ज़िन्दगी जीने की ज़िद ने दिया चौथे स्टेज के कैंसर से लड़ने का जज़्बा

"जब मुझे कैंसर होने का पता चला तो शुरुआत में निराशा हुई, लेकिन फिर मैंने सोचा कि इस समय मेरे जैसी स्थिति में दूसरे लोगों की मदद करनी चाहिए; मैंने मरीजों से बातचीत करना शुरू किया, उनको सलाह दी कि डॉक्टर की बात सुने और उसका पालन करें; मैंने कई मंचों पर इस बारे में आवाज़ उठाई और प्रधानमंत्री को भी चिट्ठी लिखी"

Manvendra SinghManvendra Singh   7 Jun 2024 1:56 PM GMT

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मेज पर पड़ी मेडिकल रिपोर्ट को एक टक देखते रवि प्रकाश के लिए यकीन करना मुश्किल है कि उनकी तरह किसी और की ज़िन्दगी भी अब गिनती की ही बची है।

रवि को ये मेडिकल रिपोर्ट हैदराबाद से एक मरीज ने भेजी है, जिसे लंग कैंसर है।

रवि प्रकाश खुद लंग कैंसर से पीड़ित हैं; उनका कैंसर चौथे स्टेज का है, बावजूद इसके वो अब हर रोज अपने जैसे तामम कैंसर मरीजों को न सिर्फ जीने की हिम्मत देते हैं बल्कि बीमारी और इलाज से जुड़ी हर जानकारी साझा भी करते हैं। लंग कैंसर के मरीज अब रवि से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

पेशे से पत्रकार रवि प्रकाश झारखंड की राजधानी राँची में रहते हैं। वो गाँव कनेक्शन से बताते हैं, "पहली बार जब मुझे कैंसर का पता चला तो मैं बहुत हताश हो गया था; डॉक्टर ने मुझे बताया कि मुझे लंग कैंसर है, वो भी स्टेज फोर का, तो मेरी दुनिया ही उलट-पुलट हो गई; उस वक्त मैं अकेला था और ये ख़बर बहुत भारी थी, लेकिन समय के साथ मैंने इसको स्वीकार किया और इसके इलाज के बारे में समझना शुरू किया।"


विश्व स्वास्थ्य संगठन के हिसाब से साल 2020 में लंग कैंसर से मरने वालों की संख्या सबसे अधिक 1.80 मिलियन थी। इस जानलेवा बीमारी की ख़बर से ही लोगों में डर बैठ जाता है। लेकिन रवि प्रकाश हैं जो इस बीमारी का न सिर्फ डट कर सामना कर रहे हैं बल्कि अपने जैसे कई लोगों की आवाज़ को दुनिया तक पहुँचा रहे हैं। रवि प्रकाश को हाल ही में लंग कैंसर के क्षेत्र में इस बीमारी के मरीजों की प्रखर आवाज़ बनने के लिए इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ लंग कैंसर की तरफ से पेशेंट एडवोकेट एजुकेशनल अवार्ड से नवाज़ा गया।

रवि आगे बताते हैं, "मेरे लक्षण बहुत मामूली थे, सिर्फ हल्की खांसी थी जो ठीक नहीं हो रही थी, जब मैंने पल्मोनोलॉजिस्ट को दिखाया तो एक्स-रे में चेस्ट में पानी दिखा, जिसे प्लूरल इफ्यूजन कहते हैं; पानी निकालने के बाद भी कैंसर की पुष्टि नहीं हो पाई, फिर सीटी स्कैन और बायोप्सी के जरिए कैंसर का पता चला।"

"जब बीमारी का पता चला तो शुरुआत में मुझे भी निराशा महसूस हुई, लेकिन फिर मैंने सोचा कि इस समय मेरे जैसी स्थिति में दूसरे लोगों की मदद करनी चाहिए; मैंने मरीजों से बातचीत करना शुरू किया, उनको सलाह दी कि डॉक्टर की बात सुने और उसका पालन करें; मैंने कई मंचों पर जाकर इस बारे में आवाज़ उठाई और प्रधानमंत्री को भी चिट्ठी लिखी, "रवि प्रकाश ने आगे कहा।

2020 में भारत में कैंसर मरीजों की संख्या जहाँ 13.9 लाख थी, वहीं साल 2025 तक यह आंकड़ा 15.7 लाख पहुँच सकता है, यानी सिर्फ पाँच सालों में 13 प्रतिशत की वृद्धि। भारत में न सिर्फ कैंसर के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं, बल्कि कैंसर के मरीजों की औसतन आयु भी कम हो रही है।


रवि प्रकाश की कैंसर के खिलाफ संघर्ष की यह कहानी साहस की मिसाल है। लंग कैंसर जैसी बीमारी में जहाँ अधिकतर लोग निराश और हताश हो जाते हैं, ऐसे में रवि प्रकाश कई कैंसर पेशेंट की आवाज़ भी बने हैं।

रवि प्रकाश एक गैर सरकारी संगठन भी चलाते हैं लंग कनेक्ट इंडिया, जिसके माध्यम से वह देश भर में लंग कैंसर के बारे में लोगों को जागरूक करते हैं ।

वो गाँव कनेक्शन से बताते हैं, " मेरे लंग कनेक्ट इंडिया फाउंडेशन का मकसद लंग कैंसर के मरीजों को सपोर्ट देना है; कोविड के दौरान जब यात्रा संभव नहीं थी, तब वर्चुअल माध्यम से हमने मीटिंग की और लोगों को जागरूक किया, अब तक हम 100 से ज़्यादा मीटिंग कर चुके हैं और हज़ारों मरीजों को जोड़ चुके हैं।"

वैसे तो कैंसर शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है, लेकिन भारत की महिलाओं में ब्रेस्ट, सर्विक्स और ओवरी कैंसर सबसे प्रमुख हैं। वहीं पुरुषों में फेफड़ों, मुँह और प्रोस्टेट कैंसर सबसे प्रमुख है।

वो आगे कहते हैं, "भारत में कैंसर के इलाज को लेकर कई चुनौतियाँ हैं; लोगों में जागरूकता की कमी है, अच्छे अस्पताल और उपकरणों की कमी है, जिससे कैंसर के इलाज में देरी होती है; सरकार को जागरूकता बढ़ाने और स्क्रीनिंग कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की ज़रूरत है ताकि बीमारी को समय पर पकड़ा जा सके।"

#Cancer 

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