बिना पानी जीवन कैसा होता है कोई इनसे पूछे

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प्रतापगढ़। बारह साल पहले जब पानी की टंकी का निर्माण शुरू हुआ तो दर्जनों गाँव के लोगों को लगा अब पेयजल की समस्या दूर हो जाएगी। लेकिन लाखों की लागत से बनी पानी की टंकी शोपीस बन कर रह गयी है।

प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय से दक्षिण दिशा में लगभग 65 किमी. दूर कालाकांकर तहसील की सबसे अधिक आबादी वाली ग्राम पंचायत परियावां में पानी की समस्या को दूर करने के लिए बारह साल पहले पानी की टंकी बनाई गयी थी। प्रतापगढ़ की पूर्व सांसद राजकुमारी रत्ना सिंह ने टंकी का शिलान्यास किया था।

परियावां गाँव के बब्बन सिंह (55 वर्ष) बताते हैं, “गाँव में जब टंकी बननी शुरू हुई तो लोग बहुत ख़ुश हुए, पर अब ये किसी काम की नहीं रह गई हैं। इस गर्मी में लोगों को बहुत परेशानी हुई।” पाइकगंज, बीबीपुर, धनऊ का पुरवा, भिटारी, ईदगाह, शेख का पुरवा, तुलसी का पुरवा और परियावां गाँव के लोगों को टंकी से बहुत आस थी। शेख का पुरवा के राशिद अली (35 वर्ष) कहते हैं, “किसी काम की ये टंकी नहीं रह गयी है, प्रधान ने अपने जानने वालों के यहां सरकारी नल लगवा दिए हैं, उनको पानी की समस्या नहीं होती, हमारे यहां के नल तो पानी नहीं देते हैं।” इस बारे में पूर्व सांसद राजकुमारी रत्ना सिंह कहा, “हमारे कार्यकाल में इसका काम शुरू किया गया था, अब नए सांसद को चाहिए इसे ठीक कराकर इस समस्या को दूर करें।”

परियावां ही नहीं जिले में कई और भी क्षेत्र हैं, जहां टंकी किसी काम की नहीं बची है। विकास खंड गौरा में पेयजल संकट गहराने लगा है। गौरा मुख्यालय के सीएचसी गौरा में वर्षों से पेयजल की टंकी खराब पड़ी है। इस ठीक कराने के लिए कई बार क्षेत्रीय लोगों ने प्रार्थना पत्र दिया। सीएचसी गौरा अधीक्षक डॉ. ओपी सिंह कहते हैं, “पानी की टंकी करीब 25 वर्ष पहले से ही खराब है। पानी की समस्या से निपटने के लिए सबमर्सिबल लगाया गया है।”

वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौरा में लाखों की लागत से बनी पानी की टंकी सिर्फ शोपीस ही बनकर रह गई है। उसे विभाग ने ख़राब बता दिया है, जबकि अस्पताल में लगा हैंडपंप भी खराब पड़ा है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

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