चुनावी वादों के बाद भी गाँवों में नहीं सुधर रही बिजली व्यवस्था

चुनावी वादों के बाद भी गाँवों में नहीं सुधर रही बिजली व्यवस्थाgaonconnection

छेदा (बाराबंकी)। नंदिनी मौर्य (15 वर्ष) ने इस बार अपनी कक्षा नौ की परीक्षा इमरजेंसी लाइट में पढ़कर पास की है। बिजली की समस्य़ा सिर्फ नंदिनी के गाँव में ही नहीं बल्कि आसपास की छह पंचायतें भी रात के अंधेरों में ढिबरी की रोशनी पर निर्भर हैं। बिजली की दिक्कत के बारे में बताते हुए नंदिनी कहती हैं, ‘’पिछले वर्ष हुए पंचायत चुनाव में रात में बिजली आती थी पर बीते कई महीनों से गाँव में बिजली व्यवस्था में कोई खास बदलाव नहीं आ सका है।

रात में बिजली कभी-कभार ही आती है औऱ दिन में ठीक से दो घंटे भी बिजली नहीं मिल पा रही है।’’वर्ष 2012 में बाराबंकी के पूर्व सांसद रहे डॉ. पीएल पुनिया ने जनता को आश्वासन दिया था कि बाराबंकी विकास खंड के 232 गाँवों और उनके मजरों से अंधेरा दूर होगा पर आज भी जिले के गाँवों में बिजली की हालत वैसी की वैसी ही है। 

गाँव के निवासी रमेश कुमार (42 वर्ष) बताते हैं, ‘’गाँव में बिजली आने का कोई समय निर्धारित नहीं है। दिन में बार-बार बिजली कटती है और रात में भी बिजली का कोई भरोसा नहीं है। बिजली न रहने से गाँव के पास का सरकारी नलकूप भी सही से नहीं चल पा रहा है, जिससे खेतों की सिंचाई में परेशानी हो रही है।’’ 

छेदा गाँव में खंभे पर लगा फुका हुआ शॉकेट बोर्ड गाँव में बिजली की कहानी साफ बयां करता है। बाराबंकी क्षेत्र के देवखरिया, टीकापुर, मवैय्या, तालगाँव, सिहाली, घघसी, छेदा, शरीफाबाद इलाके बिजली के गंभीर संकट से जूझ रहे हैं।

‘’गाँव में पिछले वर्ष कई घरों में बिजली के मीटर लगवाए गए थे, पर उसमें भी मनमानी हुई, प्रधान जी के साथ जिसके संबंध अच्छे थें, उनके यहां मीटर लगा औऱ बाकी बचे घरों में मीटर अभी तक नहीं लगा है।’’ प्रीती मिश्रा (30 वर्ष) बताती हैं। गाँव में बिजली की समस्या के बारे में ग्राम प्रधान से कई बार बात करने का प्रयास किया गया, पर फोन बंद रहने के कारण उनकी तरफ से कोई भी जवाब नहीं मिल सका।

स्वयं वलेंटियर - अमिता मिश्रा 

शारदा विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, बाराबंकी

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

Tags:    India 
Share it
Top