपको यूपी पुलिस की वेबसाइड के जरिए एक क्लिक कर घर बैठे ही मिल जाएगी। अब बाबूपुरवा में थानेदार से लेकर दरोगा व मुंशी तक कंप्यूटर पर काम कर रहे हैं। इसके लिए उन्हें ट्रेनिंग भी दी जा रही है। साथ ही थाने पर क्राइम एंड क्रिमिनल्स ट्रैकिंग नेटवर्किग सिस्टम (सीसीटीएनएस) की टीम के सदस्य भी इनकी समस्याओं को हल करने के लिए तैनात किये गए है। थानों में कवरेज अप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (सीएएस) पर क्राइम एंड क्रिमिनल्स ट्रैकिंग नेटवर्किग सिस्टम (सीसीटीएनएस) के तहत स्थानीय नेटवर्क पर एफआईआर ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों तरह से लिखी जा रही है।

प्रदेश के थानों को पेपर लेस करने के लिए अपर पुलिस महानिदेशक तकनीकी सेवा आरके विश्वकर्मा ने सभी जिलो के कप्तानों से हर जिले से ऐसे सुविधा संपन्न थाने का ब्यौरा मांगा था। कानपुर शहर के थानों से हाईटेक थानों के लिए बाबूपुरवा थाना को चुना गया। यहां के थानेदार के कंप्यूटर में दक्ष थे साथ ही थाने में एक कंप्यूटर ऑपरेटर की नियुक्ति भी थी। 15 जनवरी से यहां नई व्यवस्था के तहत कार्य शुरू कर दिया गया शासन के आदेश है कि इस थाने में 90 दिन के अंदर सभी काम कंप्यूटर पर होने लगेंगे, जिसमें जीडी से लेकर लोगों के चरित्र सत्यापन तक का काम शामिल होगा। शासन द्वारा प्रदेश के पेपर लेस घोषित थानों में अच्छा रिजल्ट देने वाले तीन थानों को पुरस्कृत किया जायेगा। 

सीसीटीएनएस प्रभारी राम सिंह ने बताया, ''इसके लिए सभी पुलिस कर्मियों की उनके पीएनओ नंबर के आधार पर पुलिस सर्वर पर आईडी बनाई गई है। थानेदार और अधिकारियों की आईडी उनके सीयूजी नंबर के आधार पर बनाई गई है।''

रिपोर्टर - राजीव शुक्ला

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