गांव में खुले में शौच करते दिखाई पड़ने पर बजने लगता है ढोल

गांव में खुले में शौच करते दिखाई पड़ने पर बजने लगता है ढोलप्रतीकात्मक फोटो

लखनऊ। खुले में शौच करने से रोकने पर जागरूकता फैलाने के लिए देश में जगह-जगह अभियान चल रहा है। लोग सीटी बजाने, ढोल बजाने, रैली निकालने जैसे नायाब तरीके अपनाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला एमपी के बैतूल का है। जहां एक गांव में अगर कोई भी खुले में शौच करते दिखा तो ढोल बजने लगता है। ढोल और कोई नहीं बल्कि प्रभातपट्टनम ब्लॉक के मासोद गांव के सरपंच भास्कर मगरदे और उनके सहयोगी मनोहर चौहान की टोली बजाती है। टोली ही लोगों को जागरूक कर रही है।

गाँव में जैसे ही ढोल की थाप सुनाई पड़ती है लोग जान जाते हैं कि कोई खुले में शौच करते दिखा है। जो नहीं मानते, उन्हें समझाया जाता है। सरपंच मगरदे ने बताया कि 832 घरों वाले इस गांव की जनंसख्या लगभग तीन हजार 700 है। गांव में 250 परिवार शौचालय नहीं बनवा रहे थे।

ढोल बजाने के अभियान से एक हफ्ते में 42 लोगों के यहां शौचालय का काम शुरू हो गया। रोज सुबह और शाम को ढोल बजाया जाता है। शौचालय के लिए लोगों को जगह उपलब्ध कराने का भी निर्णय लिया गया है।

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