बिहार की शराबबंदी में यूपी बाधक: नीतीश

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लखनऊ। शराबबंदी को लेकर देशभर में माहौल बना रहे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यूपी में भी पूर्ण शराबबंदी की न सिर्फ मांग की है बल्कि उन्होंने प्रदेश के आबकारी कानून में बदलाव कर सीमावर्ती जिलों में ठेके हटाए जाने की  बात भी कही। 

नीतीश कुमार ने यूपी सरकार पर शराबबंदी में बाधा पहुंचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “संविधान जो कहता है, उनके मुताबिक काम कर रहे हैं, उसमें बाधा न पहुंचायी जाए। शराब बंदी पर सीमावर्ती इलाकों में थोड़ी समस्या है। यूपी आबकारी एक्ट के मुताबिक, जिलों की सीमा पर पांच किमी. की दूरी पर शराब की दुकान नहीं रखने का प्रावधान है। जबकि राज्यों की सीमा पर तीन किमी. का प्रावधान है। प्रदेश सरकार इसे जिलों की सीमा में बदले। 

इस समस्या के निदान के लिए बिहार सरकार ने उत्तर प्रदेश और झारखंड के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है, लेकिन उत्तर प्रदेश से अब तक कोई जवाब नहीं मिला। बिहार के मुख्य सचिव ने भी यूपी सरकार को पत्र लिखा है, इसका भी कोई उत्तर नहीं मिला।बिहार की सीमा से सटे यूपी के शराब ठेके पांच गुना तक महंगे हो गए हैं। कुशीनगर-गोपालगंज सीमा पर अहिरोल के शराब के ठेका की बंदोबस्त दर पांच लाख रुपए थी। अब यह तीस लाख रुपए हो गई। 

पत्रकार की हत्या के दोषियों को बख्शेंगे नहीं : नीतीश      

लखनऊ। बिहार में एक दैनिक समाचार पत्र के पत्रकार की सरेआम गोली मारकर हत्या किये जाने के मामले में राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। नीतीश ने कहा, ‘‘बिहार में जो हो रहा है, वह दुखदायी है। मैं जनता को आश्वासन देता हूं कि जो भी दोषी होगा, बख्शा नहीं जाएगा।’’ वरिष्ठ पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या की निन्दा करते हुए उन्होंने कहा कि मामले की तेजी से जांच की जाएगी और बिहार पुलिस दोषी को बख्शेगी नहीं। पत्रकारों के स्थानीय संगठनों ने भी नीतीश से मुलाकात कर राजदेव के हत्यारों को सजा दिलाने संबंधी ज्ञापन सौंपे। 

साम्प्रदायिक ताकतों को मजबूत कर रहे नीतीश : सपा      

लखनऊ (भाषा)। उत्तर प्रदेश में सत्तारुढ़ समाजवादी पार्टी ने बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाईटेड के अध्यक्ष नीतीश कुमार की इस सूबे में बढ़ती गतिविधियों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि नीतीश प्रदेश की समाजवादी सरकार पर नकारात्मक टिप्पणी करके साम्प्रदायिक ताकतों को मजबूत कर रहे हैं।  सपा के प्रान्तीय प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा कि नीतीश जिस तरह उत्तर प्रदेश को लक्ष्य बनाकर यहां बार-बार आ रहे हैं, वह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन प्रदेश की सपा सरकार साम्प्रदायिक ताकतों के खिलाफ काम कर रही है। 

शराब कारोबारियों ने नीतीशको दिखाये काले झंडे      

लखनऊ। नीतीश कुमार को शराब कारोबारियों ने काले झंडे दिखाकर विरोध प्रकट किया। नीतीश राजधानी में शराबबंदी से जुड़े एक कार्यक्रम में शामिल होने आये थे। बिहार के बाद उत्तर प्रदेश में शराबबंदी का संदेश देने आये नीतीश सुबह हवाई अड्डे पहुंचे। एसोसिएशन के पदाधिकारी ने बताया कि नीतीश का काफिला जैसे ही निकला, आलमबाग के निकट लखनऊ शराब एसोसिएशन के कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ नारेबाजी की और काले झंडे दिखाये।  एसोसिएशन के महामंत्री कन्हैया लाल मौर्य के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने ज्ञानीजी के ढाबे के निकट नीतीश को काले झंडे दिखाये। 

आकर देखें बिहार की खुशहाली

बिहार के मुख्यमंत्री ने शराबबंदी के बाद बिहार में खुशहाली का दावा किया। नीतीश कुमार ने प्रदेश सरकार से कहा कि वह अपने आदमी भेजकर बिहार की खुशहाली देख सकते हैं। उन्होंने कहा, “प्रदेश सरकार सिर्फ लोहिया का नाम लेती है। उत्तर प्रदेश में लोहिया के आदर्शों पर काम नहीं हो रहा।”  

पीएम भी शराबबंदी के पक्षधर

शराबबंदी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पक्षधर हैं। गुजरात की स्थापना के साथ ही शराबबंदी है। नीतीश कुमार ने मोदी से भाजपा शासित राज्यों में शराब बंद कराने की अपील की। इसके साथ ही राजस्थान में पंचायतों में वोटिंग के जरिए शराबबंदी के अभियान की तारीफ की। नीतीश ने कहा, तमिलनाडु में सभी दलों ने शराबबंदी लागू करने की वकालत की है।” 

शराब है सामाजिक बुराई

नीतीश कुमार ने कहा, “शराब एक सामाजिक बुराई है। बिहार में शराबबंदी कर सामाजिक परिवर्तन की बुनियाद रख दी है। यूपी में भी शराबबंदी में कोई दिक्कत नहीं होगी। यूपी और बिहार के लोगों की मानसिकता में कोई अंतर नहीं है। 

जनता का मिला समर्थन

बिहार में शराबबंदी को लेकर जनता का बड़ा समर्थन मिला। 20 नवम्बर को बिहार के मुख्यमंत्री पद की दोबारा शपथ ली। 26 अप्रैल को मद्य निषेध का सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित कर प्रदेश में शराबबंदी लागू किए जाने का ऐलान किया। तय हुआ कि नीति बनाकर एक अप्रैल से गॉवों में शराबबंदी लागू की जायेगी। शहरों में विदेशी शराब की बिक्री जारी रहेगी। इसके लिए वातावरण बनाकर बाद में इसे भी बंद किया जाएगा। एक से दो अप्रैल तक शहर की स्थिति देखी, लेकिन महिलाओं बच्चों, युवाओं का शहर में भी शराबबंदी का समर्थन मिला था। इसके बाद पांच अप्रैल से पूरे राज्य में शराबबंदी कर दी गई। 1.19 करोड़ लोगों ने शराबबंदी के पक्ष में शपथ ली।

बनाया कड़ा कानून

बिहार में शराब के खिलाफ कड़ा कानून बनाया है। प्रदेश के आबकारी 1915 कानून में संशोधन किया गया है। नए कानून के तहत नाजायज शराब बनाने वाले और बेचने वाले पर मृत्युदंड का प्रावधान है। इसके अलावा शराब रखने और पीते पकड़े जाने वाले पर भी कड़ा कानून बनाया गया है। महिलाएं इस पर निगरानी करती है।  बच्चें, महिलाएं, युवा और पुरुष सभी खुश हैं।

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