बाराबंकी के 210 गाँव फिलहाल नहीं बनेंगे लखनऊ का हिस्सा

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लखनऊ। बाराबंकी के 210 गाँव लखनऊ विकास प्राधिकरण की सीमा में शामिल करने का प्रस्ताव फिलहाल ठंडे बस्ते में है। इस सरकार में ये होना पाना संभव नहीं है, जिससे लखनऊ की सीमा पर हो रहे अव्यवस्थित विकास पर रोक लगने की संभावना खत्म होती नज़र आ रही है। शासन स्तर पर इस प्रस्ताव को हरी झंडी न देने का फैसला किया गया है। इस वजह से बाराबंकी के लोगों के बीच ज़रूर निराशा है।

जुलाई-2014 में इस आशय का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। जिसमें बाराबंकी की नवाबगंज तहसील के 186 फतेहपुर तहसील के 24 गाँवों को लखनऊ की सीमा में शामिल किया जाना था। जिसके जरिये राजधानी का विकास राज्य राजधानी क्षेत्र के तौर पर होना था। मगर अब तक ये नहीं किया जा सका। इस संबंध में प्रस्ताव प्राधिकरण ने आवास और शहरी नियोजन विभाग को भेजा था। मगर अब तक इस बारे में कोई भी जवाब नहीं आया है। अब प्राधिकरण के अफसरों का कहना है कि फिलहाल इस सरकार में तो बाराबंकी के ये गाँव लखनऊ में नहीं शामिल किये जा सकेंगे। जबकि दो साल की लंबी कवायद चलती रही। नतीजा सिफर ही रहा।

बिगड़ रहा बाराबंकी-लखनऊ सीमा का स्वरूप

बाराबंकी और लखनऊ की सीमा का स्वरूप लगातार बिगड़ता जा रहा है। दरअसल लखनऊ के सबसे पॉश इलाके गोमती नगर से बाराबंकी की दूरी 10 किलोमीटर के लगभग है। ऐसे में शहर और गाँव के बीच की सीमा का स्वरूप लगातार ख़राब होता जा रहा है। गाँवों में अनियोजित विकास हो रहा है। खेतों की जगह भूखंड बन रहे हैं। जिनको बाराबंकी प्रशासन सुविधाएं नहीं दे पा रहा है। इसी वजह से बाराबंकी को लखनऊ में शामिल करने की कोशिशें शुरू कर दी गई थीं। मगर शासन की बेरुखी से अब तक इस प्रस्ताव को अमली जामा नहीं पहनाया जा सका है। जिससे लखनऊ का विस्तार और बाराबंकी का विकास रुकता जा रहा है।

रिपोर्टर - ऋषि मिश्र

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