बागपत में कवड़ियों पर हमले के बाद तनाव

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बागपत। कोतवाली बागपत के काठा गाँव में कांवड़ यात्रियों पर दूसरे समुदाय के लोगों ने पथराव कर दिया। इसमें करीब डेढ़ दर्जन कांवड़िए घायल हो गए। आरोप है कि दूसरे समुदाय के लोगों ने कांवड़िए पर फायरिंग की और पेट्रोल का कनस्तर भी फेंका। उधर, गुस्साए कांवड़ियों ने एक कार में आग लगा दी। कांवड़ियों ने दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे जाम कर दिया। डीएम व एसपी मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला।

बागपत मुख्यालय से दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे पर काठा गाँव में कई दर्जन युवा विशाल कांवड़ लेकर लौट रहे थे। गाँव के युवा शिव मंदिर कांवड़ संघ के बैनर तले विशाल कांवड़ लेकर पिछले तीन साल से हरिद्वार जाते हैं। रविवार रात को जब कांवड़िए भजन गाते हुए गाँव पहुंचे तो वहां हाईवे के किनारे ट्रक खड़ा था। उसी के पास दूसरे समुदाय के युवक भी खड़े थे। कांवड़ निकालने के लिए जगह कम थी तो कावड़ियों ने युवकों से हटने का अनुरोध किया।

इसी बीच कांवड़ियों व इन युवकों में कहासुनी हो गई। आरोप है कि इसी बीच दूसरे समुदायों के युवाओं ने अपने घरों की छतों पर चढ़कर कांवड़ियों पर पथराव कर दिया। इसमें करीब डेढ़ दर्जन लोग घायल हो गए। आरोप है कि कांवड़ियों पर फायरिंग की गई और पेट्रोल का कनस्तर भी फेंका गया। कांवड़ियों ने बताया कि दूसरे समुदाय के युवकों के घर हाईवे किनारे ही स्थित हैं। कांवड़ियों के साथ ऐसा बर्ताव देख गाँव के लोग घरों से निकल आए और हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान एक घर के सामने खड़ी कार को कांवड़ियों ने आग लगा दी।

ट्रक व दो बाइकों में तोड़फोड़ की गई। कांवड़ियों और गाँव वालों का आरोप है कि कार में आग भी दूसरे समुदाय के लोगों ने खुद ही लगाई है, जिससे उनको सहानुभूति मिल जाए। कांवड़ियों में राधा का किरदार निभाकर नृत्य कर रहा युवक घायल हो गया। बवाल में कांवड़िया जयराम के सिर में गहरी चोट आई है और कांवड़िया वीरेंद्र का पैर टूट गया। कांवड़ का स्पीकर व माइक टूट गया। मौके पर पुलिस पहुंची, लेकिन लोगों का गुस्सा शांत नहीं कर सकी। कांवड़ियों ने हाईवे जाम कर दिया। कुछ देर बाद डीएम हृदय शंकर तिवारी व एसपी पूनम भी मौके पर पहुंचे। दमकल की गाड़ी भी मौके पर पहुंची और कार में लगी आग बुझाई। इस दौरान डीएम व एसपी को लोगों का आक्रोश झेलना पड़ा। हाईवे पर बवाल व जाम की सूचना मिलने पर दिल्ली व बड़ौत की ओर से आने-जाने वाले वाहन जहां थे, वहीं खड़े हो गए। जो वाहन काठा गाँव के नजदीक पहुंच गए थे वे वहां से वापस लौट गए। 

हाईवे पर खड़े ट्रकों ने करा दिया बवाल

बागपत में हाईवे पर खड़े ट्रकों ने बवाल करा दिया। बिना पार्किंग के अवैध रूप से खड़े इन ट्रकों का प्रशासन ने भी कोई संज्ञान नहीं लिया, जिसके बाद काठा में फिजा बिगड़ने तक की नौबत आ गयी। सूचना पर कोतवाली पुलिस मौके पर तो पहुंची, लेकिन पुलिस बल की संख्या बेहद कम थी। पुरामहादेव में ड्यूटी की वजह से पर्याप्त संख्या पुलिस बल मौके पर नहीं पहुंच सका, जिससे तुरंत कार्रवाई नहीं की जा सकी। उधर, गुस्साई भीड़ हंगामा और तोड़फोड़ करती रही। पुलिस असहाय होकर किनारे खड़ी रही। काफी देर बाद मौके पर सैकड़ों पुलिसकर्मी पहुंचे। 

गाँव में पुलिस बल तैनात

काठा गाँव में पथराव के बाद तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। गाँव में पुलिस तैनात कर दी गई है। गाँव के कुछ लोगों ने बताया कि काठा गाँव में हाईवे किनारे ही संप्रदाय विशेष के कई घर हैं। यहां कभी माहौल नहीं बिगड़ा।

एसपी ने दिया कार्रवाई का आश्वासन 

एसपी पूनम ने कांवड़ियों पर हमला करने वाले लोगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने जाम खोलने का आग्रह किया, लेकिन रात 11 बजे तक भी जाम लगा रहा। लोग तुरंत कार्रवाई की मांग को लेकर डटे हुए थे। 

संवेदनशील गाँवों की लिस्ट में काठा गाँव, पर इंतजाम अधूरे 

काठा गाँव को भी उन संवेदनशील गाँवों में शामिल किया गया था, जिसकी लिस्ट प्रशासन ने तैयार की थी। काठा गाँव में कांवड़ यात्रा के रास्ते में शिव मंदिर, दुर्गा मंदिर और ईदगाह व मस्जिद स्थित होने के आधार पर संवेदनशील माना गया था। पुलिस प्रशासन को यह भी मालूम रहा होगा कि यहां के लोग हर वर्ष विशाल कांवड़ लेकर जाते हैं। रविवार रात जो बवाल हुआ इससे यही लगता है कि प्रशासन व पुलिस ने महज गाँवों के नाम लिखे थे पर किसी अनहोनी से बचने के लिए कोई योजना नहीं बनाई थी। जब झगड़ा होने की सूचना मिली तब भी पुलिस वहां नहीं पहुंच सकी।

संतों के आश्वासन पर कांवडियों का धरना समाप्त 

बागपत। काठा गाँव में कावंड़ियों पर हमले के बाद तनाव की स्थिति बनी हुई है। हालांकि संतों के आश्वासन के बाद कांवड़ियों ने धरना समाप्त कर दिया है। पुलिस प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कारवाई करने का आश्वासन दिया है, जिसके बाद धरना समाप्त कर कांवड़ियों ने शिव मंदिर पहुंचकर जल चढ़ाया। 

कांवड़ियों पर हमले के बाद गुस्साए शिव भक्तों ने मिलकर धरना प्रराम्भ कर दिया, जिसमें निर्णय लिया गया कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की जाती है तक तक धरना जारी रहेगा और कोई भी कांवड़िया जल नहीं चढ़ाएगा। इस निर्णय से जिला प्रशासन के हाथ-पैर फूल गए।

जिला प्रशासन ने मामले को लेकर संतों से सहयोग मांगा। संत महामंडलेश्वर भैयादासजी महाराज मौके पर पहुंचे और प्रशासन से वार्ता कर दोषियों के खिलाफ काईवाई का आश्वासन लिया, जिसके बार आक्रोशित कांवड़ियों को समझाया गया। संत के आश्वासन के बाद कांवड़ियों ने धरना समाप्त कर दिया। धरना समाप्त होने पर जहां जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली वहीं संत ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर आश्वासन के बाद भी किसी भी कांवड़ियों के खिलाफ प्रशासन ने कोई कारवाई की और दोषियों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया तो चार दिन बाद आन्दोलन झेलने को तैयार रहें।

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