ब्रह्मपुत्र पर चीन का बांध, खतरे की घंटी

ब्रह्मपुत्र पर चीन का बांध, खतरे की घंटी

नई दिल्ली। चीन ने ब्रह्मपुत्र नदी पर तिब्बत का सबसे बड़ा बांध शुरू कर भारत के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।

चीन ने तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर बनी अपनी सबसे बड़ी पनबिजली परियोजना 'जम हाइड्रोपावर स्टेशन' की सभी छह इकाइयों को पावर ग्रिड से जोड़ दिया है।

जम हाइड्रो पावर स्टेशन को जांगमू हाइड्रोपावर स्टेशन के नाम से भी जाना जाता है। यह बांध विश्व की सबसे ज्यादा ऊंचाई पर बने पनबिजली केन्द्र के रूप में जाना जाता है। यह तिब्बत की राजधानी ल्हासा से करीब 140 किमी दूर स्थित है। डेढ़ अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 9764 करोड़ रुपए) की यह अपने किस्म की सबसे बड़ी परियोजना है जो एक साल में 2.5 अरब किलोवाट/घंटे बिजली उत्पादन करेगी। ये रन ऑफ द रिवर प्रोजेक्ट पर बना है, इसमें पानी का स्टोरेज नहीं किया जाता है।

इस परियोजना में ब्रह्मपुत्र नदी के पानी का इस्तेमाल किया है। ब्रह्मपुत्र नदी को तिब्बत में यारलुंग जांगबो नदी के नाम से जाना जाता है। यह नदी तिब्बत से भारत आती है और फिर वहां से बांग्लादेश जाती है। ब्रह्मपुत्र का 80 प्रतिशत हिस्सा भारतीय क्षेत्र में आता है। अरुणाचल प्रदेश और असम राज्यों के लिए ये अहम है।

वर्ष 2013 में बनी सहमति के अनुसार चीनी पक्ष ब्रह्मपुत्र की बाढ़ के आंकड़े जून से अक्टूबर के बजाय मई से अक्टूबर के दौरान प्रदान करने में सहमत हुआ था। 2008 और 2010 के नदी जल करारों में जून से अक्टूबर के दौरान आंकड़े प्रदान करने का प्रावधान था। 

भारत को दोहरा ख़तरा

ब्रह्मपुत्र पर बनने वाले बांधों से भारत को दोहरा खतरा है। चीन अगर इन बांधों से पानी छोड़ता है तो भारत के पूर्वोत्तर समेत कई इलाकों में बाढ़ आ सकती है। अगर उसने पानी का भंडारण किया तो भारतीय इलाके बूंद-बूंद को तरस सकते हैं। भारत 2013 में ऐसे हालात का सामना कर चुका है जब तिब्बत के पारछू झील से पानी छोड़े जाने पर हिमाचल के कई इलाकों में बाढ़ आ गई थी। साथ ही भारत को चिंता है कि अगर पानी बाधित किया गया तो बब्रह्मपुत्र नदी की परियोजनाएं, खासतौर पर अरुणाचल प्रदेश की अपर सियांग और लोअर सुहांस्री परियोजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। चीन ने भारत की चिंताओं को दूर करते हुए कहा है कि वह इस मामले में भारत से संपर्क में है। 

बिजली संकट दूर करेगी परियोजना

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक मध्य चीन स्थित हुबेई की राजधानी वुहेन की प्रमुख पनबिजली कांट्रेक्टर कंपनी गझोउबा ने इन इकाइयों के पावर ग्रिड में शामिल होने की सूचना दी है। कंपनी ने कहा है कि यह परियोजना मध्य तिब्बत में बिजली संकट को दूर करेगी। इससे बिजली की कमी वाले इलाके में आर्थिक विकास तेज होगा। 

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