बालगृह में संरक्षण नहीं शोषण

बालगृह में संरक्षण नहीं शोषणgaonconnection

नई दिल्ली। दिल्ली के लाजपत नगर इलाके में एक बालगृह के अधीक्षक राम सहाय मीणा को वहां रहने वाली 10 वर्ष से कम उम्र की छोटी बच्चियों द्वारा उन पर बलात्कार और फोन पर सेल्फी बनाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया।

मामले के बारे में दिल्ली के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सतीश कैन ने बताया कि राम सहाय लाजपत नगर के जिस सरकारी बालगृह का प्रभारी था, वहां ह्यूमन ट्रैफिकिंग और भिखारियों के चंगुल से छुड़ाई गई बच्चियों को रखा जाता है। पुलिस के मुताबिक, मीणा ने कथित रूप से इन बच्चियों के साथ की अपनी यौन हरकतों को मोबाइल फोन पर शूट भी किया, और सेल्फी भी लीं।

“दिल्ली सरकार के अधिकारी के ज़रिए शिकायत मिलने पर लाजपत नगर में बालगृह के अधीक्षक राम सहाय मीणा को गिरफ्तार कर लिया गया है। दिल्ली के महिला एवं बाल कल्याण मंत्री संदीप कुमार के आदेश पर संस्था के एक अन्य कर्मचारी के साथ मीणा को गिरफ्तार किया गया।’’ पुलिस अधिकारी ने बताया।

हाल ही में दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित ऑल इंडिया वूमेन जर्नलिस्ट वर्कशॉप में मेनका गांधी ने कहा, “भारत में बालगृहों में पल रही बालिकाओं की सुरक्षा एक अहम मुद्दा है। इसमें सुधार लाते हुए हम बालगृहों में शिकायत पेटिका लगवाएंगे, जिसमें वहां पल रही लड़कियां अपनी बात लिख कर बता सकेंगी, जो अक्सर वो किसी से नहीं कह पाती।’’

बालगृह में रहने वाली कुछ लड़कियों ने बताया कि मीणा ने उनके साथ छेड़छाड़ और बलात्कार किया, उन्हें चिकित्सीय परीक्षण के लिए ले जाया गया और कुछ मामलों में बलात्कार की पुष्टि हुई है। राम सहाय के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

बालगृहों में केयर-टेकर, रसोइया और सुरक्षाकर्मी करते हैं ऐसा घिनौना काम

सरकारी और गैर-सरकारी दोनों संस्थानों से बच्चों के शारीरिक,मानसिक और यौन उत्पीड़न के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक, बाल गृह और अनाथालयों में बच्चे पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी बाल गृहों के मामले में ज़्यादातर अपराधी वहीं के कर्मचारी, जैसे केयर-टेकर, रसोइया और सुरक्षाकर्मी होते हैं। 

एशियन सेंटर फॉर हयूमेन राइट्स, नई दिल्ली की रिर्पोट के मुताबिक भारत के विभिन्न राज्यों में स्थित बाल गृहों में बच्चों के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न के जिन 39 मामलों का अध्ययन किया गया है, उनमें से 11 मामले सरकारी सम्प्रेक्षण गृह, बाल गृह, आश्रय गृह और अनाथालयों के हैं, जबकि 27 केस प्रायवेट या स्वंसेवी संस्था द्वारा चलाए जा रहे संम्प्रेक्षण गृह, बालगृह, आश्रय गृह और अनाथालयों के हैं।

देश में 15 से 19 वर्ष की लड़कियों में से 4.5 फीसदी यौन उत्पीड़न की शिकार  

यूनीसेफ के मुताबिक भारत में बाल यौन उत्पीड़न तेजी से फैल रहा है और भारत में बच्चों की शारीरिक व मानसिक सेहत पर इसके गंभीर परिणाम दिखाई पड़ सकते हैं। देश में 15 से 19 वर्ष की लड़कियों में से 4.5 फीसदी से ज्यादा यौन उत्पीड़न की शिकार हैं और इससे थोड़ी कम संख्या में लड़के भी यौन हिंसा के शिकार हैं।

भारत में तेजी से बढ़ रही बाल मजदूरी

भारतीय जनगणना 2011 के मुताबिक भारत में पांच से 14 वर्ष की उम्र में काम करने वाले बच्चों की संख्या 43 लाख से ज़्यादा है। अंतरराष्ट्रीय मजदूर संघ की फरवरी 2015 की रिपोर्ट कहती है कि भारत में पांच से 17 साल की उम्र के 57 लाख बच्चे ऐसे हैं,जो बाल मज़दूर के तौर पर काम करते हैं और सात से 14 वर्ष की उम्र के 54 फीसदी बच्चे ऐसे हैं जो बिना पैसों के काम करने पर मजबूर हैं।

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top