यह खबर आपको मच्छरों और उनसे होने वाली बीमारियों से बचा सकती है

कौन सा मच्छर कब काटता है और उनसे क्या बीमारी होती है? इसके बारे में बता रही हैं किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी की माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ अमिता जैन...

Deepanshu MishraDeepanshu Mishra   20 Aug 2019 7:15 AM GMT

यह खबर आपको मच्छरों और उनसे होने वाली बीमारियों से बचा सकती हैसाभार: इंटरनेट

डेंगू, मलेरिका, जीका, समेत कई बीमारियां हैं जो मच्छर के काटने से होती हैं। कौन से मच्छर से काटने से कौन सी बीमारी होती है? कौन सा मच्छर कब काटता है? इसके बारे में जानकारी दे रही हैं किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी की माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ अमिता जैन।

डॉ अमिता बताती हैं, "जीका वायरस के बारे में हमें वर्ष 1950-55 के आस-पास पता चला, जब दुनिया को पता चला कि जीका वायरस क्या है। पहली बार यह ब्राजील के जंगलों में कुछ जानवरों में देखने को मिला था। उसके बाद मनुष्यों में भी इसका इन्फेक्शन देखने को मिला। यह तब तेजी से सभी के नजरों में आया जब ब्राजील के फुटबाल मैच में आई गर्भवती महिलाओं के बच्चों का दिमाग विकसित नहीं हुआ। उस समय के बाद इसपर चिंता हुई और हमारे देश में भी लोग इसपर सोचने लगे। जी"

मच्छर कैसे फैलाते हैं बीमारी

"मच्छर कुछ बीमारियों को फैलाते हैं। मच्छर बीमारी नहीं फैलाते हैं बल्कि मच्छर के काटने पर हमारे अन्दर कुछ ऐसे परिजीवी डाल देते हैं, जिनकी वजह से बीमारी होती है। मलेरिया में मच्छर मलेरिया का कीटाणु मनुष्य में फैलाते हैं और जिसे मलेरिया हो गया है उसे फिर से काट के दूसरे व्यक्ति को फैला देते हैं। ऐसे जन्तुओ को हम वेक्टर कहते हैं ये खुद से कोई बीमारी नहीं करते हैं लेकिन बीमारी को इधर से उधर फैलाने का काम करते हैं। मलेरिया किसी को ऐसे नहीं फैलता है बल्कि मच्छर पहले मलेरिया का कीटाणु एक व्यक्ति में डालता है फिर उससे निकालकर दुसरे व्यक्ति में डालता है तब यह बीमारी फैलती है। इसलिए मच्छर से सावधान जरुर रहना चाहिए क्योंकि वह बीमारी को इधर से उधर फैलाते हैं।" डॉ अमिता ने बताया।

मच्छर काटता नहीं है

मनुष्य का खून मादा मच्छर चूसती है क्योंकि मादा मच्छर को अंडे देने के लिए बहुत ज्यादा एनर्जी की जरुरत होती है। वह सिर्फ इंसानों का ही नहीं बल्कि कुछ जानवरों का भी खून चूसते हैं। मादा मच्छर को खून की आवश्यकता होती है। नर मच्छर रक्त नहीं चूसते हैं तो वह पेड़ पौधों के रस से अपना काम चला लेते हैं।

कौन से मच्छर दिन में काटते हैं और कौन से रात में

डॉ. अमिता जैन डॉ. अमिता जैन

डॉ अमिता बताती हैं, "कुछ मच्छर दिन में काटते हैं। जो मच्छर दिन में काटते हैं वो एडीज मच्छर होते हैं। यह मच्छर सुबह भोर के समय, सूर्यास्त के समय, जब हल्का धुंधलापण रहता है तब काटता है। यह मच्छर दिन में काटता है इसलिए लोगों को यह बताया जाता है कि फुल आस्तीन के कपड़े पहने, जिससे मच्छर आपको न काट पाए क्योंकि दिन में आप मच्छर दानी लगाकर तो सोयेंगें नहीं। इस मच्छर के काटने से डेंगू जैसी बीमारियां फैलती हैं। कुछ मच्छर शाम होने के बाद यानि की अँधेरा होने पर काटते हैं जैसे क्युलेक्स, एनाफिलीज। यह मच्छर मलेरिया, जापानी इन्सेफेलाइटिस जैसी बीमारियाँ होती हैं। दिन हो या रात आपको मच्छरों से बचना आवश्यक है।"

मच्छर से होने वाली बीमारियां

मच्छरों से होने वाली बीमारियों में मलेरिया, फाइलेरिया, डेंगू, जापानी इन्सेफेलाइटिस, जीका वायरस, चिकनगुनिया ये प्रमुख बीमारियां हैं इसके अलावा बहुत सारी बीमारियां होती हैं।

मलेरिया

मलेरिया एक ऐसा रोग है जो मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से होता है। यह मच्छर गंदे और दूषित पानी में पनपते हैं जो उड़कर हम तक पहुंचते हैं। डेंगू के मच्छर का काटने का समय जहां सूर्यास्त से पहले होता है वहीं, मलेरिया फैलाने वाले मच्छर सूर्यास्त के बाद काटते हैं।

फाइलेरिया

फाइलेरिया (हाथीपाँव) रोग कृमियों द्वारा होता है। यह रोग प्रमुख रूप से मच्छरों की क्यूलेक्स प्रजाति द्वारा फैलाया जाता है। माइक्रोफाइलेरिया के रूप में कृमि मनुष्य के रक्त में घूमता रहता है। जब मच्छर खून चूसता है तो यह मच्छर में पहुँच जाता है। फिर यही मच्छर मनुष्यों में रोग पहुँचाता है।

डेंगू

डेंगू बुखार 'डेन वायरस' के कारण होता है। एक बार शरीर में वायरस जाने के बाद डेंगू के बुखार के लक्षण आमतौर पर 5 से 6 दिन के भीतर दिखाई देने लगते हैं। डेंगू बुखार का वायरस एड़ीज नामक मादा मच्छर के काटने से होता है। वह मच्छर दिन के समय में काटता है।

जापानी इन्सेफेलाइटिस

सुअर इस बीमारी का मुख्य वाहक होते हैं। सूअर के ही शरीर में इस बीमारी के वायरस पनपते और फलते-फूलते हैं, और फिर मच्छरों द्वारा यह वायरस सुअर से मानव शरीर में पहुंच जाता है। चावल के खेतों में पनपने वाले मच्छर जापानी इन्सेफेलाइटिस वायरस से संक्रमित होते हैं। यह वायरस दरअसल सेंट लुई एलसिफेसिटिस वायरस एंटीजनीक्ली से संबंधित एक फ्लेविवायरस है। जापानी एनसेफेलिटिस के वायरस का संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं होता है। यह संक्रमित व्यक्ति के छूने आदि से नहीं फैलता। केवल पालतू सूअर और जंगली पक्षी ही जापानी एनसेफेलिटिस वायरस को फैला सकते हैं।

जीका वायरस

जीका आरएनए वायरस से संबंधित है। यह वायरस डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की ही तरह मच्छरों से फैलता है। यह एक प्रकार का एडीज मच्छर ही है, जो दिन में सक्रिय रहते हैं। ब्ल्यूएचओ के अनुसार अगर किसी व्यक्ति को इस वायरस से संक्रमित मच्छर काट लेता है तो उस व्यक्ति में इसके वायरस आते हैं। इस तरह से यह वायरस एक जगह से दूसरी जगह फैल जाता है। मच्छरों के अलावा असुरक्षित शारीरिक संबंध और संक्रमित खून से भी जीका बुखार या वायरस फैलता है।

चिकनगुनिया

चिकनगुनिया एक संक्रमित व्याक्ति को एडिस मच्छबर के काटने के बाद स्वुस्थय व्यजक्ति को काटने से फैलता है। यह रोग सीधे मनुष्यन से मनुष्यव में नहीं फैलता है। यानी यह कोई संक्रामक रोग नहीं है। चिकनगुनिया से पीडित गर्भवती महिला को अपने बच्चेय को रोग देने का जोखिम होता है।

मच्छर से कैसे बचा जाए

डॉ अमिता बताती हैं, "मच्छरों से बचने के लिए कुछ प्रोडक्ट हेल्प कर सकते हैं लेकिन प्रोडक्ट्स में महंगे भी हैं, कुछ लोगों को जानकारी नहीं है, कुछ लोग ठीक से उसको प्रयोग करना नहीं जानते हैं और 100% सुरक्षा कोई प्रोडक्ट नहीं दे सकता है। हर कोई यह प्रोडक्ट नहीं खरीद सकता है इसलिए मच्छर से बचने के लिए पूरी बांह के कपड़े पहने दिन-रात दोनों समय, पूरा शरीर ढक कर रखें। जहाँ आप रहते हैं, सोते हैं, काम करते हैं वहां पर पानी का जमाव न होने दें। मच्छर पानी में ही पनपते हैं, कुछ साफ़ पानी में और कुछ गंदे पानी में। कुछ मच्छर बहुत कम पानी में पनपते हैं (ओस की बूंद के बराबर पानी में) और कुछ मच्छर बहुत अधिक पानी में पनपते हैं। पानी के जहां जमाव होता है वहां पर मिट्टी का तेल डाल दें, जिससे मच्छर का लार्वा पनप पायेगा।"

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