बरसात के पानी ने पैदा किये बाढ़ जैसे हालात

बरसात के पानी ने पैदा किये बाढ़ जैसे हालातgaonconnection

बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के अन्य जनपदों सहित जिला बाराबंकी में शुक्रवार सुबह से मूसलधार बारिश होने से जहां जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। वहीं इस बारिश से किसानों चेहरे खिल उठे। तो वहीं कुछ किसानों के लिए घाघरा नदी के किनारे आई बाढ़ में फंसे बाढ़ पीड़ितों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गई है। 

जिले में हुई बारिश के चलते कई तरह की समस्याएं भी पैदा हो गई हैं। जनपद मुख्यालय में जहां नगर पालिका परिषद द्वारा कराये गए विकास कार्यों के नाम पर सीवर लाइनों का पानी सड़कों पर जमा रहा तो वहीं घघरा किनारे स्थित कई ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश के पानी से बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं।  

नगर पंचायत बंकी स्थित उत्तर टोला निवासी मोहम्मद आमिर का कहना है की टाउन एरिया के कर्मचारी किसी तरह की साफ़-सफाई नहीं रखते हैं और न ही सीवर लाइनों की सफाई होती है जिसके चलते अक्सर बरसात के दिनों में मुसीबतें बढ़ जाती हैं और सीवर का गंदा पानी घरों के अंदर घुस जाता है। 

बंकी के दक्षिण टोला निवासी बुजुर्ग मेवालाल बताते है, "बंकी का जो सरकारी तालाब था उसे भूमाफियाओं ने पाट दिया है और तालाब पर स्थानीय लोगों ने कब्जा कर रखा है जिसके चलते तालाब का आकार बहुत छोटा सा हो गया है। यहां तक कि तालाब का निकास द्वार भी पटा हुआ है और उसकी सफाई करने वाला कोई नहीं है जिसके चलते पूरे नगर टाउन का पानी अचानक तालाब में भर जाता है और चारों तरफ पानी-पानी हो जाता है।" तहसील रामसनेहीघाट के अंतर्गत कस्बा सुमेरगंज, भिटरिया, धरौली में भी बरसात का पानी सड़कों पर घंटों भरा रहा। भिटरिया के ग्राम प्रधान का कहना है कि जल निकासी के लिए एक बड़े नाले का बनाया जाना बहुत जरूरी है। 

बाहर निकलना हुआ दुभर

कुरैसी वार्ड के सभासद आयूब ने बताया कि ये इस मानसून की पहली जबरदस्त वर्षा थी जिसके चलते हैदरगढ़ पानी-पानी हो गया। वहीं पूरे मित्तई वार्ड के सभासद आलोक तिवारी का कहना था कि जिस हिसाब से शुक्रवार सुबह से बारिश हो रही थी, लोग सिर्फ घरों के अंदर ही थे कोई बाहर नहीं निकला बाहर और न ही निकलने का कोई रास्ता ही था। सभी रास्ते पानी से भरे हुए थे।  

बाढ़ ने बढ़ाई मुसीबत

फतेहपुर और सिरौलीगौसपुर के बाढ़ इलाकों में बरसात के पानी ने लोगों की मुसीबतें तो बढ़ाई ही हैं साथ ही जानवरों के लिए भी चारे की समस्या हो गयी है। हाल यह है कि जहां-जहां घास थी वहां आज पानी भरा हुअा है। ऐसी स्थति में लोगों को सिर्फ ऊपर वाले का सहारा है क्योंकि जिला प्रसासन द्वारा मुहैय्या कराई जा रही सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। रामनगर तहसील के तराई क्षेत्र में लगातार बाढ़ के पानी का स्तर बढ़ रहा है। जिससे लोगों की मुसीबतें बढ़ सकती हैं।

रिपोर्ट -सतीश कश्यप

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