बिहार : मशरूम की खेती ने दी पहचान , खुद लाखों कमाते हैं औरों को भी सिखाते हैं

बिहार : मशरूम की खेती ने दी पहचान , खुद लाखों कमाते हैं औरों को भी सिखाते हैंमशरुम की खेती में मिलता है लागत से दोगुना फायदा

अभिजीत कुमार

बिहार के मधुबनी जिले के किसानों को हर साल बाढ़ और सूखे से लाखों का नुकसान होता है। इन नुकसान को रोकने के लिए सुखराम चौरसिया (35) ने एक तरीका निकला जिससे वो खुद तो लाखों की कमाई कर ही रहे है साथ ही अपने इलाके के और किसानों के लिए एक रोल मॉडल बने हुए है।

सुखराम चौरसिया मधुबनी जिले से करीब 20 किमी. दूर रांटी गाँव में रहते है। सुखराम बताते हैं, "पहले हम पारम्परिक खेती (धान,गेंहू,मक्का) ही करते थे। सूखे और बाढ़ के वजह से हर बार नुकसान ही होता था, जितनी लागत लगाते थे उतना भी नहीं निकल पाता था। तब मैंने एक पत्रिका में मशरूम की खेती के बारे में पढ़ा और मशरूम की खेती शुरू की। आज कम जगह और कम पूंजी से अच्छी कमाई हो रही है।"

मशरूम की खेती की खूबी की चर्चा करते हुए चौरसिया कहते हैं कि इससे किसान लागत का दुगना फायदा महज चार महीने में आसानी से उठा लेते हैं। भारत में मशरूम उगाने का उपयुक्‍त समय अक्टूबर से मार्च के महीने है। इन छ: महीनो में दो फसलें उगाई जाती हैं।

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शुरू में आने वाली परेशानियों के बारे में चौरसिया ने बताया, "जब मैंने मशरूम की खेती शुरू की तब इलाके के लिए बहुत नई बात थी। उस वक्त अखबारों और पत्रिकाओं में इसकी चर्चा तो होती थी, लेकिन व्यवहारिक धरातल पर इस इलाके के किसानों के बीच इसे लेकर कोई खास उत्साह नहीं था। इससे भी बड़ी समस्या इसके बाजार को लेकर थी। स्थानीय बाजार में इसके खरीदार काफी कम थे। ऐसे में मैंने मशरूम को सुखाकर बाहर भेजना शुरू किया। धीरे-धीरे मुनाफा होने लगा। मेरे साथ ऐसे और लोग भी जुड़ने लगे।"

अब सुखराम सूखा और बाढ़ की मार झेलने वाले इस इलाके में पिछले सात वर्षों से मशरूम की खेती कर रहे हैं, साथ ही अपने आस-पास के किसानों को भी प्रशिक्षण दे रहे हैं। "अभी हम एक हजार वर्ग फीट से 30 से 35 हजार रूपए कमा रहे हैं। मेरे यहां से प्रशिक्षण लेकर सैकड़ों किसानों ने मशरूम की खेती शुरु कर दी है। कुछ किसान पूरी तरह मशरूम की खेती से जुड़ गए हैं और वे इससे लाखों की कमाई कर रहे हैं। मशरूम की खेती करके मेरी खुद की अलग पहचान बनी हुई है। दूर-दूर के लोग मुझे जानते हैं।" सुखराम ने बताया।

मशरूम की मौसमी खेती करने वाले किसान औसतन 30 से 35 हजार रुपए कमा लेते हैं।

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मशरूम की खेती में बेहतर संभावना

सुखराम बताते हैं, "पिछले सात सालों में बाजार में मशरूम की मांग काफी बढ़ गई है। स्थानीय बाजार के साथ बाहर के बाजारों में भी हर वक्त इसकी मांग बनी रहती है। मधुबनी जिला में करीब 100 किसान मशरूम की खेती कर रहे हैं। इनमें से अधिकतर किसान साल के सिर्फ तीन-चार माह ही इसकी खेती करते हैं, जबकि करीब 10 किसान ऐसे हैं जो साल भर मशरूम की खेती करते हैं।" सुखराम आगे बताते हैं, "मशरूम की मौसमी खेती करने वाले किसान औसतन 30 से 35 हजार रुपए कमा लेते हैं, जबकि पूरी तरह मशरूम की खेती से जुड़ चुके किसान इससे 1.5 लाख रुपए सालाना तक कमा रहे हैं। कुछ ऐसे किसान भी है, जिनकी आय 2 लाख से 3 लाख रुपए के बीच है।"

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