भंडार बढ़ाने से कैसे सस्ती होंगी दालें?

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नई दिल्ली। दलहन की कीमत आज खुदरा बाजार में 200 रुपए किलो के करीब पहुंच गई। इसको देखते हुए सरकार ने दालों की खुदरा बिक्री 120 रुपए किलो पर करने के लिए इसके बफर स्टॉक की सीमा पांच गुना बढ़ाकर आठ लाख टन करने का फैसला किया है। 

हालांकि बफर स्टॉक के लिए अधिक दलहन की खरीद करने से कीमतों को कम करने में मदद मिलेगी या नहीं इस पर कुछ साफ नहीं है, क्योंकि कई राज्यों ने सस्ते दर पर खुदरा वितरण करने के लिए पहले से मौजूद दालों के भंडार से उठान करने में कोई रुचि नहीं दिखाई है। बफर स्टॉक बनाने का फैसला सरकार ने पिछले साल जून-जुलाई महीने के दौरान दालों के मूल्य 200 रुपए प्रति किलो पार कर जाने के बाद किया था। इसके लिए वर्तमान बजट में अतिरिक्त 900 करोड़ रुपए के मूल्य स्थिरीकरण कोष का भी निर्माण किया गया था। 

खाद्य मंत्रालय ने कल देर रात जारी एक विज्ञप्ति में कहा, "एक महत्वपूर्ण फैसले में सरकार ने बफर स्टॉक की सीमा को 1.5 लाख टन से बढ़ाकर आठ लाख टन करने का फैसला किया है।" वित्तमंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में कल यह फैसला किया गया, जो इस मंत्रालय द्वारा स्थापित किए गए अंतर मंत्रालयीय समिति की सिफारिशों के अनुरूप है। इस वर्ष दलहन का 1.5 लाख टन का बफर स्टॉक बनाने का सरकार का शुरुआति लक्ष्य था। अभी तक इस उद्देश्य के लिए 1.15 लाख टन दलहन की खरीद की गई है और इसे सस्ते दर पर खुदरा वितरण के लिए राज्यों को दिया जा रहा है।

दाल भंडार का इस्तेमाल

बफर स्टॉक का इस्तेमाल 120 रुपए प्रति किलो की सस्ती दर पर खुदरा वितरण करने के लिए राज्यों को दालें जारी करने के लिए किया जाना है। हालांकि केंद्र सरकार राज्यों को बगैर दरी दालों की बिक्री बफर स्टॉक से कर रही है और इनकी दरें 66 रुपए प्रति किलो ही हैं। राज्यों से अपेक्षा की गई है कि वे इसका प्रसंस्करण कर खुदरा बाजार में बेचें, लेकिन कई राज्यों ने इस प्रयास के प्रति कोई रुचि नहीं जताई है।

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