बिना आवास के थाने में कैसे काम करेंगी महिला पुलिसकर्मी

बिना आवास के थाने में कैसे काम करेंगी महिला पुलिसकर्मीगाँव कनेक्शन

लखनऊ। सरकार ने भले ही हर थानों में दो महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती का फरमान जारी कर दिया हो लेकिन जब पुलिसलाइन में ही महिला पुलिसकर्मियों के रहने को आवास नहीं हैं तो थानों में महिलाकर्मी कैसे रह पाएंगी।

हाल ही में मुख्य सचिव आलोक रंजन ने निर्देश जारी किए थे कि हर थानों में कम से कम दो महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी ताकि महिलाओं को शिकायत करने में किसी भी समस्या का सामना न करना पड़े। जब गाँव कनेक्शन संवाददाता ने लखनऊ में स्थित पुलिसलाइन में महिला पुलिसकर्मियों के आवासों की हालत जानने की पड़ताल की तो सामने आया कि यहां पर महिलाओं के लिए कोई भी आवास नहीं हैं। यहां पर टे्रनिंग के लिए मेरठ से महिमा चौधरी बताती है, ''यहां पर छत से पानी टपकता है। बाहर चारों तरफ से खुला हुआ है। पास में पुलिस कॉलोनी है जिनके लड़के बाहर खड़े रहते हैं। सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। खाना खाने के लिए 500 मीटर दूर जाना पड़ता है। बाउंड्री तक टूटी पड़ी है। खाना खाने के लिए पांच सौ मीटर दूर जाना पड़ता है।''

डीजीपी ऑफिस से मिली जानकारी के मुताबिक पुलिस और पीएसी के कर्मचारियों की संख्या करीब एक लाख 65 हजार है। महिलाओं की संख्या 14,500 है। अब तक किसी पंचवर्षीय योजना में महिला पुलिसकर्मी के रहने के लिए आवास का कोई बजट पास नहीं हुआ। लखनऊ पुलिस लाइन के प्रतिसरी निरीक्षक शिशुपाल सिंह चौहान बताते है, ''यहां पर महिलाओं के रहने के लिए कोई आवास नहीं है, जब हमारे पास महिलाएं आती हैं तो उनको रोकने के लिए आवास खाली कराने पड़ते हैं। अभी दस महिला पुलिसकर्मी आई हैं उनको रोकने के लिए जगह नहीं थी तो अपने आवास में रखा है और मैं पीएससी बल के साथ रहता हूं। अभी तक महिला आवास के लिए कोई निश्चित स्थान नहीं है। फार्मासिस्ट के नाम से जो आवास है उनमें 20 महिला रह रही हैं।''

जब गाँव कनेक्शन संवाददाता हजरतगंज कोतवाली में स्थित महिला थाने पहुंची तो वहां की हालत भी काफी खराब मिली। यहां पर वर्तमान समय में 59 महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती है लेकिन इनके रहने के लिए केवल दो कमरे हैं। मजबूरी में इन्हें किराए में रहना पड़ता है। दो कमरों में कभी छह तो कभी सात महिलाएं रहती हैं। इसी कमरे में ही उन्हें खाना बनाना पड़ता है। पांच साल से अपनी सहेली के मकान में रह रहीं आगरा की उमा शर्मा बताती है, ''अभी तक यहां से कालोनी या आवास की कोई व्यवस्था नहीं है, इस कारण से मुझे अपनी सहेली के साथ रहना पड़ रहा है।''

बाराबंकी में भी महिलाकर्मी परेशान

बाराबंकी। महिलाओं के आवास की समस्या न केवल एक जिले में बल्की यह हालत पूरे प्रदेश का जहां महिला पुलिस की सबसे बड़ी परेशानी है। मुख्यालय की कोतवाली नगर मे एक हेड महिला कान्सटेबल सहित कुल आठ महिला पुलिसकर्मी तैनात है जिसमें से दो महिला सिपाही पुलिस कप्तान कार्यालय में सम्बद्ध हैं लेकिन इनके यहां रहने की कोई सही व्यवस्था नहीं है।

कोठी थाने में रह रही महिला पुलिस कर्मी बताती है,  ''पुलिस लाइन यहां से 40 किमी दूर है इसलिए थाना परिसर में रह रहे हैं। यहां पर रहने के लिए एक कमरा उसी में खाना बनाना और नहाना होता है क्योंकि थाने में बाथरुम नहीं और शौचालय भी दूर है। पानी का नल भी यहां से दूर है।''

कोतवाली नगर में एक हेड महिला कान्सटेबिल अंजू मिश्रा के अलावा सात महिला कान्सटेबिल और है लेकिन यहाँ उनकी रहने की कोई व्यवस्था नहीं है। ये जानकारी कोतवाली में तैनात दीवान अंजनी कुमार तिवारी ने दी। उन्होंने बताया की सभी महिला सिपाही पुलिस लाइन में रहती है और उन्हें जरूरत पडऩे पर बुला लिया जाता है। 

थाना बडडुपुर जनपद मुख्यालय से लगभग 50 किमी दूरी पर स्थित है। यहां पर दो महिला कान्सटेबल की तैनाती है जिनका नाम नीलम वर्मा है, यह फ तेहपुर में निवास करती है। दूसरी किरन भारती है जो पुलिस लाइन में रहती है, जबकि इन दोनों की तैनाती बडडुपुर थाने में है।  

अपर पुलिस अधीक्षक शफीक अहमद ने इस संबंध में जानकारी दी कि पूरे जिले के थानों मे दो दो महिला सिपाहियों की तैनाती और रहने के लिए आवास उसी थाने में बनवाये जा रहे हैं।

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