बच्चों को किताबों के साथ मिलेंगे मुफ्त बस्ते

बच्चों को किताबों के साथ मिलेंगे मुफ्त बस्तेgaonconnection, बच्चों को किताबों के साथ मिलेंगे मुफ्त बस्ते

लखनऊ। प्रदेश के लगभग 1.98 लाख प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 1.96 करोड़ बच्चों के पास अब एक जैसे नये बस्ते होंगे। किसी को पॉलीथिन तो किसी को थैले में लपेटकर किताबें नहीं लानी होंगी। एक जैसी यूनीफार्म, किताबें और एक जैसे बस्ते बच्चों के पास होने से उनमें एकरूपता आयेगी। बच्चों को विश्वास है कि जब किताबें मिलेंगी तो बस्ता भी मिल ही जायेगा।

गौरतलब है कि कुछ समय पूर्व बेसिक शिक्षा मंत्री अहमद हसन ने बच्चों को इस सत्र में मुफ्त बस्ते देने की बात कही थी और बेसिक शिक्षा विभाग को इसके लिए निर्देशित भी किया था। बस्तों के लिए  50 करोड़ का बजट भी तय किया जा चुका है। एक बस्ते पर लगभग 25 रुपये की लागत तय की गयी है।

विभाग अब इस बारे में विचार कर रहा है कि बच्चों तक बस्तों को किस तरह से पहुंचाया जायें। या तो सरकार खुद ही केन्द्रीय स्तर पर इसको खरीद कर बच्चों को बस्ते उपलब्ध करवाये या फिर पहले की तरह प्रबंध समितियों के खाते में इसकी धनराशि उपलब्ध करवाये। हालांकि सत्र शुरू होने के बाद गर्मियों की छुट्टियां भी हो गयी हैं तो उधर किताबों की छपाई भी बाकी है। उम्मीद है कि जुलाई में स्कूल खुलने पर किताबें और बस्ते एक साथ ही बच्चों को मिल सकेंगे।

हालांकि यह सवाल अभी भी बरकरार है कि क्या जुलाई महीने से भी बच्चों को किताबें और बस्ते मिल सकेंगे या नहीं। क्योंकि किताबों की छपाई अभी तक शुरू नहीं हो सकी है और बस्ते के बारे में कोई अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। इस बारे में बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण मणि त्रिपाठी का कहना है, “यह सब शासन स्तर की बात है इसलिए मैं इस बारे में कुछ कह नहीं सकता।” तो वहीं दूसरी ओर बेसिक शिक्षा निदेशक दिनेश बाबू शर्मा ने फोन नहीं उठाया।  सर्व शिक्षा अभियान के तहत कक्षा 1 से 8 तक के परिषदीय स्कूलों में बच्चों को मुफ्त मिड-डे-मील, यूनीफार्म, किताबें मिलती हैं, जिनमें एक बार फिर से मुफ्त बस्ते देने का प्राविधान भी किया गया है।  

पहले भी बच्चों को दिए जाते थे बस्ते

ऐसा नहीं है कि शिक्षा विभाग द्वारा बच्चों को पहली बार मुफ्त बस्ते वितरित किये जायेंगे। पहले भी बच्चों को किताबों के साथ बस्ते वितरित किये जाते थे। इनके लिए विद्यालय प्रबंध समितियों के कोष में इसका धनराशि जमा कर दी जाती थी और स्कूल अपने स्तर पर बच्चों को बस्ते उपलब्ध करवाता था। लेकिन पिछले लगभग तीन-चार वर्षों से बच्चों को बस्ते नहीं दिये जा रहे थे। इस बार फिर से बस्तों के मिलने की जानकारी से बच्चे बेहद खुश हैं तो वहीं इंतजार में भी हैं। 

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top