दाल कीमतों पर लगाम कसने का नया सरकारी फॉर्मूला

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पटना। ये बात सुनने में ज़रा अटपटी ज़रूर लग रही है कि लेकिन खाद्य मंत्री राम विलास पाससाव की मानें तो अब चीनी और दाल की कीमतों में इज़ाफ़ा नहीं होगा। पासवान का दावा है कि सरकार ने इसके लिए ख़ास तरह का मैकेनिज्म डिज़ाइन किया है। पासवान के मुताबिक़ सरकार की इस कोशिश में राज्य सरकारों की मदद की भी ज़रूरत पड़ेगी। 

गुरुवार को पूर्वी भारत के राज्यों के अधिकारियों और मंत्रियों की बैठक के बाद खाद्य मंत्री ने कहा कि बिहार सरकार को दाल की आवश्यकता के बारे में पत्र लिखा गया था, लेकिन अब तक जवाब नहीं नहीं मिला है। राज्य सरकार द्वारा मांग के अनुरूप दाल की आपूर्ति की जायेगी।

चीनी के मामले में चीनी मिलों की समस्या बताते हुए उन्होंने कहा कि चीनी की उत्पादन लागत 32-35 रुपये प्रति किलो है। अभी 28-29 रुपये के बीच दर है। चीनी का स्टॉक लिमिट कर दिया है। चीनी के मामले में भी जमाखोरी कानून लागू कर दिया गया है। जमाखोरी करने वाले के खिलाफ़ सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।

पासवान ने कहा कि दाल का बफर स्टॉक तैयार कर लिया गया है। एफसीआइ को 50 हजार टन दाल की खरीद का निर्देश दिया गया है। 25 हजार टन आयात किया जा रहा है। आने वाले फसल सीज़न में एक लाख टन दाल की खरीदारी की जाएगी। ऐसे में दाल की समस्या नहीं होगी। 

अब विदेशों से आने वाले दाल, कालाबाज़ारी समेत अन्य बातों पर ध्यान रखा जायेगा। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के हित को देखते हुए उपभोक्ता संरक्षण कानून में बदलाव लाया जा रहा है। आनेवाले लोकसभा के सत्र में इसे पारित किया जायेगा। इसमें वस्तुओं की गुणवत्ता में कमी पर विज्ञापन करने वाले सेलिब्रिटी पर भी कार्रवाई की जायेगी। उपभोक्ताओं के लिए न्यायिक प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। वो 21 दिन के अंदर मामला दायर कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि भ्रामक विज्ञापनों पर कार्रवाई की जायेगी।

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