बाराबंकीः मजीठा गाँव में लगती है जहरीले सर्पों की अदालत

बाराबंकीः मजीठा गाँव में लगती है जहरीले सर्पों की अदालतgaonconnection

बाराबंकी। बाराबंकी ज़िले के मंजीठा गाँव में महात्मा बुद्ध के जमाने का प्राचीन नाग देवता का मंदिर है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस मंदिर में सभी तरह के जहरीले सर्पों की अदालत लगती है और जो भी मन्नत यहां मांगी जाती है वो पूरी होती है। सवान के महीने में यहां हर वर्ष मेला लगता है। मंगलवार को मेले का उद्घाटन कैबिनेट मंत्री अरविन्द सिंह गोप ने फीता काटकर किया।

                                           

नवाबगंज तहसील जिला मुख्यालय से मात्र छह किलोमीटर दूर मंजीठा नाग देवता मंदिर है, जहां हर वर्ष सावन के महीनों में भव्य मेला लगता है और ये मेला मंगलवार से शुरू हो गया है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री अरविन्द सिंह गोप ने कहा ये प्राचीन नाग देवता का मंदिर है। हम सभी की आस्था इस मंदिर से जुड़ी है। उन्होंने नाग देव मंदिर में दूध और चावल भी चढ़ाया और मन्नत भी मांगी। मंदिर में श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगना शुरू हो गया है। 

नाग देवता के दर्शन के लिए न सिर्फ बाराबंकी जिला बल्कि अन्य प्रदेशों के जिलों से लोग यहां आते हैं। ख़ासकर सावन के महीने में यहां हमेशा भीड़ लगी रहती है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां सांपों से परेशान व्यक्ति को सांपों से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही कई तरह के रोग भी मंदिर में मन्नत मांगने से ठीक हो जाते हैं।

                                             

मंदिर के पुजारी रामदास बताते हैं, “अगर आपको सर्प से डर लगता है तो आपको एक बार सावन के महीने में या नाग पंचमी के दिन बाराबंकी मुख्यालय से मात्र पांच किलोमीटर दूर मंजीठा नाग देवता मंदिर आना होगा, जहां आपकी परेशानी दूर हो जाएगी। इसके बावजूद आप अगर किसी बीमारी से परेशान हैं तो आपको यहां मिट्टी की बनी छोटी-छोटी मठिया चढ़ानी होगी।” मंदिर में मिट्टी से बनी मठिया चढ़ाने आयी मायादेवी चौरसिया कहती हैं, “मैं शरीर के कुछ हिस्सों में मसों से परेशान थी, लेकिन जब मैंने एक बार मंदिर दर्शन करने के बाद मनौती मानी तो मुराद पूरी हो गयी।”

 वैसे तो यहां वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन सावन के महीने में और पंचमी के दिन कुछ ख़ास महत्त्व होता है। यहां बुद्ध पूर्णिमा के दिन से ही भारी तादाद में भीड़ जुटती है, क्योंकि इन दिनों में यहां सभी प्रजातियों के सांप इकट्ठा होते हैं और सपेरों का हुजूम उमड़ता है। यहां के रहने वाले युवक सुधीर बताते हैं, “मेरे इस गाँव में पूरा बचपन बीता है। यहां कई तरह के साँप देखने को मिलते हैं। यहां इंसानों और सांपों के बीच अटूट रिश्ता है।

रिपोर्टर - सतीश कुमार कश्यप

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