बाल मित्र थानों से संवरेगा बाल श्रमिकों का बचपन

बाल मित्र थानों से संवरेगा बाल श्रमिकों का बचपनगाँव कनेक्शन

कानपुर। सरकार ने एक नई पहल शुरू की है, जिसके तहत भीख मांगने वाले, कूड़ा बीनने वाले और अपराधिक गतिविधियों में लिप्त बचपन को सुधारने और संवारने के लिए बकायदा कानपुर समेत छह जिलों में बाल मित्र थाना स्थापित किए जाएंगे। 

थाना स्थापित करने का काम पुलिस विभाग व महिला एवं बाल कल्याण विभाग संयुक्त रूप से करेंगे। शासन ने कानपुर नगर, गाजियाबाद, मुरादाबाद, इलाहाबाद, लखनऊ और वाराणसी में बाल मित्र थाना स्थापित करने के लिए मंजूरी दी है।

प्रोबेशन अधिकारी आशुतोष सिंह ने बताया, ''पुलिसकर्मी भी कार्यशाला में बच्चों से संवाद करेंगे। ऐसा इसलिए किया जाएगा ताकि बच्चे पुलिसकर्मियों को अपना हित रक्षक मान सकें। बाल मित्र थाना की स्थापना को लेकर तैयारी चल रही है। जल्द ही सुझाव के संबंध में कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।’’

दो विभाग सवारेंगे बचपन

शहर में कई वारदात हुईं जिनमें पुलिस ने कई नाबालिग बच्चों को गिरफ्तार किया। इतना ही नहीं, बच्चे नशे के साथ अन्य वारदातों में शामिल हो रहे हैं। इस योजना के अमल में आने के बाद पुलिस इन बच्चों पर निगाह रखने के साथ ही एहसास संस्था को दे देगी।

बाल मित्र थानों में होगी काउंसलिंग

बच्चों से संबंधित मामलों की विवेचना और अन्य कार्य अब बाल थानों से किए जाएंगे। किसी भी मामले में कोई बच्चा पकड़ा जाएगा तो बाल मित्र थाने में उसकी काउंसलिंग की जाएगी। जिस तरह अन्य थानों में पुलिस स्टाफ  होता है बाल मित्र थाने में भी होगा। हालांकि थाने में काउंसलर और बाल कल्याण अधिकारी भी तैनात होंगे जो अपराधिक गतिविधियों में लिप्त बच्चों की काउंसिलिंग करेंगे।

पुनर्वास का भी होगा काम, भीख मंगवाने पर होगी कार्रवाई

तमाम संगठित गिरोह के साथ ही मां-बाप भी बच्चों से भीख मंगवाते हैं। झुग्गी झोपडिय़ों में रहने वाले तमाम बच्चे नशे के आदी हो जाते हैं। कूड़ा कबाड़ बीनते हैं और कई प्रकार के नशे का सेवन करते हैं। ये बच्चे अपराधिक गतिविधियों में भी लिप्त होते हैं। इन बच्चों के पुनर्वास का काम भी बाल मित्र थाने में तैनात बाल कल्याण अधिकारी द्वारा किया जाएगा। साथ ही बच्चों से भीख मंगवाने वाले संगठित गिरोह के सदस्यों पर कार्रवाई भी होगी।

किशोर अपराधियों को थमाई जाएगी कलम और किताब

बाल सुधार गृहों में बंद बच्चों और किशोरों को पढ़ाने के साथ ही उन्हें विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षित भी कराया जाएगा, ताकि वे जेल से निकलने के बाद समाज की मुख्य धारा से जुड़ सकें। वे जेल से निकलने के बाद अपराधिक गतिविधियों में लिप्त न हों इसके लिए उनकी काउंसिलिंग भी की जाएगी। 

यौन उत्पीडऩ के शिकार बच्चे या किशोर-किशोरियां कई बार पुलिसवालों से शिकायत नहीं करते। परिजनों से शिकायत करने से भी वे डरते हैं। ऐसे में इन बच्चों की झिझक दूर करने को स्कूलों में कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा।

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