भट्ठे और मिलें खा रहीं पशुओं के हिस्से का चारा

भट्ठे और मिलें खा रहीं पशुओं के हिस्से का चारागाँव कनेक्शन

फतेहपुर/लखनऊ। बुंदेलखंड समेत सूखा प्रभावित जिलों में चारे का संकट खड़ा हो रहा है वहीं पशुओं के हिस्से का भूसा भट्ठे और पेपरमिल खा रही हैं। ईंट भट्ठों व पेपर मिलों में भूसे का बढ़ता इस्तेमाल पशुचारे का संकट बढ़ा रहा है। बाजार में भूसा 500-700 प्रति क्विंटल मिलता है तो वहीं भट्ठा और मिलों में 1000-1100 रुपए का रेट चल रहा है।

फतेहपुर जिले के कल्याणपुर थाना इलाके में 20 भट्ठे हैं और पूरे जिले में इनकी संख्या 100 के करीब है। इन भट्ठों पर भारी पैमाने पर भूसा जलाया जा रहा है। कल्याणपुर क्षेत्र के एक भट्ठे के मुनीम ने नाम न छपाने की शर्त पर बताया, “कोयला बहुत महंगा है लकड़ी भी पर्याप्त नहीं मिलती है इसलिए हम लोग गेहूं का भूसा और धान की भूसी को अच्छे दामों में खरीदते हैं।” भट्ठों पर सप्लाई बढ़ने से जिले में अभी पशुपालक भूसे के लिए भटकने लगे हैं,” बहुआ गाँव के राजेन्द्र पाल बताते हैं। हमारे दर्जनभर मवेशी हैं। इस बार भूसा ढूंढे नहीं मिल रहा है क्योंकि भट्ठे वाले किसानों को ज्यादा पैसे का लालच देकर भूसा खरीद रहे हैं। अब हमे जो मिल रहा है वो काफी महंगा है।”

देश में सबसे ज्यादा पशु आबादी वाले उत्तर प्रदेश में इस बार गेहूं की फसल अच्छी न होने से भूसे का उत्पादन गिरा है। कंबाइन के प्रयोग ने भी भूसे का उत्पादन गिराया है। इसके साथ ही सिंचाई के अभाव में हरे चारे का रकबा भी कम है। ऐसे में भट्टे और कागज मिलों में भूसे की खपत से समस्या बढ़ सकती है। इसके साथ ही शाहजहांपुर, बरेली, रामपुर, मुरादाबाद, फैजाबाद समेत उत्तराखंड की कई पेपर मिलों में सफेद पेपर बनाने के लिए भूसा यूपी से जाता है। शाहजहांपुर के पुवायां में यंत्र निर्माता और किसान जसमेल सिंह बताते हैं, “इस रास्ते से कम से कम 200 ट्रक भूसा रोज बाहर जाता है। नियम: भूसा दूसरे जिले में नहीं जाना चाहिए, अब जबकि भूसा कम हुआ तब भी खुलेआम मिलों में भेजा जा रहा है। प्राकृतिक आपदा, बारिश, हरे चारे के अभाव में पशु का यही आहार होता है। इस बार रेट बढ़ना तय है।” 

लखनऊ के भूसा कारोबारी रमेश तिवारी बताते हैं, “इस बार यहीं भूसे की काफी डिमांड है। पिछले साल मेरठ और फैजाबाद की पेपर मिलों को भूसा सप्लाई कर चुके हैं।” भट्ठा कर्मचारियों के मुताबिक वो लोग 40 फीसदी कोयला और बाकी जलावन में गेहूं का भूसा, धान की भूसी और लकड़ी का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि ज्यादातर भट्टा स्वामी ऐसे भूसे को खरीदते है, जो कंबाइन से कटा होता है और मोटा होता है।

रिपोर्टर - आशुतोष शुक्ला

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