बरेली के इस गाँव में कोई भी नही है बेरोजगार

बरेली के इस गाँव में कोई भी नही है बेरोजगारgaonconnection

बरेली। फूलों की खेती ने एक बहजुइया जागीर गाँव की किस्मत ही बदल दी। इस गाँव के सभी लोगों को रोजगार मिला है चाहे वह आठ साल का बच्चा हो या अस्सी साल की दादी मां। करीब छह सौ एकड़ में हो रही खेती से सभी गाँव वाले खुशहाल हैं।

जनपद का बहजुइया जागीर गाँव ‘फूलों का गाँव’ नाम से जाना जाता है। यह दिल्ली से 263 किमी दूरी पर स्थित है। विकास खंड क्यारा के तहत आने वाला यह गाँव कलक्टरबक गंज से दक्षिण दिशा की ओर लगभग सात किलोमीटर की दूरी पर बसा हुआ है। 

गाँव की खासियत यह है कि यहां का कोई भी व्यक्ति बेरोजगार नहीं है। सभी फूलों की खेती या इसके व्यवसाय से जुड़े हैं। फिलहाल गाँव के लोग फूलों को बरेली के कुतुबखाना स्थित मलिहारन की फूलमंडी में बेचकर अच्छी आमदनी कर रहे हैं। बहजुइया जागीर के सभी फूल उत्पादक गेंदा, गुड़हल और गुलाब की खेती करते हैं और इनके बीज कोलकाता से मंगवाते हैं।

गाँव में उत्पादित फूलों की खेती और उससे ग्रामवासियों को मिल रहे रोजगार के बारे मे नेमचंद बताते हैं, “हमारे गाँव में छोटे-छोटे बच्चे भी स्कूल की गर्मियों की छुटि्टयों में अपने मां-बाप का हाथ बंटाने के लिए मालाएं गूंथ रहे हैं। इससे पूर्व वे अपने खेतों में गेहूं तथा गन्ने की फसल बोया करते थे। परंतु उनमें मेहनत अधिक और लाभ कम था इसलिए अब फूलों की खेती कर रहे हैं इसमें लाभ के साथ ही पूरे परिवार को रोजगार भी मिल रहा है।”

बहजुइया जागीर में लगभग 175 परिवार निवास करते हैं। यहां के किशोरों, युवाओं, बुजुर्गों तथा ग्रहणियों के लिए यह घर बैठे रोजगार का साधन भी बन चुका है। उन्हें फूल चुनने के लिए प्रतिघंटा 8 से 10 रुपए और फूलों की माला बनाने के लिए पचास पैसा प्रतिमाला के हिसाब से भुगतान दिया जाता है। खेतों से लेकर घर-आंगन तक, हर तरफ फूल ही फूल बिखरे नजर आते हैं। 

फूलों की खेती की कमाई पर खिलखिलाते हुए बुद्ध सेन बताते हैं, “फायदे का धंधा है। सात बीघा जमीन में फूलों की खेती की है। रोजाना मंडी में एक क्विंटल से अधिक गुड़हल, गेंदा तथा गुलाब की आपूर्ति करता हूं, घर परिवार की आजीविका आसानी से चला रही है।”

बुद्धसेन अगली बार से और अधिक जमीन में फूल बोने की सोच रहे हैं। फूलों की खेती की लागत और मेहनत फूल उत्पादक श्रीचंद बताते हैं, “लागत और मेहनत कम होने के साथ-साथ अच्छा लाभ है। किसान को रोज रोज की निराई-गुड़ाई से छुटकारा मिल जाता है। एक किसान दस बीघा जमीन में बीस पच्चीस हजार के फूलों के बीज बोकर हर सीजन में लाखों रुपए कमा रहा है।”

फिलहाल बरेली मंडी में गेंदा 10 से 15 रुपए, गुलाब 25 से 30 रुपए और गुडहल 20 रुपए प्रति किलो बिक रहा है। मंडी में देर से पहुंचने पर होने वाले नुकसान पर श्रीचंद बताते हैं, “मंडी में समय से न पहुंच पाने पर किसानों को फूलों के सही दाम नहीं मिल पाते इसलिए हम सुबह सवेरे मंडी पहुंचने की हरसंभव कोशिश करते हैं। ताकि माल की भरपूर कीमत मिल सके।” 

बहजुइया जागीर के फूलों ने गाँव की महिलाओं को खाली समय में टाइमपास के साथ रोजगार भी दिया है। दिनभर महिलाएं फूलों की मालाएं बनाती हैं सुबह सवेरे उनके घरवाले उन्हें बेचने मंडी में ले जाया करते हैं। रामवती बताती हैं, “गाँव की सारी महिलाएं खाली समय में फूल तोड़ने और उन्हें गूंथने का काम करती हैं, जिस कारण उनके समय का पूरा सदुपयोग हो जाता है।”

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