संतुलित आहार देकर कम पशुओं से ले रहे ज्यादा दूध उत्पादन

डेयरी के क्षेत्र में पशुपालन कर रहे मनीष सिंह ने पशुपालन का उचित प्रबंधन, समय पर टीकाकरण, डीवार्मिंग (पेट के कीड़े मारना) कराकर पशुपालन को मुनाफे का सौदा बनाया है। आप भी सीखें इन पशुपालकों की विशेष तकनीक, जिससे पशुपालन बना मुनाफे का बिजनेस।

संतुलित आहार देकर कम पशुओं से ले रहे ज्यादा दूध उत्पादन

वाराणसी। जब पशुपालक डेयरी की शुरुआत करता है तो उसको यही लगता है कि ज्यादा पशु होंगे तो ज्यादा उत्पादन होगा। लेकिन आपको बता दें अगर आपके पास कम पशु हैं तो उनको संतुलित आहार देकर ज्यादा उत्पादन कर सकते हैं। वाराणसी जिले के भुसौला गाँव में रहने वाले पशुपालक मनीष सिंह कुछ ऐसा ही कर रहे हैं।

मनीष की डेयरी में कुल 22 पशु हैं, जिनमें से 15 पशु वर्तमान समय में दूध दे रहे हैं, जिनसे रोजाना करीब 360 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है।

मनीष बताते हैं, ''जब मकान की नींव मजबूत होगी तो ही आप इमारत खड़ी कर सकते हैं। वैसे ही पशुओं में होता है अगर पशुओं का आहार प्रंबधन ठीक है तो उनमें रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है, साथ ही शारीरिक विकास भी अच्छा होता है। इसलिए पशुओं को संतुलित आहार और पोषक तत्व भरपूर मात्रा में देना चाहिए।''


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पशुओं के आहार की मात्रा मौसम, उसके वजन और उत्पादन क्षमता के अनुसार रखी जाती है। अपने पशु के आहार प्रंबधन के बारे में जानकारी देते हुए मनीष बताते हैं, ''एक गाय जो 22 से 24 लीटर दूध दे रही है, उसको मक्का, चोकर के साथ 11 किलो राशन प्रतिदिन, 100 ग्राम मिनिरल प्रतिदिन, 150 एमएल कैल्शियम और 10 एमएल मल्टीविटामिन प्रतिदिन, महीने में 10 दिन लीवर टॉनिक देते हैं। इससे दूध की गुणवत्ता भी अच्छी होती है और पशुओं की उत्पादन क्षमता भी बढ़ती है।''

पशुओं को स्वस्थ रखने के लिए और बेहतर उत्पादन लेने के लिए मनीष आहार प्रंबधन का ध्यान रखते हैं। साथ ही पशुओं का टीकाकरण, हर महीने पर पशुओं को पेट के कीड़ों की दवा भी देते हैं। पिछले 17-18 वर्षों से डेयरी चला रहे मनीष सिंह बताते हैं, "अगर पशु को सही आहार देंगे तो अच्छा उत्पादन होगा और जितनी लागत एक पशु पर आती है उतनी निकल भी जाती है। हमारे डेयरी में आधे पशु ही दूध देते हैं, दूध की अच्छी गुणवत्ता से दाम भी अच्छे मिल जाते हैं।''

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आहार देने की मात्रा का रखें ध्यान

पशुओं में व्यस्क पशु, गाभिन पशु और बच्चे की आहार देने की मात्रा अलग-अलग होती है। इसलिए पशुपालकों को पशुओं का आहार प्रंबधन ठीक तरह करना चाहिए ताकि पशुओं की दूध उत्पादन क्षमता बढ़ सके और बीमारियों से भी बचाव हो सके।



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