बदलते मौसम के साथ गाँवों में फैल रहा है चिकन पॉक्स

बदलते मौसम के साथ गाँवों में फैल रहा है चिकन पॉक्सgaoconnection

बेलहरा (बाराबंकी)। ज़िले के कई गाँवों में चिकन पॉक्स (छोटी माता) फैलने से सैकड़ों बच्चे इसकी चपेट में आ गए हैं। जानकारी के आभाव में लोग इसे खसरा का नाम दे रहे हैं, जबकि डॉक्टर का कहना है कि चिकन पॉक्स है।

बाराबंकी ज़िले के फतेहपुर ब्लॉक के बेलहरा, खाले टोला, डिघुआं, गौरा, जातापुर, सौरंगा जैसे करीब आधा दर्जन गाँवों के सौ से भी अधिक बच्चे चिकन पॉक्स के संक्रमण में आ गए हैं। पंद्रह दिनों में एक मरीज से सौ मरीज तक पहुंच गए हैं। खाले टोला गाँव के मुइनउद्दीन के तीन बच्चों, लवकुश कुमार के दो बच्चों को चिकन पॉक्स का संक्रमण हो गया है। इस बारे में मुइनउद्दीन बताते हैं, ‘‘सबसे पहले मेरे बड़ी बेटी के शरीर में दाने निकलने लगे थे, उसके बाद और लोगों को भी तेज बुखार के साथ शरीर में दाने निकलने लगे।’’

इस बारे में  बेलहरा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के प्रभारी डॉक्टर दीपक कुमार बताते हैं, ‘‘जब से हमें पता चला कि गाँव में चिकन पॉक्स फैल रहा हमने इलाज शुरू कर दिया।”

स्वास्थ्य हम लोगों ने कई गाँव में जाकर सर्वे भी किया अभी तक खाले टोला में 22 और सौरंगा गाँव में 17 संक्रमित मरीज मिले हैं। चिकन पॉक्स एक मरीज के संक्रमण से दूसरे में फैलता है।’’

वो आगे कहते हैं, ‘‘हमारे यहां हर दिन चिकन पॉक्स संक्रमित मरीज आ रहे हैं, आज भी नौ मरीज आए थे। अधिकतर 10-12 साल के बच्चों में ही चिकनपॉक्स की समस्या ज्यादा होती है लेकिन कई मामलों में ये इससे अधिक उम्र के लोगों को भी हो सकती है।’’

गर्मियों की शुरूआत से ही चिकनपॉक्स के वायरस ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं और एक मरीज से दूसरे मरीजों में संक्रमण होता है। ऐसे में इस समय ज्यादा सावधानी बरतना जरूरी है। इसके लिए डॉक्टर को दिखाना जरूरी होता है। चिकनपॉक्स में शरीर पर उभरे दाने यानी पानी वाली फुंसियां एंटीवायरल दवाओं और सावधानी बरतने से दो हफ्ते में ठीक होने लगती हैं। 

बेलहरा गाँव की कंचन (10) को भी संक्रमण हो गया है। कंचन बताती हैं, ''पांच-छह दिन से शरीर में दाने निकलने लगे, बुखार भी आ रहा है। पास ही डॉक्टर को दिखाने गयी तो उन्होंने दवा दी और कहा कि नीम के पत्ती को पानी में उबालकर उससे नहाने से ठीक हो जाएगा।''

लक्षण

=चिकन पॉक्स में बुखार आता है और त्वचा पर गुलाबी रंग के दाने विकसित हो जाते हैं।

=त्वचा पर गुलाबी रंग के दाने मुख्यतः शरीर के मध्य भाग में, सिर, गर्दन, पेट, पीठ छाती आदि  पर दिखाई देते हैं।

=ये दाने एक जैसे नहीं दिखाई देते हैं। कुछ दाने बड़े और कुछ दाने छोटे विकसित होते हैं।

उपचार

=रोगी को अन्य लोगों से अलग रखना चाहिये।

=रोग के फैलने से बचाव हेतु बच्चों को विद्यालय व बाल पालना गृह से दूर रखना चाहिये।

=रोगी को छींकते तथा खाँसते समय नाक तथा मुँह पर कपड़ा रखना चाहिये। साथ ही ऐसे पीिड़त के साफ-सुथरे कपड़े और बर्तन में खाना देना चािहए।

रिपोर्टर - दिवेंद्र सिंह

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