बिना किसी पूर्व सूचना के काट दिए दर्जनों घरों के बिजली कनेक्शन

बिना किसी पूर्व सूचना के काट दिए दर्जनों घरों के बिजली कनेक्शनgaonconnection

लखनऊ। पिछले आठ वर्षों से न तो मीटर की रीडिंग की जांच हुई न ही बिजली विभाग ने एक बार भी बिजली का बिल भेजा और अब बिना बताए दर्जनों घरों की बिजली का कनेक्शन ही काट दिया।

लखनऊ जिला मुख्यालय से उत्तर दिशा में लगभग 34 किमी. दूर बक्शी का तालाब ब्लॉक के शाहपुर गाँव में पिछले हफ्ते बिना किसी पूर्व सूचना के तीस घरों का बिजली कनेक्शन काट दिया गया। जबकि पिछले आठ वर्षों से एक बार भी मीटर की जांच नहीं की गयी।

शाहपुर गाँव के रहने वाले रामचन्द्र बाजपेई बताते हैं, ''आठ साल पहले गाँव के बीपीएल कार्ड धारकों के यहां बिजली के मुफ्त कनेक्शन दिए गए थे, कुछ महीनों तक बिजली का बिल भी आता रहा और हमने उसका भुगतान भी किया। लेकिन फिर उसके बाद एक बार भी बिल नहीं आया और न ही बिजली विभाग से कोई मीटर रीडिंग की जांच करने आया।'' वो आगे कहते हैं, ''पिछले हफ्ते इटौंजा पावर हाउस का संविदा कर्मी आया और हमारे बिजली के कनेक्शन ही काट दिया। जबकि उन्हें इसकी पूर्वसूचना देनी चाहिए थी। हमें ये तक नहीं बताया गया कि बिना मीटर रीडिंग के तीस-चालीस हज़ार बिल कैसे भेज दिया गया।''

इस बारे में जब इटौंजा पावर हाउस के जेई एसके तिवारी से फोन पर बात की तो उन्होंने बताया कि बिल नही जमा किया गया इसीलिए उन लोगों का कनेक्शन काट दिया गया है। लेकिन जब रिपोर्टर ने पूछा कि जो बिल ग्रामीणो को बताया गया है वो किस आधार पर बताया गया है? क्योंकि ग्रामिणों का तो कहना है कि आज तक एक बार भी मीटर की रीडिंग लेने कोई नहीं आया है और न ही किसी ने कनेक्शन काटने के पहले कोई नोटिस दी गई है, तो इस पर उन्होंने कहा कि हम ग्रामीण क्षेत्र के हर गाँव में मीटर रीडिंग के लिए नहीं जा सकते हैं।

                                          

जहां एक तरफ कनेक्शन धारकों के धर का कनेक्शन काट दिया गया हैं वहीं दूसरी तरफ उसी गाँव में कई ऐसे घर हैं जहां पर बिना कनेक्शन के बेधड़क कटिया लगाकर बिजली का प्रयोग किया जा रहा है। गाँव के देशराज यादव कहते हैं, ''संविदा कर्मी कटिया वालों से सौ पचास रुपए लेकर उनको कुछ भी नहीं कहते हैं। हमने बिजली विभाग को प्रार्थना पत्र भी दिया है कि एक साथ तीस हजार बिल नहीं जमा कर पाएंगे।'' गाँव के सुरेन्द्र गौतम, राम सेवक यादव, राम लखन, अरविन्द सिंह, श्याम लाल, महेन्द्र सिंह जैसे 30 घरों के लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हैं।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

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