बरसात के मौसम में कर सकते हैं मूसली की खेती

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लखनऊ। सफेद मूसली एक औषधीय पौधा है, जिसकी खेती पूरे देश में लगभग ठंडे क्षेत्रों को छोडकर की जा सकती है। सफेद मूसली को सफेदी या धोली मूसली के नाम से जाना जाता है जो लिलिएसी कुल का पौधा है।

जलवायु : सफेद मूसली गर्म और आर्द्र प्रदेशों का पौधा है। उत्तरांचल, हिमालय प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के ऊपर क्षेत्रों में यह सफलतापूर्वक उगाई जा सकती है।

सिंचाई एवं गुड़ाई: रोपाई के बाद ड्रिप द्वारा सिंचाई करें। बुआई के 7 से 10 दिन के अन्दर यह उगना प्रारम्भ हो जाता हैं।

बीज उपचार एंव रोपण

400 से 500 किलोग्राम बीज या 40000 ट्यूबर्स प्रति हेक्टेयर की दर से बीज की जरूरत पड़ती है। बुवाई के पहले बीज का उपचार रासायनिक और जैविक विधि से करते हैं। रासायनिक विधि में वेविस्टीन के 0.1 प्रतिशत घोल में ट्यूबर्स को उपचारित किया जाता है। जैविक विधि से गोमूत्र और पानी में 1 से 2 घंटे तक ट्यूबर्स को डुबोकर रखा जाता है। बुवाई के लिए गड्ढे बना दिए जाते हैं। गड्ढे की गहराई उतनी होनी चाहिए जितनी बीजों की लम्बाई हो, बीजों का रोपण इन गड्ढों में कर हल्की मिट्टी डालकर भर दें।

खेत की तैयारी

सफेद मूसली 8-9 महीने की फसल है जिसे मानसून में लगाकर फरवरी-मार्च में खोद लिया जाता है। अच्छी खेती के लिए यह आवश्यक है कि खेतों की गर्मी में गहरी जुताई की जाए, अगर हो सके तो हरी खाद के लिए ढैंचा, सनई, ग्वारफली बो दें। जब पौधो में फूल आने लगे तो काटकर खेत में डालकर मिला दें। गोबर की सड़ी खाद 250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से अन्तिम जुताई के समय खेत में मिला दें। खेतों में बेड्स एक मीटर चैड़ा और एक फीट ऊंचा बनाकर 30 सेमी की दूरी पर कतार बनाएं, जिसमें 15 सेमी की दूरी पर पौधे को लगाते हैं। 

मूसली की किस्में 

सफेद मूसली की कई किस्में देश में पाई जाती हैं। उत्पादन और गुणवत्ता की दृष्टि से एमडीबी 13 और एमडीबी 14  किस्म अच्छी है। इस किस्म का छिलका उतारना आसान होता है। बस किस्म में ऊपर से नीचे तक जड़ो या ट्यूबर्स की मोटाई एक समान होती है। मूसली बरसात में लगाई जाती है। नियमित वर्षा से सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती है। अनियमित मानसून में 10-12 दिन में एक सिंचाई दें। अक्टूबर के बाद 20-21 दिनों पर हल्की सिंचाई करते रहना चाहिए। मूसली उखाड़ने के पूर्व तक खेती में नमी बनाए रखें।

मूसली की खुदाई (हारवेस्टिंग)

मूसली को ज़मीन से खोदने का सर्वाधिक उपयुक्त समय नवम्बर के बाद का होता है। जब तक मूसली का छिलका कठोर न हो जाए और इसका सफेद रंग बदलकर गहरा भूरा न हो तब तक जमीन से नहीं निकालें। मूसली को उखाड़ने का समय फरवरी के अंत तक है।

खोदने के उपरांत इसे दो कार्यों के लिए प्रयुक्त किया जाता है:

  • बीज हेतु रखना या बेचना
  • इसे छीलकर सुखा कर बेचना
  • बीज के रूप में रखने के लिए खोदने के 1-2 दिन तक कंदो का छाया में रहने दें ताकि अतिरिक्त नमी कम हो जाए फिर कवकरोधी दवा से उपचारित कर रेत के गड्ढों, कोल्ड एयर, कोल्ड चेम्बर में रखें।

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