बिना डॉक्टर के ज़मीन पर प्रसव

बिना डॉक्टर के ज़मीन पर प्रसवगाँव कनेक्शन

अमानीगंज (फैजाबाद)। “दर्द उठने पर आशा बहू को फोन किया तो उन्होंने उपवास बताकर आने से मना कर दिया। यहां अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं है। एएनएम मिलीं किसी तरह, उन्होंने जमीन पर प्रसव करवा दिया। देखो बच्चे को कितने गंदे गद्दे पर लिटा दिया है,” अस्पताल में एक गंदे से कमरे में लेटी अपनी पत्नी चंद्रावती और बच्चे की ओर इशारा करते हुए अरविंद कुमार ने कहा।

गर्भवती पत्नी को जब अचानक दर्द उठा तो अरविंद कुमार (30 वर्ष) फैजाबाद से 30 किमी दूर अमानीगंज में गद्दोपुर गाँव में एक प्राथमिक स्वास्थ केंद में उसे प्रसव के लिए लेकर पहुंचे । लेकिन अस्पताल में न डॉक्टर मिले न नर्स, एक एएनएम भी काफी खोजबीन के बाद मिली। 

“आसपास कोई अस्पताल नहीं हैं, एंबुलेंस भी नहीं मिली तो मजबूरी में इस अस्पताल लाना पड़ा। लेकिन यहां कभी कोई नहीं मिलता” फैजाबाद में रामनगर निवासी अरविंद कुमार ने बताया। उन्होंने कहा कि जिस स्थिति में उनकी पत्नी और नवजात बच्चे को रखा गया है, उनके बीमार होने की बहुत संभावना है।

इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की पूरी जिम्मेदारी वार्ड ब्वॉय दिलीप कुमार पर है। दिलीप बताते हैं, “डॉक्टर नहीं हैं इसलिए वो मरीजों को वापस कर देते हैं। डिस्पेंसरी में ताला लगा रहता है, वहां की दवाईयां रखे-रखे खराब हो रही हैं।”

एनआरएचएम की वेबसाइट के अनुसार यूपी में 5,000 डॉक्टरों की कमी है। गाँवों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए करीब 16,000 डॉक्टरों की आवश्यकता है, जबकि विभाग के पास सिर्फ 11,000 ही हैं।

गाँव कनेक्शन रिपोर्टर के अस्पताल पहुंचने पर एएनएम दोपहर करीब 1.30 बजे आईं और तुरंत वापस चली गईं। इस बारे में जब अस्पताल के व्यवस्थापक से बात की गई तो उन्होंने फोन पर कहा, “मीटिंग में जा रहा हूं, अभी देखता हूं।”

उत्तर प्रदेश कें ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की कमी एक एैसी समस्या बन गई है, जिसका हल नहीं मिल पा रहा है। एनआरएचएम के वरिष्ठ सलाहकार और पूर्व डीजी हेल्थ डॉ. बीएस अरोड़ा ने हाल ही में गाँव कनेक्शन को बताया था कि करीब चार साल से 5,000 डॉक्टरों की कमी लगातार बनी हुई है।

सिर्फ फैजाबाद ही नहीं रायबरेली के डलमऊ विकासखंड के मधुकरपुर पीएसची में 24 घंटे प्रसव का बोर्ड लगा है लेकिन यहां एक भी डॉक्टर नहीं है। एक फार्मासिस्ट पर 20 गाँवों की लगभग दस हजार जनसंख्या की सेहत की जिम्मेदारी है।

इसी तरह बाराबंकी के सूरतगंज जिले के छेदा पीएसची में पिछले एक वर्ष से कोई डॉक्टर नहीं आया। मैनपुरी जि़ले के कुरावली विकासखंड के सलेमपुर में भी पिछले एक वर्ष से फार्मासिस्ट रविंद्र वर्मा ही डॉक्टर की जिम्मेदारी संभाले हुए हैं।

अभी प्रदेश मौजूदा स्वास्थ्य केंद्रों में ही डॉक्टरों की कमी नहीं पूरी कर पा रहा है जबकि प्रदेश में 1500 से ज्यादा स्वास्थ्य केंद्रों की कमी है। एनआरएचएम के अनुसार उत्तर प्रदेश में 5,172 पीएचसी की ज़रूरत है, जबकि सिर्फ 3692 ही मौजूद हैं।

रिपोर्टर - रबीश वर्मा

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