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  • बेगूसराय में अभिनय की पाठशाला, जहां बच्चे सीखते हैं एक्टिंग

    शिवानंद गिरीकम्युनिटी जर्नलिस्टबेगूसराय (बिहार)। बेगूसराय जिला राजनीतिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक रुप से पहचाना जाता है। इसी जिले में एक नई बात शुरू हुई है। यहां छोटे-छोटे बच्चों को अभिनय सिखाया जाता है। इधर बिहार के रंगमंच फिजा में एक नाम का काफी चर्चा है वह है बेगूसराय का युवा कलाकार ऋषिकेश...

  • बांस भी बन सकता है कमाई का जरिया, बिहार की इस महिला से सीखिए

    समस्तीपुर (बिहार)। शादी करके जब किरन अपने ससुराल आयीं तो घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने पर बांस से सामान बनाना शुरू किया। आज न केवल खुद का घर चला रहीं हैं बल्कि दूसरी महिलाओं को भी काम सिखा रहीं हैं। बिहार के समस्तीपुर जिले की रहने वाली कुमारी किरन की पहचान बांस की कारीगरी से होती है, पूरे...

  • तस्वीरों में देखिये: बिहार के सरसब पाही गांव की धातु-कला

    मधुबनी: सरसब पाही गाँव में धातु कला का महत्त्व कई वर्षों से रहा है। यहाँ के सरौते, घंटियां, पूजा में इस्तेमाल होने वाले लोटे आदि बनारस, बिहार के अन्य जिले और नेपाल तक जाते हैं। जिज्ञासा मिश्रा की तस्वीरों में देखिये बिहार के सरसब पाही गांव की प्रसिद्ध धातु-कला बनाते हुए व्यक्ति को जिनमें मिटटी...

  • देश के लिए खेल चुका खिलाड़ी अब गाँव के युवाओं को सिखा रहा फुटबॉल

    कैमूर (बिहार)। एक छोटे से गाँव में रहने वाले 32 वर्षीय दीपक रावत पिछले पांच वर्षों से गाँव के उन युवा खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने में लगे हुए हैं, जिनके पास फुटबॉल खेलने के लिए गाँव में न तो कोई सुविधा है और न ही कोई संसाधन। दीपक बिहार राज्य के कैमूर जिले के देवहलिया गांव में रोजाना सुबह और...

  • गोदावरी दत्त: जिन्हें मिथिला कला की साधना के लिए मिला PadamShree सम्मान

    गोदावरी दत्त को मिथिला पेंटिंग में लगातार उत्कृष्ट काम के लिए १६ मार्च को भारत के राष्ट्रपति रामनाथ गोविंद ने पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया गया। रांटी (बिहार)। बिहार के मधुबनी जिले में शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा जो गोदावरी दत्त को न जानता हो। रांटी गाँव में पक्के घरों के बीच बिछी संकरी...

  • शाम की पाठशाला: अंगूठाछाप महिलाएं अब अंग्रेजी में बताती हैं नाम

    पूर्णिया (बिहार)। पूर्णिया के बैरगाछी में महादलित और दलित समुदाय की महिलाएं आजकल हर हाल में शाम तक चौका-बर्तन कर लेती हैं। क्योंकि शाम को उन्हें पाठशाला भी जाना होता है। वे महिलाएं जो बचपन में नहीं पढ़ सकीं, शाम की पाठशाला उन्हें साक्षर बना रहा है। नयी बहुएं हों या दादी, पाठशाला में हर उम्र की...

  • इस लाइब्रेरी में मिलेंगे आजादी के पहले से अब तक के सभी अखबार

    मुजफ्फरपुर (बिहार)। बिहार के मुजफ्फरपुर में एक ऐसी लाइब्रेरी है जहां आपको आजादी के पहले से अब तक के सभी अखबार मिल जाएंगे। फिर चाहे वो देश की आजादी के दिन वाला अखबार हो या बाबरी विध्वंस के दिन का। लेकिन 1857 की तिरहुत गदर क्रांति की यादों को समेटे ये लाइब्रेरी सरकार की उपेक्षा के कारण बदहाली की...

  • शुभ और मंगल की प्रतीक हैं बिहार की पारम्परिक लहठी

    मधुबनी। लहठी में रंग भरने के लिए जमुनी अपने हाथों से लाह के टुकड़ों को कोयले की धीमी आंच पर घुमा-घुमा कर पिघलाती हैं। आज तीस जोड़े बना कर तैयार करने हैं उसे। बिहार की रहने वाली सभी शादीशुदा महिलाओं के पहनावे में जो एक चीज़ सामान्य है वो है वहां की पारंपरिक लहठी। लहठी बिहार में बनने वाली लाह की...

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