बाल विवाह में सजावट से टेंटवालों ने किया इनकार

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लखनऊ। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और डीजीपी को अक्षय तृतिया के अवसर बाल विवाहों के बढ़ने की आशंका के चलते, इन पर रोक लगाने की तैयारियों को जानने के लिए पत्र लिखा है।

वर्तमान समय में देश के कई राज्यों से बाल-विवाह की खबरें और उन पर पुलिया कार्रवाई की खबरें सामने आ रही हैं। इसी बीच राजस्थान के 47,000 से ज्यादा टेंट के व्यवसायियों ने मिलकर ये ठाना है कि उनमें से कोई भी अब बालविवाह में टेंट या अन्य कोई भी सजावटी सामान नहीं देगा।

बाल संरक्षण के लिए विश्वभर में काम करने वाली संस्था यूनिसेफ के अनुसार देश में राजस्थान, बिहार और झारखण्ड जैसे राज्य इस कुप्रभा से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इन जिलों में हर दस में से छह बच्चियां बाल विवाह को शिकार होती हैं। टेंट व्यवसायियों के संगठन ने तय किया है कि बालविवाह है या नहीं ये तय करने के लिए टेंट वाले अब परिवार वालों से दूल्हा-दुलहन का जन्म प्रमाण पत्र मांग रहे हैं। यदि कोई परिवार झूठ बोलता पाया जाता है तो उसकी शिकायत भी निकटतम थाने में कर दी जाती है।

राजस्थान में ही इसी तरह के दूसरे प्रयास में जैसलमेर के जिलाधिकारी ने बालविवाह रोकने के लिए एक अलग नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है जिसकी निगरानी की जिम्मेदारी सभी आला-अधिकारियों की है। इस नियंत्रण कक्ष में कोई भी शिकायत कर सकता है।

राजस्थान में हुए ये दोनों ही प्रयास इस गैर कानूनी कुप्रथा से लड़ रहे देश के अन्य राज्यों के लिए मिसाल बन सकते हैं। बालविवाह न सिर्फ एक बच्ची के मूल अधिकारों का हनन है बल्कि उस बच्ची की जान ले सकता है। कम उम्र में माँ बनना देश में होने वाली बच्चों और मांओं की मौतों के प्रमुख कारणों में से एक है।

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