बाढ़ जनित क्षेत्रों में भी होगी धान की बेहतर पैदावार

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कानपुर देहात। बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को अब अपने धान के फसल सड़ने की चिंता करने की जरूरत नहीं है। पं बंगाल के वीरभूमि जिले के विश्व धान शोध संस्थान (इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट) ने एक ऐसी धान की प्रजाति बीना-11 विकसित की है जो ज्यादा बारिश में भी खराब नहीं होगी।

“हर साल धान बोने के बाद ये चिंता रहती थी अगर कहीं ज्यादा बारिश हो गई तो हमारा धान सड़ जाएगा, पर इस बार देशी धान बीना-11 बोई है, जो जलजमाव क्षेत्रों के लिए उपयोगी साबित होगी ये कहना है।” कानपुर नगर के शिवराजपुर ब्लॉक से उत्तर दिशा में तीन किलोमीटर दूर सीताराम माना ताला गाँव के किसान सतीश पाल (45 वर्ष) का। 

इस गाँव के किसान पिछले कई वर्षों से धान की फसल में नुकसान झेल रहे थे, जब ये बात डब्ल्यूडब्ल्यूूएफ इंडिया के वरिष्ठ कोऑर्डिनेटर राजेश वाजपेयी को समूह चर्चा के दौरान पता चली तो उन्होंने बीना-11 देशी धान का बीज प्रति किसान एक किलो उपलब्ध कराया, जिससे कि किसानों को इस समस्या से निजात मिल पाए।

गाँव में रहने वाले महेश शर्मा (43) बताते हैं, “मुझे एक किलो बीज मिला हैं, उसे अमृत पानी में शोधित करके पौध तैयार करने के लिए बुवाई कर दी है, 20 दिन में पौध तैयार हो जाएगी, जो खेत हमारा गहराई में है उसमे इस धान से रोपाई करेंगे और देखेंगे कि इस बार कैसी  पैदावार होती है|” अभी तक गाँव के ज्यादातर खेत खाली पड़े रहते थे या फिर ज्यादा बारिश से पूरी तरह से नष्ट हो जाते थे। ऐसे में ये नई प्रजाति उनके लिए वरदान साबित हुई है। 

किसान राजेश अभी तक कोई फसल नहीं बोते थे, इस बार जितना भी बीज मिला है उससे और ज्यादा बीज पैदा करेंगे जिससे अगली साल ज्यादा जगह में लगा पाएं | इस साल सुनने में आ रहा है कि बारिश ज्यादा होगी, इस बात के लिए अब हमें परेशान होने की जरुरत नहीं है क्योंकि हमें बेहतर बीज मिल गया है, बस पैदावार बढि़या हो जाए|”

डब्ल्यूडब्ल्यूूएफ इंडिया के वरिष्ठ कोऑर्डिनेटर राजेश वाजपेयी इस धान की खूबी के बारे में बताते हैं, “बीना-11 ज्यादा वर्षाजनित क्षेत्रों और बाढ़ वाले इलाकों के लिए उपयोगी है अगर 10 दिन भी पूरी फसल पानी में डूबी रही तो भी कोई नुकसान नहीं होगा। साथ ही ये सामान्य मौसम में भी बो सकते हैं| इस धान के बीज को अभी छह जिले बिजनौर, मुरादाबाद, बरेली, शाहजहांपुर, कानपुर, फतेहपुर में 15 कुंतल मुफ्त में किसानों को बांटा गया है|” वो आगे बताते हैं हमारा पहला प्रयास है अगर इसमे हमें सफलता मिल गई तो लाखों किसानों की समस्याओं का समाधान हो जाएगा |

रिपोर्टर - नीतू सिंह

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

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