बढ़ती कीमतों को देख बढ़ रहा प्याज का रकबा

Swati ShuklaSwati Shukla   23 Dec 2015 5:30 AM GMT

बढ़ती कीमतों को देख बढ़ रहा प्याज का रकबागाँव कनेक्शन

बेलहरा (बाराबंकी)। प्याज के बढ़ते भाव को देखते हुए बाराबंकी जि़ले में इस बार किसानों ने प्याज का रकबा बढ़ा दिया है। इस बार प्याज की बुवाई 350 एकड़ से बड़कर 1,200 एकड़ में होने का अनुमान है।

बेलहरा के किसान सुर्री (55 वर्ष) कहते है, "पहले हम प्याज की खेती सिर्फ एक बीघे में करते थे लेकिन प्याज की बढ़ती कीमत को देखते हुए अब की बार हम एक एकड़ में प्याज की खेती करने जा रहे हैं। एक-एकड़ प्याज की खेती में लगभग 25 से 30 हजार रुपए तक की लागत आती है।" सुर्री आगे बताते हैं, "एक एकड़ में प्याज का उत्पादन लगभग 100 कुन्तल होने का अनुमान है।" 

प्याज भारत से कई देशों में निर्यात होता है। उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के आकड़ो के अनुसार उत्तर प्रदेश में 3.24 लाख टन का उत्पादन किया जाता है। इस बार बाराबंकी में प्याज की खेती का दायरा काफी बढ़ा है।

बाराबंकी जि़ला मुख्यालय से 38 किमी दूर कस्बा बेलहरा, सौरंगा, नेतपुरवा व पास-पड़ोस के गाँवों में लगभग 25 एकड़ में रबी की फसल में प्याज की बुवाई की जाती है। क्षेत्र में सह-फसली उत्पादों की खेती की तरफ किसानों का लगातार रूझान बढ़ गया है। जिला उद्यान विभाग के अधिकारी के अनुसार उद्यान विभाग के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि बाराबंकी में अभी तक करीब 350 एकड़ में प्याज की खेती होती रही है। पर इस बार जि़ले में करीब 1,200 हेक्टेयर में प्याज की खेती होने जा रही है। औसत उपज 120 से 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।

फतेहपुर ब्लॉक बेलहरा गाँव के दूसरे किसान सुशील कुमार मौर्या (35 वर्ष)बताते हैं, "प्याज की खेती तो हम हमेशा से करते आ रहे हैं लेकिन इस बार प्याज की खेती कुछ ज़्यादा करेंगे।" वे आगे बताते हैं, "हमने प्याज की नर्सरी की बुवाई 20 अक्टूबर को कर दी थी, जो लगभग 45 से 50 दिन में तैयार हो जाएगी है। 10 दिसम्बर के आस-पास प्याज की रोपाई करेंगे। यह फसल मार्च तक तैयार हो जाती है अगर फसल में रोग आदि न लगे तो 20 से 25 कुन्तल प्रति बीघा उत्पादन होने की सम्भवना होती है।" 

पौधशाला बनाने लगे किसान

प्याज की खेती के लिए किसानों ने पौधशाला तैयार करनी शुरू कर दी है। एक हेक्टेयर में प्याज लगाने के लिए एक हजार से बारह सौ वर्ग मीटर ज़मीन में बीज की बोवाई की ज़रूरत होती है। गोबर की खाद डालने के बाद उगे हुए खरपतवार को निकालकर बुवाई करें। क्यारियों की चौड़ाई एक मीटर तथा लंबाई पानी देने की सुविधानुसार रखी जा सकती है। वैसे तीन से चार मीटर लंबी क्यारियां उपयुक्त होती हैं। इन क्यारियों में पांच से आठ सेंटीमीटर के अंतर पर कतार बनाकर बुवाई करनी चाहिए। हजारे से बीज उगने तक समयानुसार पानी दें। यदि उठी क्यारियां नहीं बनती हो तो एक मीटर चौड़ी तथा तीन से चार मीटर लंबी क्यारियां बनाकर उनमें पर्याप्त मात्रा में गोबर की खाद डालकर सिंचाई करें। एक वर्गमीटर क्षेत्र में 10 ग्राम बीज डाला जाता है।

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