बस अड्डों पर अब नहीं मिलेगा परिवहन नीर, कंपनी का टेंडर रद्द

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लखनऊ। दो-तीन दिन बाद बस और बस अड्डों पर परिवहन नीर नाम से बिकने वाला पानी अब नहीं मिलेगा। रोडवेज ने मनमाने तरीके से पैसे बढ़ाने और फर्जीवाड़े के आरोप में कंपनी का टेंडर रद्द कर दिया है।

बस के अंदर और बस स्टॉप पर यात्रियों की प्यास बुझाने के लिए सस्ता व शुद्व पानी उपलब्ध कराने के लिए मेसर्स एक्सिस इंटरनेशनल नाम की फर्म ने परिवहन नीर के नाम से पानी बेचने के लिए रोडवेज से करार किया था। लेकिन अपने शुरुआती दौर में ही कंपनी ने रोडवेज को ठगना शुरू कर दिया, जिसके चलते रोडवेज ने कंपनी का ठेका निरस्त कर दिया और दो दिन के अंदर सभी बस अड्डों से कंपनी को व्यवसायिक गतिविधियों को बंद करने का अल्टीमेटम भी जारी कर दिया।

कंपनी को पहले अनुबंध में फर्जी बैंक गारंटी लगाकर रोडवेज को बरगलाया और उसके बाद महीनों से करोड़ों का कर्ज भी नहीं चुकाया। कई बार कंपनी को इसके लिए रोडवेज ने चेताया भी लेकिन कंपनी के प्रतिनिधियों पर कोई फर्क नहीं पड़ा। करोड़ों की बकाएदार फर्म को आखिर इसका अंजाम भुगतना ही पड़ गया।

दो महीने पहले ही कैसरबाग बस अड्डें पर परिवहन नीर को बसों के अंदर आइस बॉक्स में यात्रियों को उपलब्ध कराने के लिए भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें सूबे के परिवहन राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार यासर शाह खुद मौजूद रहे थे। लेकिन कंपनी की हाल ही में अपनी मनमानी से परिवहन नीर की कीमत बढ़ा लेना और रोडवेज का बकाया भी न चुकाना रोडवेज प्रबंधन को अखरा तो आनन-फानन में रोडवेज ने कंपनी का ठेका निरस्त करने की कार्रवाई कर दी। यानि अब बस स्टेशनों व बस के अंदर यात्रियों को पीने का पानी तो मिलेगा लेकिन वह परिवहन नीर की बोतल न होकर किसी और कंपनी का पानी होगा। वहीं बस स्टेशनों पर कंपनी के सभी स्टेंडस को दो दिन के अंदर हटा दिया जाएगा। 

कंपनी पर था 11 करोड़ का बकाया

परिवहन निगम के प्रधान प्रबंधक व परिवहन नीर का कामकाज देख रहे राजीव चौहान ने बताया कि कंपनी पिछले छह से सात महीने से रोडवेज को भुगतान नहीं कर रही थी। कंपनी पर रोडवेज का 11 करोड़ रुपया बकाया है। कई बार कंपनी को इसके लिए अल्टीमेटम भी दिया गया लेकिन इसका कोई असर नहीं पड़ा। कंपनी का ठेका निरस्त करने के अलावा कोई ऑपशन ही नहीं था। उन्होंने बताया कि कंपनी पर रोडवेज का 11 करोड़ रुपया बकाया है।

रोडवेज ने जब्त कर ली सिक्योरिटी

जीएम राजीव चौहान ने बताया कि 11 करोड़ रुपए का भुगतान न किए जाने पर कंपनी का टेंडर निरस्त किया गया। इसके साथ ही अनुबंध के समय सिक्योरिटी के रूप में कंपनी की रोडवेज के पास जमा 5 करोड़ 20 लाख की धनराशि जब्त कर ली गई है। शेष धनराशि भी कंपनी से वसूली जाएगी। 

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