बिजली के मीटर है पर रीडिंग कोई नहीं लेता

बिजली के मीटर है पर रीडिंग कोई नहीं लेताgaonconnection

कानपुर देहात/हरदोई/बाराबंकी। प्रदेश के कई गाँवों में बिजली के मीटर तो लगा दिये गए हैं, लेकिन ये शोपीस बन चुके हैं। कई महीनों से इन गाँवों में मीटर रीडिंग ही नहीं हुई है। चाहे जितनी ज्यादा बिजली खर्च करो या बिल्कुल भी न खर्च करो, बिल उतना ही आना है।

राज्य सरकार ने वर्ष 2016-17 के बजट में 1,73,000 गाँवों तक बिजली पहुंचाने के लिए 11,900 करोड़ रुपए की योजना बनाई है। सरकार का दावा है कि पिछले वर्ष एक लाख गाँवों तथा मजरों तक बिजली पहुंचाई गई। कानपुर देहात जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर पूरब दिशा में बैरी दरियाव गाँव है। चार हजार आबादी वाले इस गाँव में बहुत कम घर ऐसे हैं जिनके घरों में मीटर लगे हों, बिल भी हर महीना नहीं आता है। तीन-चार महीने में 1300-1400 रुपए एक साथ ही आ जाता है।

बैरी दरियाव गाँव की रहने वाली मुन्नी देवी (50 वर्ष्) बिजली विभाग की मनमानी से तंग आ गई हैं। वो बताती हैं, “दो साल पहले बिजली का कनेक्शन लिया था, कभी भी हर महीने का बिल नहीं आता है तो कभी दो महीने का बिल 627 रुपए एक साथ ही आ जाता है।” उन्होंने आगे कहा, “एक ही गाँव में रहने वाले अलग-अलग लोगों का अलग-अलग बिल आता है।’’

उन्होंने कहा कि गाँव में आमदनी का कोई साधन नहीं है, इकट्ठा बिल देना मुश्किल हो जाता है। कई बार तो छह महीने या साल भर का बिल एक साथ ही आ जाता है।”

यही हाल हरदोई जिले के कई गाँवों का है। ज़िला मुख्यालय से लगभग 39 किमी दूर संडीला तहसील के कछौना पतसेनी में बिजली के मीटर तो लगा दिये गए हैं, लेकिन सिर्फ दिखावे के लिए। हरदोई के कछौना पतसेनी महीने में एक बार भी बिजली विभाग से कोई मीटर रीडिंग के लिए नहीं आता है, लेकिन दो महीने में 900 रुपये बिल आ जाता है। एक महीने का 450 रुपए। लगभग 25 हजार जनसंख्या वाले कछौना में ठाकुरगंज, नटपरुवा जैसे कुल 12 वार्ड हैं। 

हरदोई के ठाकुरगंज वार्ड में रहने वाले रमेश सिंह (45 वर्ष) बिजली विभाग से परेशान हो गए हैं। बिजली का मीटर दिखाते हुए रमेश सिंह कहते हैं, “देख लो बिजली का मीटर शो में लगा दिए हैं, लेकिन बिल तो उतना ही आना है। इस बार गर्मी में बहुत परेशानी हो रही है, बिजली रुलाती रहती है”

कुछ ऐसा ही बाराबंकी के करुआ गाँव में भी देखने को मिला।जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर निन्दूरा ब्लॉक से पूरब दिशा में स्थित करुआ गाँव में लगे मीटरों की संख्या बहुत कम है। जिन घरों में मीटर लगे हुए भी हैं उनकी रीडिंग लेने बिजली विभाग का कोई भी नहीं आता है, लेकिन हर महीने 244 रुपए का बिल वहीं से बनकर आ जाता है। बाराबंकी के करुआ गाँव में रहने वाले रघुनाथ यादव (38 वर्ष) बताते हैं, “बत्ती दिन में रहती है उसका कोई इस्तेमाल नहीं हो पाता, रात में बहुत कम आती है अगर आती भी है तो रात के 10 या 11 बजे आती है, तब तक पूरा घर सो जाता है। बिजली का कोई समय निर्धारित नहीं हैं जब मन होता आ जाती है जब मन होता चली जाती पर बिजली के बिल में कोई कटौती नहीं होती है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

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