बगैर कारण के थाना प्रभारियों को हटाया तो होगी कड़ी कार्रवाई: डीजीपी

बगैर कारण के थाना प्रभारियों को हटाया तो होगी कड़ी कार्रवाई: डीजीपीगाँव कनेक्शन

लखनऊ। पुलिस महकमे के महानिरीक्षकों, उपनिरीक्षकों समेत थानाध्यक्षों की नियुक्ति और जनपदीय तैनाती के लिए उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ने निर्देश जारी कर दिए हैं। 

डीजीपी जावीद अहमद ने निर्देश देते हुए कहा कि अक्सर यह देखने में आया है कि कई जनपद प्रभारियों द्वारा बिना पर्याप्त कारण के थाना प्रभारियों को हटा दिया जाता है, जो उचित नहीं है। अगर ठोस कारण बिना थाना प्रभारियों को बार-बार हटाया जाता है, तो इस संबंध में संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध प्रतिकूल रुख अपनाया जायेगा।

थानाध्यक्ष पद पर तैनाती के लिए निरीक्षकों-उपनिरीक्षकों की अर्हता और मापदण्ड 

  1. ऐसे उपनिरीक्षक, जिन्होंने व्यवहारिक प्रशिक्षण को छोड़कर तीन वर्ष की सेवा अवधि पूर्ण कर ली हों, थानाध्यक्ष पद पर तैनाती हेतु योग्य होंगे।
  2. निरीक्षक तथा उपनिरीक्षक की थानाध्यक्ष पद पर तैनाती की आयु सीमा 58 वर्ष निर्धारित की जाती है। इससे अधिक आयु के निरीक्षकों या उपनिरीक्षकों को थानाध्यक्ष पद पर तैनात नहीं किया जायेगा।
  3. पिछले पांच वर्षों में उनका सत्यनिष्ठा प्रमाण पत्र रोका न गया हो।            
  4. पिछले तीन वर्षों में गम्भीर प्रकृति के दण्ड या प्रतिकूल प्रविष्टि न प्रदान किए गए हों। 

प्रभारी निरीक्षक-थानाध्यक्ष के पद पर तैनाती की प्रक्रिया

  1. जनपद प्रभारी उपरोक्त अर्हताएं पूर्ण करने वाले समस्त उपनिरीक्षक-निरीक्षक की अलग-अलग सूची उनके सेवा विवरण के साथ वरिष्ठताक्रम में अपनी संस्तुति सहित पुलिस उपमहानिरीक्षक परिक्षेत्र को प्रेषित करेंगे। परिक्षेत्रीय पुलिस उपमहानिरीक्षक अपने स्तर पर इस सूची की समीक्षा करके आवश्यकतानुसार संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक-पुलिस अधीक्षक से विचार विमर्श के उपरान्त वरिष्ठता के क्रम में थानाध्यक्ष पद पर नियुक्ति हेतु उपनिरीक्षकों-निरीक्षकों की सूची का अनुमोदन करेंगे। इसी अनुमोदित सूची के उपनिरीक्षकों-निरीक्षकों की सूची में से थानाध्यक्ष पद पर तैनाती उनकी वरिष्ठता एवं उपयुक्ता के आधार पर की जायेगी।
  2. अनुमोदित होने के पश्चात यदि कोई निरीक्षक-उपनिरीक्षक प्रतिकूल परिनिन्दा प्रविष्टि अथवा प्रतिकूल वार्षिक मन्तव्य प्राप्त करता है तो उसकी सूचना संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक-पुलिस अधीक्षक द्वारा तत्काल परिक्षेत्रीय पुलिस उपमहानिरीक्षक को दी जायेगी तथा संबंधित निरीक्षक-उपनिरीक्षक को थानाध्यक्ष की अनुमोदित सूची से हटाने की कार्यवाही पुलिस उपमहानिरीक्षक द्वारा की जायेगी । 
  3. यदि किन्हीं अन्य कारणों से कोई निरीक्षक-उपनिरीक्षक थानाध्यक्ष पद से हटाया जाता है तो कम से कम अगले तीन माह तक उसे पुन: थानाध्यक्ष पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकेगा। यदि थानाध्यक्ष या प्रभारी निरीक्षक के पद से हटाये गये कर्मी को पुन: किन्ही कारणों से तीनमाह के पहले नियुक्त करना आवश्यक पाया जाता हैए तो उसकी नियुक्ति के संबंध में समस्त कारणों से परिक्षेत्रीय पुलिस उपमहानिरीक्षक को लिखित में अवगत कराते हुये उनका पूर्व अनुमोदन प्राप्त किया जायेगा।
  4. परिक्षेत्रीय स्तर पर प्रत्येक वर्ष के माह जनवरी एवं माह जुलाई में इस सूची की समीक्षा की जायेगी। परिक्षेत्र के अन्दर स्थानान्तरित होने वाले अनुमोदित निरीक्षकों-उपनिरीक्षकों के पुन: अनुमोदन की सामान्य तौर पर कोई आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि उनके सेवा अभिलेखों की समीक्षा परिक्षेत्रीय पुलिस उपमहानिरीक्षकों द्वारा पहले की जा चुकी होगी।
  5. जब भी कोई थानाध्यक्ष प्रत्यावर्तित किया जायेगा तो प्रत्यावर्तन के कारणों सहित पुलिस उपमहानिरीक्षक परिक्षेत्र को जनपदीय वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक-पुलिस अधीक्षक द्वारा सूचना भेजी जायेगी। 
  6. अनुमोदित सूची में से जनपद में थानाध्यक्ष-प्रभारी निरीक्षक के पद पर नियुक्ति संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक-पुलिस अधीक्षक द्वारा वरिष्ठता एवं उपयुक्तता के क्रम में की जायेगी। यदि अनुमोदित सूची में से किसी कनिष्ठ कर्मी को थानाध्यक्ष-प्रभारी निरीक्षक के पद पर तैनात किया जाता है तो वरिष्ठ कर्मी की अनुपयुक्तता का कारण एवं कनिष्ठ कर्मी की उपयुक्तता के कारण से पुलिस उपमहानिरीक्षक परिक्षेत्र को अवगत कराया जायेगा।

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