चोरी की गाड़ियां वापस पहुंचाता है ये साफ्टवेयर

चोरी की गाड़ियां वापस पहुंचाता है ये साफ्टवेयरgaonconnection

लखनऊ। “जब हमने पहली बार एक वाहन मालिक को फोन किया कि वो आकर अपनी चोरी हुई गाड़ी ले जाए तो उसे भरोसा नहीं हुआ। लेकिन थाने पहुंचने पर उसने पुलिस को धन्यवाद दिया और अपनी गाड़ी ले गया” झांसी के एसएसपी मनोज तिवारी जिले में शुरू की गई नई मुहिम के बारे में बताते हैं।

देश के लभगभ हर थाने-कोतवाली में जंग खाती नई-पुरानी सैकड़ों गाड़ियां आपने अक्सर देखी होंगी। ये वाहन चोरी, लूट, एक्सीडेंट और वारदातों में इस्तेमाल किए होते हैं, जिन्हें पुलिस जब्त करती है। लेकिन वर्षों तक इनके मालिकों को खोज नहीं हो पाती। थानों में सड़ते ये वाहन पुलिस के लिए भी मुसीबत हैं।

झांसी पुलिस ने इनसे निपटने के लिए तकनीकि का सहारा लिया है। पुलिस ने एक साफ्टवेयर में जिले के सभी थानों का डाटा डालना शुरू किया। डाटा का मिलान कराया और पड़ताल के बाद वाहन उनके मालिकों तक पहुंचाया। इस मुहिम को शुरू करने वाले जिले के एसएसपी मनोज तिवारी बताते हैं, “हमने पहले पुलिस विभाग के पास मौजूद नेशनल साफ्टवेयर का इस्तेमाल इन वाहनों की सुपुर्दगी के लिए शुरू किया है। थानों में पड़े वाहनों पर लिखे नंबर को साफ्टवेयर में फीड करते हैं। इसके बाद आरटीओ के सहयोग से मालिक का पता लगाते हैं उसके बाद मालिक को सूचना दी जाती है।” 

वो आगे बताते हैं, अगर नंबर सही नहीं होता है तो इंजन और चेंचिस नंबर की मदद से वाहन बनाने वाली कंपनी की मदद लेते हैं। शुरूआत में लोगों को भरोसा नहीं हुआ कि वर्षों का खोया उनका वाहन देने के लिए पुलिस फोन कर रही है। इससे थानों की गंदगी भी साफ हुई है और लोगों का पुलिस में भरोसा भी बढ़ा है।”  अभियोजन निदेशालय के अनुसार उत्तर प्रदेश में थानों में पड़े मालों (वाहन और दूसरे सामान) की संख्या 129933 है। जबकि पिछले हफ्तों पूरे प्रदेश में 164455 मामलों का निस्तारण किया गया, जिसमें वाहनों की संख्या 27374 थी।

झांसी पुलिस ने इस साफ्टवेयर का इस्तेमाल 12 अप्रैल 2016 को शुरु किया था। अब तक इसकी मदद से 573 वाहन मालिकों को उनके वाहन सौंपे जा चुके हैं। एसएसपी मनोज तिवारी ने फोन पर बताया, “चार पुलिसकर्मी इसमें लगाए गए हैं जो शनिवार और रविवार को दो घंटे गाड़ियों के नंबर और वाहन मालिकों के नंबर आदि जरूरी डाटा की फीडिंग करते हैं।” कुछ समय पहले तक झांसी में तैनात रही एसपी सिटी गरिमा सिंह (अब आईएएस) बताती हैं, इससे पुलिस की काफी टेंशन कम हो गई हैं। कौन सी गाड़ी कहां से चोरी लूट कर आई है पुलिस के लिए पता लगाना काफी मुश्किल होता है। साफ्टवेयर ने ये मुश्किल आसान कर दी।” 

दो सप्ताह में 1,64,475 

मामलों का निस्तारण 

लखनऊ।

डीजी अभियोजन डॉ. सूर्य कुमार द्वारा प्रदेश स्तर पर मालखानों तथा थानों पर रखे मालों और वाहनों की समीक्षा की गई। समीक्षा में पाया गया कि दो सप्ताह में प्रदेश में कुल 1,64,475 मामलों का निस्तारण कराया गया, जिसमें 2,73,74 वाहनों तथा 1,01,031 थान मालखानों के मामले तथा 36,070 सदर मालखाने के मामलों का निस्तारण कराया गया।  डीजी डॉ. सूर्य कुमार ने बताया कि जहां अधिक संख्या में वाहनों का निस्तारण कराया गया है उनमें 2533 इलाहाबाद, 1173 गोरखपुर, 1308 कानपुर नगर, 1254 झॉसी, 1261 मेरठ और  1065 आगरा हैं। 

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